महाशय धर्मपाल गुलाटी की जीवनी | Mahashay Dharampal Gulati Biography in Hindi

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परिचय

महाशय धर्मपाल गुलाटी भारत के एक जाने माने उद्यमी और समाज सेवक हैं। महाशय धर्मपाल गुलाटी ही एम. डी. एच. (MDH) मसालों के मालिक हैं। महाशय धर्मपाल गुलाटी की तस्वीर भी हर एम. डी. एच. (MDH) मसालों के पैकेट पर छपी हुई होती है, ताकि असली और नकली की पहचान की जा सके। एम. डी. एच. (MDH) का पूरा नाम ‘महाशय दी हट्टी’ है। एम. डी. एच. मसालों की शुरुआत 1919 में की गई थी। इसकी स्थापना ‘महाशय चुनी लाल’ द्वारा सियालकोट (जो आज के समय में पाकिस्तान का भाग है) में एक छोटी सी दुकान के तौर पर हुई थी। तब से वह पूरे देश में बढती जा रही है। आज के समय में उनके मसालों को और भी कई देशों में भेजा जाता है और इतना ही नहीं वे एक ट्रस्ट भी चलाते हैं, जिसका नाम ‘महाशय चुनी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट’ है।

जीवन

महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को सियालकोट (जो आज के समय में पाकिस्तान का भाग है) में हुआ था। महाशय धर्मपाल की माता का नाम ‘चनान देवी’ और पिता का नाम ‘महाशय चुनी लाल’ था। महाशय धर्मपाल गुलाटी के माता-पिता दोनों ही लोकोपकारी और धार्मिक थे। सन् 1933 में महाशय धर्मपाल गुलाटी ने स्कूल छोड़ दिया था, तब वे 5वी कक्षा में ही थे। सन् 1937 में पिता से मदद मिलने की वजह से उन्होंने एक छोटा व्यापार शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कुछ समय तक साबुन का व्यापार और बाद में नौकरी भी शुरू की।

आगे चलकर महाशय धर्मपाल गुलाटी ने कपड़े का और फिर चावल का व्यापार भी शुरू किया था, मगर किस्मत का साथ ना होने की वजह से वे इनमें से किसी व्यापार में टिक नहीं पाए। फिर अंत में उन्होंने अपने पैतृक व्यवसाय को ही करने का निर्णय लिया और वह व्यवसाय मसालों का था, जो ‘देगी मिर्च वालों’ के नाम से जाना जाता था, वह पूरे भारत में बहुत मशहूर हुआ। करियर  जब देश का बंटवारा हुआ, तब वे दिल्ली (भारत) आ गए, तब उनके पास केवल 1500 रूपये ही थे। उसके बाद उन्होंने अपने पास बचे पैसों में से 650 रूपये का तांगा (टांगा) खरीदा और नई दिल्ली स्टेशन से बड़ा हिन्दू राव तक उसे चलाना शुरू कर दिया। महाशय धर्मपाल गुलाटी ने 1953 में दिल्ली के चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली, जिसका नाम उन्होंने “महाशिया दी हट्टी” (MDH) रखा और  फिर से मसालों का काम करना शुरू कर दिया।

काम में पूरी लगन और ईमानदारी की वजह से महाशय धर्मपाल गुलाटी का काम सफलता की ओर बढने लगा था। इन्होंने अपने काम से बहुत लोगों को प्रेरित किया, ऐसे बहुत कम ही लोग हैं, जो महाशय धर्मपाल गुलाटी जी की मेहनत को जानते हैं। महाशय धर्मपाल गुलाटी ने अपने ब्रांड ‘एम. डी. एच.’ को पूरे भारत का दूसरा सबसे बड़ा मसाले का ब्रांड बना दिया है, जो भारत के मसालों के बाजार में लगभग 12% पर राज करता है।

इस सफलता के पीछे कोई खास कारण नहीं है। महाशय धर्मपाल गुलाटी का कहना है कि उन्होंने बस व्यवसाय के लिए बनाए गए नियमों का पालन किया और वे आगे बढ़ते गए। महाशय धर्मपाल गुलाटी का कहना यह भी है कि किसी भी व्यवसाय में हमें अपने ग्राहकों का भी ध्यान रखना चाहिए, तभी कोई भी व्यवसाय अच्छे से चल सकता है। महाशय धर्मपाल गुलाटी लोगों की सेवा करने से कभी पीछे नहीं हटते और वे धार्मिक कार्यों के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं।