केरल

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केरल भारत के दक्षिण पश्चिम कोने में स्थित एक राज्य है। भारत के सर्वाधिक सम्पन्न और शिक्षित राज्यों में से एक केरल मन-भावन वाली सुंदरता के लिए भी विख्यात है। हेनरी बेकर और ऐमीलिया ने ही सबसे पहले केरल में शिक्षा की ज्योति प्रज्वलित की और इसी कारण आज केरल शिक्षा के मामले में और राज्यों के मुकाबले सबसे आगे है। यहा फैली हुई हरी-भरी सुंदरता और नदियों में नौका विहार का अपना अलग ही मजा है। किसी भी मौसम में घूमने की दृष्टि से केरल सबसे अच्छी जगह है। यह नारियल, बेकवाटर, संस्कृति और परंपराओं का गढ़ है। केरल घरती की सबसे मनमोहक जगहों में से एक होने के साथ-साथ “ईश्वर का अपना घर” (Gods Own Country) के नाम से भी विख्यात है। केरल पश्चिमी घाट और लक्ष्यद्वीप समुद्र के बीच स्थित है। भूमध्य रेखा से केवल 8 डिग्री की दूरी पर स्थित होने के कारण केरल का मौसम गर्म रहता है। केरल राज्य में 590 कि.मी. लंबी समुद्र तट रेखा है। शीतल मंद हवा और भारी वर्षा ही केरल की जलवायु की विशेषता है। हर साल करीब 120 दिन से लेकर 140 दिन वर्षा होती है। केरल को जल समृद्ध बनाने वाली 41 नदियाँ पश्चिमी दिशा में स्थित समुद्र या झीलों में जा मिलती है। इसके अलावा पूर्वी दिशा की ओर बहने वाली तीन नदियाँ, अनेक नहरें और झीलें है। केरल में औसत वार्षिक वर्षा 3017 मि.ली. होती है। केरल का कोवलम तट दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

केरल कैसे जाएं

केरल राज्य का तिरूवनंतपुरम शहर हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली से तिरूवनंतपुरम की दूरी लगभग 2237 कि.मी. है। रेल मार्ग द्वारा दिल्ली से तिरूवनंतपुरम की दूरी लगभग 3149 कि.मी. है और सड़क मार्ग द्वारा दिल्ली से तिरूवनंतपुरम की दूरी लगभग 2832 कि.मी. है। केरल घूमने के लिए सितंबर से मार्च का महीना सबसे उपयुक्त है।

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