पत्र-लेखन एक महत्त्वपूर्ण कला है। आज के अति व्यस्त जीवन में मोबाइल, टेलीफोन, फैक्स, इंटरनेट जैसे साधनों के विकसित होने पर भी पत्र लेखन का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

पत्र लेखन के प्रकार- लेखन के आधार पर पत्र दो प्रकार के होते हैं।

1 अनौपचारिक या व्यक्तिगत पत्र
2 औपचारिक पत्र

1) अनौपचारिक या व्यक्तिगत पत्र – व्यक्तिगत रूप से अपने माता-पिता, पुत्र-पुत्री, मित्र, संबंधी को लिखे गए पत्र अनौपचारिक पत्र कहलाते हैं। इनमें किसी भी प्रकार की औपचारिकता नहीं होती।

अनौपचारिक पत्र लेखन की विधि– अनौपचारिक पत्र लिखते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।

(क) लिखने वाले का पता, तिथि, संबोधन (रिश्ता) के अनुरूप, अभिवादन।
(ख) विषय-वस्तु
(ग) समापन, हस्ताक्षर

संबंध संबोधन अभिवादन समापन
दादा, पिता श्रद्धेय दादाजी पूजनीय/पूज्य दादाजी सादर चरण स्पर्श सादर नमस्कार आपका आज्ञाकारी स्नेहाभिलाषी शुभचिंतक
मामा, चाचा, फूफा, मौसा आदरणीय……जी पूज्यनीय……जी सादर नमस्कार चरण वंदना आपका आज्ञाकारी स्नेहाभिलाषी शुभचिंतक
माता, दादी, नानी आदरणीया……जी पूज्यनीया……जी सादर प्रणाम चरण स्पर्श आपका आज्ञाकारी स्नेहाभिलाषी
बड़ा भाई, बड़ी बहन आदरणीय भाईसाहब आदरणीय बहन जी सादर प्रणाम सादर प्रणाम आपका आज्ञाकारी स्नेहाभिलाषी
मित्र मित्रवर, प्रिय, स्नेही मित्र स्नेह, मधुर स्मृति दर्शनाभिलाषी, तुम्हारा अभिन्न मित्र
छोटा भाई, छोटी बहन प्यारे, प्रिय, स्नेहमयी शुभाशीर्वाद, सौभाग्यवती हितैषी, शुभचिंतक
पुत्र, पुत्री चिरंजीव, प्रिय, आयुष्मती सुखी रहो हितैषी, शुभचिंतक

2) औपचारिक पत्र – वे पत्र जो कार्यालयों, कंपनियों, व्यापारियों, प्रकाशकों आदि को लिखे जाते हैं, औपचारिक पत्र कहलाते हैं। इन पत्रों में आत्मीयता नहीं होती और संदेश तथा कथ्य की प्रमुखता रहती है।

औपचारिक पत्र लेखन की विधि– अनौपचारिक पत्र लिखते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।

(क) भेजने वाले का नाम और पता, तिथि, प्राप्त करने वाले की उपाधि और पता, संबोधन
(ख) पत्र की विषय-वस्तु
(ग) समापन, हस्ताक्षर

संबोधन अभिवादन समापन
(पत्र प्राप्त करने वाला अधिकारी) अध्यक्ष/संपादक/प्रधानाचार्य/ पोस्टमास्टर माननीय/महोदय श्रीमान/मान्यवर भवदीय/भवदीया प्रार्थी/निवेदक