Kargil Yudh kab Hua Tha

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच कश्मीर (Kashmir) के कारगिल (Kargil) में 1999 में हुए युद्ध को कारगिल युद्ध (Kargil War) कहा जाता है. दो महीने तक भारतीय और पाकिस्तानी सेना के बीच चली जंग में भारतीय सेना (Indian Army) ने 26 जुलाई को पाकिस्तान पर आधिकारिक जीत की घोषणा की| उसके बाद से अब तक हर साल 26 जुलाई को कारगिल युद्ध की याद में विजय दिवस मनाया जाता है| भारत और पकिस्तान सेना के बीच हुए इस युद्ध (War) में भारत के 500 से ज्यादा सैनिक (Soldier) शहीद हुए थे और पकिस्तान के भी 3000 से अधिक सैनिक मारे गए थे| ये दुनिया का ऐसा युद्ध था जो 18 हजार फीट की उंचाई पर लड़ा गया था| ये युद्ध तब हुआ था जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी (Atal Bihari Bajpeyi ) और पकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Nawaj Sharif) दोनों देशों के सम्बन्धों (Relation) को सुधारने पर लगे थे| जिसको लेकर प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने दिल्ली से लाहौर बस सेवा (Delhi-lahore Bus Service) भी शुरू की थी, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उस वक्त बड़ा धोखा कर दिया|

चरवाहे ने दी थी सूचना

उस वक्त प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पाकिस्तान से सम्बन्धों (Indo-Pak Relation) को सुधारने के लिए प्रयत्नशील थे| तभी दोनों देशों के बीच तनाव आ गया जो आज भी कायम है| भारतीय सेना (Indian Army) को 3 मई 1999 को एक चरवाहे ने आकर सूचना दी कि कारगिल (Kargil) में पाकिस्तानी सेना घुसपैठ कर रही है| जिसके बाद भारतीय सेना अलर्ट (Alert) हुई और पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के लिए सेना ऑपरेशन विजय (Operation Vijay)अभियान छेड़ा| जब भारतीय सेना की टुकड़ी पेट्रोलिंग के लिए कारगिल सेक्टर पहुंची तो वहां पांच जवानों की हत्या कर दी| भारत ने कारगिल में आधिकारिक युद्ध का ऐलान कर दिया और भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को भी अलर्ट किया गया| क्यूंकि पाकिस्तानी सेना के पांच हजार से अधिक सैनिक ऊँची पहाडियों पर जमे हुए थे जबकि भारतीय सेना नीचे से मोर्चा संभाल रही थी|

18 हजार फीट ऊंचाई पर लड़ा गया युद्ध

ये युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया, भारतीय सेना के लिए बोफोर्स तोप ने जीत में अहम् योगदान दिया| क्यूंकि इसे पहाड़ पर ले जाना और इस्तेमाल करना आसान था, वहीँ भारतीय वायु सेना ने  मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया. पाकिस्तान के कई ठिकानों पर वायुसेना ने आर-77 मिसाइलों से हमला किया| जिससे पाकिस्तानी सेना पार नहीं पा सकी| भारतीय सेना के लिए युद्ध एक बड़ी चुनौती था| क्यूंकि उंचाई पर पाकिस्तानी सेना के जवान थे जिस कारण भारतीय सेना के जवान रात में पहाड़ों की चढ़ाई करते थे| इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए थे और 1300 से अधिक जवान घायल हुए थे|

26 जुलाई को हुआ जीत का ऐलान

3 मई को घुसपैठ का पता चलने के बाद इस युद्ध के बंद होने का आधिकारिक ऐलान 26 जुलाई 1999 को हुआ. जिसमें कारगिल सेक्टर से पूरी तरह से घुसपैठियों के सफाया का ऐलान हुआ. शुरुआत में पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठियों को कश्मीरी उग्रवादी बताया लेकिन सैनिकों से मिले दस्तावेजों से पाकिस्तान की दुनिया में ख़ासा किरकिरी हुई थी. 1971 के बाद भारत और पाकिस्तान सेना के बीच ये सीधा युद्ध था, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में सैनिक और हथियारों का प्रयोग हुआ. रोजाना प्रति मिनट एक राउंड फायर किया गया. 5000 बम फायर किए गए.

युद्ध की वजह

इस युद्ध की बड़ी वजह पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जहाँगीर करामात के बीच सम्बन्ध बिगड़ना था| इन दोनों के बीच 1998 में ही मतभेद खुलकर सामने आ गए थे| उन्हें हटाकर नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ को सेना प्रमुख बना दिया था| कारगिल हारने के बाद पाकिस्तान में अंदरूनी राजनीतिक हालात खराब हो गए. बाद में परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार को हटाकर खुद प्रमुख बन गए थे|

पाकिस्तान की हुई फजीहत

कारगिल युद्ध के बीच प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ से कहा भी था कि लाहौर बुलाकर स्वागत करते हैं और फिर पीछे से युद्ध छेड़ देते हैं, ये अच्छा नहीं किया| इस युद्ध ने दुनिया भर में भारतीय सेना की बहादुरी को सलाम किया जिसने इतने विपरीत हालातों में विजय हासिल की. वहीं पाकिस्तान की दुनिया में खासा किरकिरी हुई और विदेश नीति में उसे खासा नुकसान हुआ|