कारगिल युद्ध कब हुआ था ? | Kargil ka Yudh Kab Hua tha

कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ एक युद्ध हैं, जो लगभग 60 दिनों तक चला था ।  इस युद्ध के बारे में सेना और सरकार के द्वारा जो जानकारी मिली उसके मुताबिक कारगिल युद्ध की नींव 1999 में फरवरी माह में रखी गई थी । जिसका अंत 26 जुलाई को हुआ था ।  इसलिए इस दिन को कारगिल विजय दिवस को रूप मनाया जाता है । यह दिवस कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के लिए एक श्रृद्धांजलि अर्पित करने हेतु मनाया जाता है ।  समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी लाहौर गए और पाकिस्तान के समकक्ष नवाज शरीफ से भेंट की । इस दौरान अटल जी के साथ पूर्व PM और कैबिनेट मंत्री , कलाकार आदि भी इनके साथ गए थे । एक तरफ तो पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध तो सुधर रहे थे और दूसरी ओर पाकिस्तान सेना भारत के खिलाफ एक षड्यंत्र रच रही थी ।

Kargil ka Yudh Kab Hua tha | When did Kargil war happened?

कारगिल युद्ध होने की आखिर वजह क्या थी ?

शुरुआत में पाकिस्तान की योजना भारत के राज्य कश्मीर पहाड़ी की चोटी पर कब्जा करना और श्रीनगर-लेह राजमार्ग को बंद करने की थी । इस राजमार्ग को बंद करने की सही रणनीति यह थी कि यह एक मात्र ऐसा रास्ता था जिसके जरिए भारत कश्मीर में तैनात सैनिकों को सैन्य हथियार भेजे जाते थे । पाकिस्तान की पहले से कारगिल युद्ध करने की योजना थी । पाकिस्तानी जनरल का मानना था कि जैसे ही हालात बिगड़ेंगे भारत और कश्मीर में बीच विवाद पर बातचीत भी होगी ।

कारगिल युद्ध –

भारतीय सेना ने धीरे धीरे यह महसूस किया कि पाकिस्तान आखिर करना क्या चाहता है । इसलिए फिर भारतीय सैनिकों ने बोफोर्स तोप मंगवाई । पर इन तोपों का इस्तेमाल इस तरह के ऑपरेशन में नहीं होता है और भारतीय सैनिकों ने इन तोपों को श्रीनगरलेह राजमार्ग पर ही तैनात किया जिसको पाकिस्तान बंद करने की फिराक में थी । पाकिस्तानी सेना पहाड़ियों की चोटी से भारतीय सेना पर हमला करते थे । और अब भारतीय सेना बोफोर्स तोप से हमला करती थी । इस तोप की खासियत यह है कि यह पहाड़ की चोटी को छोटे छोटे टुकड़ों में बदल देती है । और भारतीय वायुसेना ऊपर से लगातार बमबारी तो कर ही रही थी । कारगिल की पहाड़ियों से नीचे उतरने पर पाकिस्तान को भारी नुक़सान भी उठाना पड़ा था ।

अब पाकिस्तानियों को वापस लौटने के नाम  पर न तो कोई सड़क थी और ना ही कोई वाहन था । और वो पहाड़ी वातावरण से एक दोस्ताना वातावरण में आ रहे थे । और पहाड़ों की 16 से 18 हजार फीट की ऊंचाई से वापस आना बहुत मुश्किल होता है । वापस आने के लिए उनको की खाइयों को पार करना था , और ऊपर से इतनी भीषण ठंड । अब भारतीय को तो मौका मिल गया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की । भारतीय सेना ने अपनी वायुसेना का भरपूर इस्तेमाल किया , पर पाकिस्तान इसमें हार गया ।

चार जनरलों ने कारगिल युद्ध को अंजाम दिया था ।

कारगिल युद्ध को पाकिस्तान के चार जनरलों ने अंजाम दिया था । तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ , मेजर जनरल ज़ावेद हसन , जनरल महमूद अहमद , जनरल अजीज खान

कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवान –

कारगिल युद्ध में कुल 6 जवान शहीद हुए थे । 15 जून 1999 में गाजीपुर जिले नंदगंज के बागी गांव के शेषनाथ सिंह यादव , बिरनो के भैरोपुर के सीएनएफ कमलेश सिंह शहीद हुए थे । 3 जुलाई को भांवरकोल थाना क्षेत्र के गांव पखनपुर के ग्रेनेडियर मोहम्मद इश्तियाक खां  शहीद हुए थे । 20 अगस्त को इसी थाना क्षेत्र के पंडित पुरा गांव के ग्रेनेडियर रामदुलार यादव शहीद हुए थे । 1 सितंबर को देवकली ब्लाक के धुनईपुर के निवासी लांसनायक संजय कुमार सिंह यादव शहीद हुए थे ।

