किशोर अपराध | Kishore Apradh | Juvenile Crime

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असल में, किशोर अपराध नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों को कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण के अनुसार  बाल अपराध 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष  तक के बालक द्वारा किया गया कानून विरोधी कार्य है। किशोर लड़कों या लड़कियों द्वारा किए गए अपराध आमतौर पर किशोर अपराध कहलाते हैं। इसके लिए उन्हें बड़े लोगों की तरह जेल नहीं होती, उनके लिए खास अलग ‘बाल सुधार केन्द्र’ होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि माना जाता है, कि किशोर लड़कों या लड़कियों को दुनिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है।

भारत में किशोर अपराध और कानून

भारत में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। लोगों का मानना है कि बच्चे जो करते हैं, वो उसे अपने माँ-बाप से सीखते हैं। इसलिए अगर कोई किशोर कोई अपराध करता है, तो उसके आस-पास का माहौल गलत माना जाता है। इसी वजह से उसे सजा ना होकर ‘किशोर सुधार केन्द्र’ में भेजा जाता है।
ऐसा कर हम किशोरों को एक और मौका देते हैं, ताकि वह एक अच्छे माहौल में रहकर एक अच्छा नागरिक बन सकें। भारत में किशोरों द्वारा अपराध एक कड़वी वास्तविकता है। आज के समय में किशोर बहुत से आपराधो में शामिल हैं, जैसे- हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, लूट-पाट, चोरी आदि। यह एक चिंता का विषय है।
कई लोगों का मानना है कि वर्तमान कानून इस किशोर अपराध की स्थिति को काबू करने के लिए काफी नहीं है। इसमें बदलाव की जरुरत है, ताकि खतरनाक अपराधों के लिए किशोरों को भी बड़े लोगों की तरह दंडित किया जा सके, लेकिन बहुत सारे लोग इसके विरोध में भी हैं, जो इस विचार को नहीं मानते हैं।

नकारात्मक प्रभाव

बच्चों द्वारा किये गये आपराध केवल उनको ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और समाज को भी प्रभावित करते हैं। बच्चे देश का भविष्य होते हैं और इसकी वजह से उनकी पीढ़ी का भी नुकसान होता है और समाज में उनके परिवार का नाम भी ख़राब होता है।

कारण

कोई भी जन्मजात अपराधी नहीं होता, परिस्थितियाँ उसे अपराधी बना देती हैं। किसी के भी जीवन को नया रूप देने में घर के अन्दर और बाहर, दोनों जगह का वातावरण महत्वपूर्ण  भूमिका निभाता है।

  • बच्चों को बाहरी दुनिया के बारे में ज्यादा नहीं पता होता, इसलिए वह कई बार बिना जाने आपराध कर देते हैं।
  • टी.वी पर खून-खराबा और लड़ाई देखने से किशोर अवस्था के लड़के और लडकियों में हिंसा की भावना जागरूक होती है। यह समाज के लिए अच्छा नहीं है।
  • किसी भी बच्चे के बचपन में या किशोर अवस्था में घटित घटना का मन पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
  • परिवार में हो रहे आपसी झगड़ों की वजह से भी बच्चों पर गलत असर होता है और वो जुर्म की तरफ चलने लगते हैं।
  • गरीबी भी इसका एक प्रमुख कारण है, जो लोगों को जुर्म करने पर विवश कर सकता है।

हल

ऐसे कई संगठन हैं, जो किशोर अपराध की समस्या से निपटते हैं। वे संगठन उन बच्चों की मदद करने के लिए स्थापित हैं, जो किशोर अपराध में शामिल हैं। वे संगठन उनकी सोचने-समझने और निर्णय लेने की काबिलियत को बढ़ाते हैं। वे संगठन किशोर अपराध की भावना और इसके परिणामों को समझना शुरू कर देते हैं। उन संगठनों में ‘बाल सुधार घर’ और सलाहकार भी सरकार द्वारा चलाए जाते हैं, जो उन बच्चों का इलाज करते हैं और उन्हें एक अच्छा व्यक्ति बनाते हैं।