3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग | Mahakaleshwar Jyotirlinga in Hindi

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश राज्य की धार्मिक राजधानी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ प्रतिदिन सुबह के समय की जाने वाली भस्मारती पूरी दुनिया में विख्यात है। महाकालेश्वर की पूजा दीघार्यु और आयु पर आए संकट को दूर करने के लिए की जाती है। उज्जैन नगरी के निवासियों का मानना है कि श्री महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है। तांत्रिक परंपरानुसार दक्षिण मुखी पूजा का महत्व 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल भगवान महाकालेश्वर को ही प्राप्त है। देश भर में यह स्थान ‘महाकाल’ के नाम से प्रसिद्ध है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा

शिव पुराण में वर्णित कथानुसार अवंती नगरी में एक वेद कर्मरत ब्राहमण निवास करता था। वह अपने घर में हर रोज अग्निहोत्र (हवन) किया करता था और वैदिक कर्मों के अनुष्ठान में लीन रहता था। भगवान शिव के परमभक्त उस ब्राहमण नाम ‘वेदप्रिय’ था। ‘वेदप्रिय’ भगवान शिव का अनन्य भक्त था, जिसके फलस्वरूप उनके चार पुत्र हुए। चारों पुत्र तेजस्वी और माता-पिता के सदगुणों के अनुरूप ही थे। उन चारों पुत्रों के नाम ‘देवप्रिय’, ‘प्रियमेधा’, ‘संस्कृत’, तथा ‘सुवृत’ थे।

उस समय रत्नमाल पर्वत पर ‘दूषण’ नामक एक धर्म विरोधी असुर ने वेद, धर्म, तथा धर्मांत्माओं पर आक्रमण कर दिया था। उस असुर को ब्रहमा जी से अजेयता का वरदान मिला हुआ था। सबको परेशान करने के बाद उस असुर ने भारी सेना के साथ उज्जैन के उन कर्मनिष्ठ ब्राहमणों पर आक्रमण कर दिया। उस असुर की आज्ञा पाकर चार दैत्य चारों दिशाओं में उत्पात मचाने के लिए आग के समान प्रकट हो गए। राक्षसों के उत्पात से शिवभक्त तथा ब्राहमण बन्धु भयभीत नहीं हुए। अवन्ति नगरवासी सभी ब्राहमण उन राक्षसों से घबराकर चारों शिवभक्त भाईयों के पास पहुँच गए। उन चारों शिवभक्त भाईयों ने उन्हें आश्वासन दिया और कहा- “आप लोग भक्तों के हितकारी भगवान पर विश्वास रखें।” उसके बाद चारों शिवभक्त भाई भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए ध्यान में लीन हो गए।

अपनी सेना लेकर दूषण राक्षस ध्यानमग्न उन शिवभक्त भाईयों के पास जा पहुँचा। उन शिवभक्त भाईयों को देखकर राक्षस ने अपने सैनिकों से कहा- “इन्हें बाँधकर मार ड़ालों।” शिवभक्त भाईयों ने उस राक्षस द्वारा कही गई बातों पर ध्यान नहीं दिया और भगवान शिव के ध्यान में लीन रहे। जब उस राक्षस ने यह समझ लिया कि डाँटने-फटकारने से कुछ भी परिणाम नहीं निकलेगा, तब उसने शिवभक्त भाईयों को मारने का निश्चय किया।

राक्षस ने जैसे ही शिवभक्त भाईयों के प्राण लेने के लिए शस्त्र उठाया, तभी शिवभक्त भाईयों के द्वारा पूजित लिंग की जगह तेज आवाज के साथ एक गड्ढ़ा प्रकट हो गया और तभी उस गड्ढ़े से भयंकर रूपधारी भगवान शिव प्रकट हो गये। दुष्टों का नाश करने वाले तथा सज्जन पुरूषों के कल्याणकर्ता भगवान शिव ही महाकाल के रूप में इस धरती पर प्रख्यात हुए।