पाकिस्तान का मकसद था सियाचिन से भारत को अलग करना –

जिस समय कारगिल युद्ध की शुरुआत हुई उस समय भारतीय सेना के प्रमुख जनरल वेदप्रकाश मलिक पोलैंड और चेक गणराज्य की यात्रा पर गए हुए थे जहां उनको यह खबर सैनिक अधिकारियों से नहीं मिली , बल्कि वहां के राजदूतों ने उनको यह खबर दी । सवाल ये है कि लाहौर शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तानी सैनिकों का इस तरह से कारगिल पहाड़ियों में छुपने का मकसद पहले से था । और पाकिस्तान के सैनिकों का मकसद भारत की सुदूर उत्तर की जो टीप थी जहां सियाचिन ग्लेशियर की Life line NH-1D को किसी भी तरह से उस पर नियंत्रण करना था । और वे उन पहाड़ियों में इसलिए आना चाहते थे ताकि वो लद्दाख की ओर जाने वाली रसद के काफिलों को रोक सकें और भारत को मजबूत होकर सियाचिन छोड़ना पड़े । माना जाता है कि मुशर्रफ को ये बात बुरी लगी थी कि 1984 में भारत ने सियाचिन पर कब्जा कर लिया था। उस समय मुशर्रफ पाकिस्तान की कमांडो फोर्स के मेजर थे । उन्होंने बहुत बार उस जगह को खाली कराने की कोशिश तो कि पर कभी सफल नहीं हो पाए ।

तोलोलिंग पर हुए कब्जे ने पूरी बाजी ही पलट दी –

कारगिल युद्ध के दूसरे हफ्ते के खत्म होते होते चीजें भारतीय सेना के नियंत्रण में आने लगी थी । तब जनरल मलिक ने भारतीय सेना के प्रमुख जनरल वेद प्रकाश से पूछा कि आखिर इस लड़ाई का निर्णायक क्या है ?तब उन्होंने जबाव देते हुए कहा कि तोलोलिंग पर हमारी जीत । वह पहला हमला था जिसे हमने को- आरडिनेट किया था , और यह बहुत बड़ी सफलता थी हमारे लिए । ये लड़ाई मुश्किल से 4-5 दिन ही चली । और यह लड़ाई इतनी नजदीक से लड़ी गई थी कि दोनों तरफ के सैनिक एक दूसरे को गालियां दे रहे थे और दोनों पक्षों की बातें सुनाई भी दे रही थी । जनरल मलिक कहते हैं कि हमें इसकी बहुत बड़ी क़ीमत भी चुकानी पड़ी और हमारी बहुत कैजुएल्टीज हुई । उन 6 दिनों तक हमें बहुत खबराहट सी थी कि ये हो क्या रहा है , पर जब हमें जीत मिली तो हमें अपने सैनिकों और अफसरों पर भरोसा हो गया ।

कारगिल युद्ध में एक पाकिस्तानी जवान को हटाने के लिए लगे 27 जवान‌ ऐसा क्यों ?

कारगिल युद्ध लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में लड़ी जा रही थी जहां करीब 1700 पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सीमा के लगभग 8 -9 किलोमीटर अंदर  आ गए थे । इस कारगिल ऑपरेशन में भारत के 527 सैनिकों की मौत हुई थी और लगभग 1363 जवान घायल हुए थे । फौज की एक कहावत होती है Mountain it’s Tipu’s, इसका मतलब है कि पहाड़ सेना को खा जाता है अगर जमीन पर लड़ाई हो रही है इसलिए आक्रामक फौज को रक्षक फौज का कम से कम तीन गुना होना आवश्यक है । लेकिन पहाड़ों में यही संख्या कम से कम नौ गुना होनी चाहिए , और कारगिल युद्ध के लिए तो यह संख्या 27 गुना होनी चाहिए । यानि कि अगर दुश्मन का एक जवान है तो उसको हटाने के लिए हमें 27 जवान भेजने पड़ेंगे । पहले भारत ने पाकिस्तान के जवानों को हटाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई फिर बाद में ज्यादा सैनिकों को बहुत कम नोटिस पे इस अभियान के लिए बुलाया गया ।

कारगिल युद्ध की कुछ महत्वपूर्ण बातें –

* एक चरवाहे के द्वारा भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना की घुसपैठ करने और कब्जा जमाने की खबर मई 1999 में दी गई थी ।

* भारत के द्वारा LOC पर पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए कारगिल सेक्टर में विजय Operation अभियान को शुरू किया गया था ।

* 26 जुलाई को भारत ने कारगिल युद्ध में जीत हासिल की थी । इस कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था । और यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था ।

* इस कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए थे तथा 1363 जवान घायल हुए थे ।

* कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोप सेना के बहुत काम आई थी ।

* कारगिल युद्ध में भारतीय सेना को बहुत मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा क्योंकि पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाड़ी पर बैठकर हमला कर रहे थे और हमारे भारत के सैनिकों को गहरी खाई से उनका मुकाबला करना था । इसलिए भारतीय जवानों को रात में चढ़ाई कर ऊपर जाना पड़ रहा था जोकि बहुत जोखिम भरा था ।

* कारगिल युद्ध में वायुसेना का बहुत योगदान रहा है । भारतीय सेना ने 32 फीट की ऊंचाई से Air Power का इस्तेमाल किया । भारत की वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिंग -27 और मिंग -29 का इस्तेमाल किया । और जहां जहां पाकिस्तानियों ने अपना कब्जा किया था सब जगह हमारी वायुसेना ने बम गिराए । पाकिस्तानियों के की ठिकानों पर R-77 की मिसाइलों से भी हमला किया ।

* कारगिल युद्ध की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 14 जुलाई को की थी, पर आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है ।