कांशीराम की जीवनी | Kanshiram Biography in Hindi 

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परिचय

कांशीराम एक भारतीय राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने ‘अछूतों’ और ‘दलितों’ के राजनीतिक एकीकरण तथा उत्थान के लिए जीवन पर्यन्त कार्य किया। उन्होंने सन 1984 में ‘बहुजन समाज पार्टी’ (BSP) की स्थापना की। कांशीराम ने अपना पूरा जीवन पिछड़े वर्ग के लोगों की उन्नति के लिए और उन्हें एक मजबूत और संगठित आवाज़ देने के लिए समर्पित कर दिया। वे आजीवन अविवाहित रहे।

शुरूआती जीवन

कांशीराम का जन्म 15 मार्च 1934 को रोपड़ जिले, पंजाब, ब्रिटिश भारत में एक रैदासी सिख परिवार में हुआ था। यह एक ऐसा समाज है, जिन्होंने अपना धर्म छोड़ कर सिख धर्म अपनाया था। कांशीराम के पिता अल्प शिक्षित थे, लेकिन उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा देंगे। कांशीराम अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़े और सबसे अधिक शिक्षित भी थे। उन्होंने सन 1956 में सरकारी कॉलेज रोपड़ से BSC की डिग्री हासिल की। स्नातक होने के बाद वे ‘पूना’ में रक्षा उत्पादन विभाग में सहायक वैज्ञानिक के पद पर नियुक्त हुए।

कार्यकाल

कांशीराम ने सन 1965 में ‘डॉ भीमराव अम्बेडकर’ के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश रद्द करने के विरोध में संघर्ष किया। इस घटना के बाद उन्होंने पीड़ित समाज के लिए संघर्ष करने का मन बना लिया। उन्होंने संपूर्ण जातिवादी प्रथा और डॉ बी. आर अम्बेडकर के कार्यों का तीव्र अध्ययन किया और दलितों के उद्धार के लिए बहुत प्रयास किए। उन्होंने सन 1971 में अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने साथियों के साथ मिलकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों के लिए कर्मचारी कल्याण संस्था की स्थापना की।

यह संस्था पूना परोपकार अधिकारी कार्यालय में पंजीकृत की गई थी। हालांकि इस संस्था का गठन पीड़ित समाज के कर्मचारियों का शोषण रोकने हेतु और असरदार समाधान के लिए किया गया था, लेकिन इस संस्था का मुख्य उद्देश था लोगों को शिक्षित और जाति प्रथा के बारे में जागृत करना। धीरे-धीरे इस संस्था से अधिक से अधिक लोग जुड़ते गए, जिससे यह काफी सफल रही।

सन 1973 में कांशीराम ने अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर BAMCEF (Backward and Minority Communities Employees Federation) की स्थापना की, जिसका पहला क्रियाशील कार्यालय सन 1976 में दिल्ली में शुरू किया गया। इस संस्था का आदर्श वाक्य था- ‘एड्यूकेट ओर्गनाइज एंड ऐजिटेट’। इस संस्था ने अम्बेडकर के विचार और उनकी मान्यता को लोगों तक पहुंचाने का बुनियादी कार्य किया। इसके बाद कांशीराम ने अपना प्रसार तंत्र मजबूत किया और लोगों को जाति प्रथा, भारत में इसकी उपज और डॉ बी.आर. अम्बेडकर के विचारों के बारे में जागरूक किया। वे जहाँ भी गए उन्होंने अपनी बात का प्रचार किया और उन्हें बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ।

सन 1980 में कांशीराम ने ‘अम्बेडकर मेला’ नाम से पद यात्रा शुरू की, जिसमें डॉ बी. आर अम्बेडकर के जीवन और उनके विचारों को चित्रों और कहानी के माध्यम से दर्शाया गया। उन्होंने BAMCEF  के समानांतर सन 1984 में ‘दलित शोषित समाज संघर्ष समिति’ की स्थापना की। इस समिति की स्थापना उन कार्यकर्ताओं के बचाव के लिए की गई थी, जिन पर जाति प्रथा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हमले होते थे। हालाँकि यह संस्था पंजीकृत नहीं थी, लेकिन यह एक राजनीतिक संगठन था।

सन 1984 में कांशीराम ने ‘बहुजन समाज पार्टी’ के नाम से राजनीतिक दल का गठन किया। सन 1986 में उन्होंने कहा कि अब वे बहुजन समाज पार्टी के अलावा किसी और संस्था के लिए काम नहीं करेंगे, अपने आप को सामाजिक कार्यकर्ता से एक राजनेता के रूप में परिवर्तित किया। पार्टी की बैठकों और अपने भाषणों के माध्यम से कांशीराम ने कहा कि अगर सरकारें कुछ करने का वादा करती हैं, तो उसे पूरा भी करना चाहिए, अन्यथा ये स्वीकार कर लेना चाहिए कि उनमें वादे पूरे करने की क्षमता नहीं है।

राजनीति में योगदान

कांशीराम ने अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यों के द्वारा दलित जाति के व्यक्तियों को एक ऐसी बुलंद आवाज़ दी, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नही था। बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तरी राज्यों जैसे ‘मध्य प्रदेश’ और ‘बिहार’ में दलित जाति के व्यक्तियों को असरदार स्वर प्रदान किया।

मृत्यु

कांशीराम को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या थी। उन्हें सन 1994 में दिल का दौरा पड़ा। सन 2003 में उनके दिमाग की नस में खून इक्कठा होने से दिमाग का दौरा पड़ा। 72 वर्ष की आयु में 9 अक्टूबर 2006 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु नई दिल्ली में हुई। वे लगभग 2 वर्षों से बिस्तर पर थे। उनकी इच्छाओं के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बौद्ध परम्परा के अनुसार किया गया।

विरासत

कांशीराम की सबसे अहम विरासत है उनके द्वारा स्थापित किया गया राजनीतिक दल- ‘बहुजन समाज पार्टी’। उनके सम्मान में कुछ पुरस्कार भी प्रदान किये जाते हैं। इन पुरस्कारों में कांशीराम आंतर्राष्ट्रीय खेल कूद पुरस्कार, कांशीराम कला रत्न पुरस्कार और कांशीराम भाषा रत्न सम्मान शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में एक जिले का नाम कांशीराम नगर रखा गया है। इस जिले का नामकरण 15 अप्रैल 2008 को किया गया था।

जीवन घटनाचक्र

  • सन 1934 में रोरापुर, पंजाब में जन्म हुआ।
  • सन 1958 में पूना में रक्षा उत्पादन विभाग में सहायक वैज्ञानिक के पद पर नियुक्ति हुई।
  • सन 1971 में नौकरी छोड़कर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति एवं
  • अल्पसंख्यक कर्मचारी कल्याण संस्था की स्थापना की।
  • उन्होंने सन 1973 में BAMCEF की स्थापना की।
  • सन 1976 में दिल्ली में BAMCEF के पहले कार्यरत कार्यालय की स्थापना की।
  • उन्होंने सन 1981 में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति की स्थापना की।
  • उन्होंने सन 1984 में ‘बहुजन समाज पार्टी’ की स्थापना की।
  • 9 अक्टूबर 2006 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।