महिलाओं का शोषण | Mahilao ka Shoshan | Exploitation of Women

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हमारे समाज में महिलाओं को कम दर्जा दिया जाता है। पुरुषों के मुकाबले इससे हमारी पिछड़ी सोच का पता चलता है। यह लगभग पूरे देश में देखा जा सकता है, मगर खासतौर पर पिछड़े हुए इलाकों में यह ज्यादा देखने को मिलता है। समाज को महिलाओं के प्रति अपना नजरिया बदलने की जरुरत है।

महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा मिले, तभी समाज एक अच्छी दिशा में बढ़ेगा, राज्य आगे बढ़ेगा और देश की प्रगति होगी। भारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर हमेशा चिंता जतायी जाती है। मगर अब पिछले कुछ सालों में सरकार की कोशिश और समाज में बदलाव के चलते महिलाओं की स्थिति सुधर रही है। समाज और परिवार में महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे ही सही, पर एक अच्छा बदलाव आ रहा है।

बढ़ती भागीदारी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट के हिसाब से शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पहले से बढ गई है। शिक्षण संस्थानों तक लड़कियों की पहुँच लगातार बढ़ रही है। एक दशक पहले हुए सर्वेक्षण में शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 55.1% थी, जो अब बढ़कर 68.4% तक पहुंच गयी है। यानी इस क्षेत्र में 13% से अधिक की बढ़त दर्ज की गयी है।

भारत में बाल विवाह की दर में भी गिरावट हुई है और यह भी महिला शिक्षा और महिलाओं को ऊँचा दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महिलाओं के विरूद्ध अपराध

पुलिस रिकॉर्ड के हिसाब से भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराध का एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। यह आंकड़ा एक चिंता का विषय है। यौन उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, गर्भपात, महिला तस्करी व अन्य उत्पीड़न के आकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वर्ष 1997 में सर्वोच्य न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। एक रिपोर्ट में पाया गया है कि दुनियाभर में होने वाले बाल विवाहों का 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में है। भ्रूण हत्या के मद्देनजर इस पर प्रतिबंध लगाने का सराहनीय कार्य भारत सरकार ने किया है और घरेलू हिंसा पर रोकथाम के लिए 26 अक्टूबर 2006 में महिला संरक्षण एक्ट भी लागू किया है।

अभी हाल में ही 22 अगस्त 2017 में सर्वोच्य न्यायालय की 5 जजों वाली बेंच ने तीन तलाक जैसी कुरीतियों पर प्रतिबंध लगाकर मुस्लिम समाज को एक नई दिशा प्रदान कीहै। यह सभी महिलाओं का दर्जा ऊंचा करने के लिए किया जा रहा है।

कारण

समाज की छोटी मानसिकता इस समस्या का एक मुख्य कारण है। भारत में महिलाओं को पुरुषों से कम महत्व दिया जाता है। समाज का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि पुरुष महिलाओं से अधिक कमाई करने में सक्षम है। यह व्यापक रूप से देखा जाता है कि परिवार के पुरुष सदस्य महिला सदस्यों की गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं।

नकारात्मक प्रभाव

  • महिलाओं को समाज के लिए कुछ करने का कभी भी बराबर का मौका नहीं दिया जाता है।
  • महिलाओं का दर्जा कम होने की वजह से लोगों को बच्चे के रूप में लड़की नहीं, लड़का चाहिए होता है।यह सोच हमारे समाज के लिए अच्छी नहीं है।
  • कई बार ‘दहेज़’ रूपी दानव लड़की के परिवार पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। दहेज़ के बोझ के नीचे दबे होने की वजह से लड़की के परिवार वाले शादी के समय ख़ुश नहीं रहते, बल्कि उन्हें दहेज़ कि चिंता रहती है। यही वजह हैकि हमारे समाज में लोग लडकियों को बोझ समझते हैं।

हल

  • इस समस्या को हल करने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • समाज की छोटी मानसिकता को बदलने के लिए जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। समाज में महिलाओं की भूमिका और योगदान को स्वीकार करने के लिए अभियान शुरू किए जाने चाहिए।
  • ‘शिक्षा’ समाज में महिलाओं की ‘निम्न स्थिति’ की समस्या को हल करने में भी मदद कर सकती है।