इस प्रकार भगवान शिव ने अपनी हुँकार से ही राक्षसों को भस्म कर दिया। इस तरह भगवान शिव ने दूषण नामक राक्षस का वध कर दिया। देवताओं ने खुश होकर अपनी दन्दुभियाँ बजायीं और आकाश से पुष्प वर्षा की।

शिवभक्त भाईयों से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा- “मैं महाकाल महेश्वर तुम लोगों से अति प्रसन्न हूँ, तुम वरदान माँगो।” भगवान शिव की वाणी सुनकर भक्ति भाव से परिपूर्ण उन ब्राहमणों ने हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्वक कहा- “दुष्टों को दंण्डित करने वाले महाकाल! प्रभु! आप हम सभी को इस संसार के मायाजाल से मुक्त कर दें। हे प्रभु! आप आम जनता के कल्याण तथा उनकी रक्षा करने के लिए हमेशा के लिए यहीं पर विराजित रहिए।”

भगवान शिव ने उन ब्राहमणों को सद्गति प्रदान की और भक्तों की रक्षा के लिए उस गड्ढ़े में स्थित हो गए और गड्ढ़े के चारों तरफ की भूमि लिंग रूपी भगवान शिव स्थली बन गई। इस प्रकार भगवान शिव इस धरती पर महाकालेश्वर के नाम से विख्यात हुए।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हे। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हर रोज प्रातःकाल और संध्या के समय इन 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपने से या दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप या कष्ट दूर हो जाते हैं।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संबंध में श्लोक निम्नलिखित है-

श्लोक-
अवंतिकाया विहितावतारम्, मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थम्, वंदे महाकाल महासुरेशम्।।

यहां दिए गए निम्नलिखित श्लोकों को पढ़ते हुए जो व्यक्ति सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का मन से ध्यान करता है, उसके सातों जन्म के पाप या कष्ट नष्ट हो जाते हैं। वास्तव में 64 ज्योतिर्लिंगों को माना जाता है, लेकिन इनमें से 12 ज्योतिर्लिंगों को ही सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।

 ज्योतिर्लिंगों की तालिका

क्रम. संख्या ज्योतिर्लिंग का नाम ज्योतिर्लिंग का स्थान ज्योतिर्लिंग का संक्षिप्त वर्णन
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रभास पाटन, सौराष्ट्र, गुजरात विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे 17 बार नष्ट किया। सबसे अधिक नुकसान महमूद गजनवी के हमले से हुआ था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया है।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर, कुर्नूल, आन्ध्र प्रदेश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षिप्रा नदी के तट पर, महाकाल, उज्जैन, मध्य प्रदेश महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर, मध्य प्रदेश ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का आकार औंकार अर्थात ऊं जैसा है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाता है।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर, केदारनाथ, उत्तराखंड केदारनाथ ज्योतिर्लिंग समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मुंबई से पूर्व दिशा में और पुणे से उत्तर दिशा में भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर, भीमाशंकर, महाराष्ट्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर भगवान शिव ने भीमासुर राक्षस का वध किया था।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग गंगा तट पर, काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ में भगवान शिव का वास है, जो व्‍यक्ति इस पवित्र स्‍थान पर मृत्‍यु को प्राप्‍त होता है, वह इस संसार के क्लेश से मुक्त हो जाता है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे, नासिक, महाराष्ट्र ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में रहना पड़ा।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर, झारखंड लंकापति रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर एक शिवलिंग प्राप्त किया, जिसे वह लंका में स्थापित करना चाहता था, परंतु ईश्वर की लीला से वह शिवलिंग वैद्यनाथ धाम में ‍ही स्थापित हो गया।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दारुकावन, द्वारका, गुजरात भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। धार्मिक शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता माने गए हैं, नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, रामनाड, तमिलनाडु इस ज्योतिर्लिंग के विषय में मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। यहां पर श्रीराम ने बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की और रावण पर विजय हेतु भगवान शिव से वरदान मांगा।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एल्लोरा के पास, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ऐसी मान्यता है कि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से वंशवृद्धि होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका निर्माण अहिल्‍याबाई होल्‍कर के द्वारा करवाया गया था।