कीर्ति चक्र | Kirti Chakra

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‘कीर्ति चक्र’ भारत का शांति के समय दिया जाने वाला वीरता पदक है। यह पदक सैनिकों या आम नागरिकों को असाधारण वीरता या जबरदस्त बलिदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार मरने के बाद भी दिया जाता है। वरीयता के हिसाब से देखा जाए, तो यह पुरस्कार ‘महावीर चक्र’ के बराबर का है। ‘कीर्ति चक्र’ शांति से समय के वीरता पुरस्कारों में दूसरे नंबर पर आता है, इससे पहले शांति पुरस्कारों में ‘अशोक चक्र’ आता है। 1969 से पहले यह पुरस्कार ‘अशोक चक्र क्लास 2’ के नाम से जाना जाता था।

इतिहास

कीर्ति चक्र की स्थापना 4 जनवरी 1952 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा की गई थी, बाद में 27 जनवरी 1967 को उस सम्मान का नाम बदलकर ‘कीर्ति चक्र’ रखा गया।

बनावट

यह गोल आकर का होता है और चाँदी से बनाया जाता है। इस पदक का व्यास 1-3/8 इंच का होता है। इस पदक के आगे की तरफ ‘अशोक चक्र’ बना हुआ होता है, जो कमल के फूलों की लड़ी से घिरा हुआ होता है। पदक के पीछे की तरफ हिंदी और अंग्रजी में ‘कीर्ति चक्र’ लिखा हुआ है, जिनके बीच में 2 कमल के फूल बने हुए हैं। पदक के पीछे के साइड का बीच का हिस्सा खाली होता है। इस पदक का फीता गहरे हरे रंग का होता है और उस पर केसरिया रंग की दो 2 mm की पट्टियां होती हैं।

पुरस्कार के लिए योग्यता

निम्नलिखित लोगों को ‘कीर्ति चक्र’ दिया जा सकता है-

  • यह पुरस्कार किसी भी पुरुष का महिला ऑफिसर को दिया जा सकता है, चाहे वह किसी भी सेना में हो।
  • सेना की नर्सिंग सेवाओं के सदस्यों को भी यह पुरस्कार दिया जाता है।
  • यह किसी भी आम नागरिक को दिया जा सकता है, चाहे वह किसी भी लिंग, जाति या धर्म का हो। यह पुरस्कार ‘केंद्रीय पैरा-मिलिट्री फोर्स’ और ‘रेलवे सुरक्षा बल’ सहित ‘पुलिस बल’, सबको दिया जा सकता है।