किसान विकास पत्र योजना का शुभारंभ वित्तमंत्री श्री अरूण जेटली ने 18 नवंबर 2014 को किया। यह एक प्रमाणपत्र योजना है, जो पहली बार 1988 में लाॅन्च की गई थी। किसान विकास पत्र योजना निवेश का एक दीर्घकालिक जरिया है। किसान विकास पत्र के जरिए आप डाक घर के माध्यम से दीर्घकालिक निवेश कर सकते हैं।

यह स्कीम छोटी बचत यानी कम आय वाले परिवारों की बचत को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। इसमें आपका धन 100 महिनों में दोगुना हो जाएगा। इसका लाभ पोस्ट आॅफिस से लिया जा सकता है। इसमें कम से कम 1 हजार के निवेश पर पैसा 100 महीने में दोगुना होगा। इसमें 1 हजार, 5 हजार, 10 हजार और 50 हजार तक की राशि को 100 महिनों में दोगुना करने का प्रावधान है।

किसान विकास पत्र में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। इसकी खासियत यह है कि अगर निवेशक चाहे तो इसे 30 महीने में लाॅक इन पीरियड के बाद भुना सकेगा। इतना ही नहीं, इसके बाद इसे हर 6 महीने की अवधि के बाद पूर्व निश्चित मैच्योरिटी वैल्यू पर भुनाया जा सकेगा। किसान विकास पत्र सिंगल या ज्वाइंट नामों से जारी किए जाते हैं तथा देश भर में कहीं भी आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को कई बार हस्तांतरित किए जा सकते हैं। इसमें नाॅमिनेशन का विकल्प भी मौजूद होता है। किसान विकास पत्र को किसी भी पोस्ट आॅफिस/बैंक से कैश पेमेंट, चैक, डिमांड ड्राफ्ट और उसी बैंक के सेविंग अकाउंट के विड्रावल फाॅर्म पर उपभोक्ता के हस्ताक्षर द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

किसान विकास पत्र का एक फायदा यह भी है कि आप नगदी देकर किसी भी पोस्ट आॅफिस से इसे खरीद सकते हैं, इसके लिए न तो बैंक खाते की जरूरत होगी और न ही चेक बुक की। किसान विकास पत्र के अंतर्गत जमा किए गए आपके जमा धन पर जितना ब्याज लगता है, उस ब्याज पर सरकार टैक्स वसूल करती है। इसमें निवेश की केाई अधिकतम सीमा नहीं है। किसान विकास पत्र का इस्तेेमाल कर्ज लेने के क्रम में भी किया जा सकता है। किसान विकास पत्र योजना में सरकार ने बड़ी राहत यह दी है कि इसमें ढ़ाई साल बाद पैसे वापस पाने का विकल्प भी मौजूद है।