मैथिली भाषा | Maithili language

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मैथिली भाषा भारत के उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र में बोली जाती है। मैथिली भाषा भारतीय आर्य परिवार में आती है। संस्कृत भाषा मैथिली भाषा प्रमुख स्रोत है। संस्कृत भाषा के ‘तत्सम’ और ‘तद्भव’ दोनों तरह के शब्दों को मैथिली भाषा में इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर यह भाषा बहुत ही मोहक लगती है।

मैथिली भाषा खासतौर पर दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, शिवहर, भागलपुर, मधेपुरा, अररिया, सुपौल, वैशाली, सहरसा, रांची, बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद और देवघर जिलों में बोली जाती है। इसके साथ ही यह भाषा नेपाल के 8 जिलों- धनुषा, सिरहा, सुनसरी, सरलाही, सप्तरी, मोहतरी, मोरंग और रौतहट में भी बोली जाती है।

इस भाषा की उत्त्पत्ति  ‘मागधी प्राकृत’ से हुई थी। कुछ स्थानों में यह भाषा बंगाली और कुछ स्थानों में यह भाषा हिंदी से मिलती है।

सन् 2003 में मैथिली भाषा को भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया गया था। 2007 में यह भाषा नेपाल की क्षेत्रीय भाषा बनी और इसी दर्जे के साथ इसे नेपाल के अन्तरिम संविधान में स्थान दिया गया।

लिपि

पहले मैथिली भाषा को बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती-जुलती लिपि ‘मिथिलाक्षर’ तथा ‘कैथी’ लिपि में लिखा जाता था। ‘मिथिलाक्षर लिपि’ को लोग  ‘तिरहुता’ या ‘वैदेही’ लिपि के नाम से भी जानते हैं। यह लिपि असमिया, बांगला और उड़िया लिपि की माँ के रूप में भी जानी जाती है। ‘उड़िया लिपि’ आगे चलकर द्रविड़ भाषाओं के सम्पर्क की वजह से बदल गई।

विकास

मैथिली लिपि का सबसे पहला प्रयोग रामायण में मिलता है। यह भाषा ‘त्रेता युग’ से चली आ रही है, त्रेता युग में यह भाषा मिथिलानरेश ‘राजा जनक’ की राज्यभाषा थी। यही वजह है कि यह भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक मानी जाती है। शुरुआती मैथिली भाषा का विकास ‘प्राकृत’ और ‘अपभ्रंश’ के विकास से जुड़ा हुआ माना जाता है।

‘विद्यापति’ एक महान कवि थे, जो मैथिली भाषा के आदिकवि और सर्वाधिक ज्ञाता कवि के रूप में जाने जाते हैं। विद्यापति ने संस्कृत और अवहट्ट में भी कई रचनाएं की हैं। भारत में लगभग 5.6 प्रतिशत यानी लगभग 7 से 8 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो मैथिली भाषा को अपनी मातृ-भाषा के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस भाषा को भारत और नेपाल में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी इस्तेमाल किया जाता है। मैथिली भाषा पूरी दुनिया की सबसे समृद्ध, शालीन और मिठास भरी भाषाओं में से एक है। मैथिली भाषा भारत की एक राजभाषा भी है। मैथिली भाषा समृद्ध इसलिए भी है, क्योंकि उसकी अपनी लिपि है।

भारत और नेपाल दोनों देशों में से कहीं पर भी सरकार ने मैथिली भाषा के विकास से जुड़े हुए कदम नहीं उठाये। इसलिए गैर सरकारी संस्थाओं (NGO) और मीडिया ने कुछ पहल की, ताकि इस भाषा को बचाया जा सके। अब लगभग 15/20 रेडियो स्टेशन ऐसे हैं, जिसमें मैथिली भाषा में कार्यक्रम चलाऐ जाते हैं। आज के समय में किसी-किसी रेडिओ में तो 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कार्यक्रम मैथिली भाषा में हो रहे हैं, यह पिछले 2 से 3 सालों में हुआ है। आज के समय में तो टी. वी. में भी मैथिली में खबरें दी जाती हैं, ऐसे कुछ नेपाल के चैनल का नाम हैं- नेपाल 1, सागरमाथा चैनल, तराई टी.वी. और मकालू टी.वी.।

साहित्य

मैथिली का इतिहास काफी पुराना और समृद्ध है। ‘कवि विद्यापति’ को मैथिली साहित्य में सबसे ऊँचा स्थान प्राप्त है, वे 14वीं और 15वीं शताब्दी के कवियों में आते हैं। इसके बाद के काल में  गोविन्द दास, चन्दा झा, मनबोध, पंडित सीताराम झा, जीवनाथ झा (जीवन झा) को प्रमुख साहित्यकार माना गया है।