एम. करुणानिधि की जीवनी | M. Karunanidhi Biography in Hindi

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परिवार

एम. करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को  ब्रिटिश भारत के नागपट्टिनम के तिरुक्कुभलइ में हुआ था। इनका पूरा नाम मुत्तुवेल करुणानिधि था। उनके माता-पिता का नाम अंजुगम और मुत्तुवेल था। एम. करुणानिधि की 3 शादिया हुई थी। पद्मावती अम्मल उनकी पहली पत्नी थी और उन दोनों का एक बेटा एम. के. मुत्थु था। पद्मावती अम्मल का देहांत होने के बाद एम. करुणानिधि ने दयालु अम्मल से विवाह किया, जिनसे उनके तीन बेटे हुए- एम.के अलागिरी, एम.के स्टालिन और एम.के तमिलरसु और एक बेटी भी हुई, जिसका नाम  एम.के सेल्वी रखा। अपनी तीसरी पत्नी राजथी अम्मल के साथ करुणानिधि की एक बेटी कनिमोझी हुई।

राजनीति में प्रवेश

एक भाषण से प्रेरित होकर एम. करुणानिधि ने 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया, वह भाषण जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी द्वारा दिया गया था। तब एम. करुणानिधि ने हिंदी विरोधी आंदोलन में भाग लिया था। इन्होंने अपने यहां के युवाओं के लिए एक संगठन  बनाया था। एम. करुणानिधि ने संगठन के सदस्यों को ‘मनावर नेसन’ नामक एक हाथों से लिखा अखबार परिचालित किया था।  बाद में उन्होंने एक और संगठन छात्रों के लिए बनाया, उस  संगठन  का नाम ‘तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम’ रखा गया, जो द्रविड़ आन्दोलन का पहला छात्र विंग बना था।

एम. करूणानिधि अपने साथ-साथ बाकी सदस्यों को और छात्र समुदाय को भी सामाजिक कार्य में शामिल कर लिया। तब उन्होंने DMK दल के सदस्यों के लिए एक अखबार चालू किया, जो DMK दल के आधिकारिक अखबार ‘मुरासोली’ के रूप में सामने आया। तमिल राजनीति में अच्छी तरह जमने के लिए उनकी मदद ‘कल्लाकुडी’ में हिंदी विरोधी विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी की थी, वह उनका राजनीति की तरफ पहला कदम था।

इस औद्योगिक नगर को उस समय उत्तर भारत के एक शक्तिशाली मुग़ल के नाम पर डालमियापुरम कहा जाता था। विरोध प्रदर्शन करने के लिए एम. करूणानिधि और उनके साथियों ने मिलकर रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया और रेलगाड़ियों का रास्ता रोकने के लिए पटरी पर लेट गए। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई और एम. करूणानिधि को गिरफ्तार कर जेल में ड़ाल दिया गया था।

राजनीतिक पद

मुत्तुवेल करुणानिधि एक भारतीय राजनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे। वे एक द्रविड़ राजनीतिक दल (द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम), जो तमिलनाडु राज्य से है, उसके प्रमुख थे। 1969 में जब DMK के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई का देहांत हो गया, उसके बाद से एम. करुणानिधि इस दल के नेता बने थे। वे कुल पांच बार सन 1969 से 1971, 1971 से 1976, 1989 से 1991, 1996 से 2001 और 2006 से 2011 तक  मुख्यमंत्री भी रहे।

एम. करुणानिधि ने अपने 60 साल के राजनीतिक करियर में जिस चुनाव में हिस्सा लिया, उस में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी में DMK के नेतृत्व वाली DPA का नेतृत्व भी किया और लोक सभा की 40 सीटों को भी जीता। उसके बाद एम. करुणानिधि ने 2009 के लोक सभा चुनावों के दौरान DMK की जीती हुई सीटों की संख्या बढ़ाकर 16 से 18 कर दी थी। उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी  में UPA का नेतृत्व किया और एक बहुत छोटा गठबंधन बनाया, उसके बावजूद उन्होंने 28 सीटों पर विजय हासिल की। एम. करुणानिधि तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी हैं, उनके समर्थक उन्हें ‘कलाईनार’ कहते थे, जिसका मतलब होता है “कला का विद्वान”।

मृत्यु

एम. करूणानिधि का निधन 7 अगस्त 2018 को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में हुआ। उनकी मृत्यु अंग विफलता की वजह से हुई। एम. करूणानिधि का देहांत दक्षिण भारत के लोगों के लिए एक बड़ी घटना थी। एम. करुणानिधि जब से अस्पताल में भर्ती हुए थे, तब से कुल उनके 21 समर्थको की सदमे से  मौत हो गई थी। उनके देहांत के बाद तमिलनाडु में 7 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई थी।