महाराजा पैलेस या मैसूर महल | Maharaja Palace Ya Mysore Mahal in Hindi

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मैसूर महल कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में स्थित एक ऐतिहासिक महल है। इस महल को “अंबा विलास महल” के नाम से भी जाना जाता है। इस महल में इंडो-सारासेनिक, द्रविडियन, रोमन और ओरिएंटल शैली का वास्तुशिल्प देखने को मिलता है। इस तीन मंजिला महल के निर्माण के लिए भूरे ग्रेनाइट का प्रयोग किया गया था, जिसमें तीन गुलाबी संगमरमर के गुंबद होते हैं। महल के साथ-साथ यहाँ 44.2 मीटर ऊंचा एक पांच मंजिला टावर भी है, जिसके गुंबद को सोने से बनाया गया है।

मैसूर महल विश्व के सर्वाधिक घूमे जाने वाले महलों में से एक है। इसका प्रमाण इस बात से लगाया जा सकता है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे विश्व के 31 अवश्य घूमे जाने वाले स्थानों में रखा है। मैसूर पैलेस का निर्माण महाराजा कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ द्वारा किया गया था। यह पैलेस बाद में बनवाया गया। इससे पहले का राजमहल चन्दन की लकड़ियों से बना हुआ था। एक दुर्घटना में राजमहल क्षतिग्रस्त हो गया जिसके बाद यह दूसरा महल बनवाया गया। पुराने महल को बाद में ठीक किया गया जहाँ अब संग्रहालय है। मैसूर महल भारत-अरबी शैली   में निर्मित एक तीन मंजिला भवन है। मैसूर महल की देख-भाल अब भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा की जाती है।

इस महल में मैसूर के वुडेयार महाराज निवास करते थे। मैसूर महल का निर्माण सन. 1897 से सन. 1912 के दौरान हुआ था। इस महल को अंग्रेजी वास्तुकार हेनरी इरविन के द्वारा डिजाइन किया गया है। महल में एक बड़ा सा दुर्ग है, जिसके गुंबद सोने की परतों से सजे हुए हैं। ये सूरज की रोशनी में खूब जगमगाते हैं। मैसूर पैलेस के गोम्बे थोट्टी के सामने सात तोपें रखी हुई हैं। इन्हें हर साल दशहरा के आरंभ और समापन के मौके पर दागा जाता है। गोंबे थोटी के सामने दशहरा के मौके पर समारोह का समापन किया जाता है और 200 किलो के मुकुट को आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाता है। महल के मध्य में पहुँचने के लिए गजद्वार से होकर गुजरना पड़ता है। वहाँ कल्याण मंडप अर्थात् विवाह मंडप है, जिसकी छत रंगीन शीशे की बनी है और फर्श पर चमकदार पत्थर के टुकड़े लगे हैं। कहा जाता है कि फर्श पर लगे पत्थरों को इंग्लैंड से मंगाया गया था।

यहाँ 19 वीं और प्रारंभिक 20 वीं शताब्दी की गुड़ियों का संग्रह है। इसमें 84 किलो सोने से सजा लकड़ी का हौद भी है जिसे हाथियों पर राजा के बैठने के लिए लगाया जाता था। इसे एक तरह से घोड़े की पीठ पर रखी जाने वाली काठी भी कहा जाता है। महल में आप उन कमरों को भी देख सकते हैं जिनमें शाही वस्त्र, तस्वीर और आभूषण रखे गए हैं। साथ ही महल की दीवार को सिद्धलिंग स्वामी, राजा रवि वर्मा और के. वेंकटप्पा के पेंटिंग्स से सजाया गया है। 14 वीं से 20 वीं शताब्दी के मध्य बनाये गए मैसूर महल में 12 मंदिर भी हैं, जिनमें अलग-अलग वास्तु-शिल्पीय देखने को मिलती है।