कलियुग कब से प्रारंभ हुआ था

श्रीकृष्ण के पृथ्वी लोक से जाने के बाद से ही कलियुग के प्रथम चरण की शुरुआत हुई थी । और विद्वानों के अनुसार कलियुग का प्रथम चरण अभी तक चल रहा है । सूर्य सिद्धांत के मुताबिक 18 फरवरी 3102 ईसा के पूर्व मध्य रात्रि 12 बजे से शुरू होगा ।‌ धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक यह वही तिथि थी जब श्रीकृष्ण बैकुंठ धाम को लौट गए थे ।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार ज्यातर व्याख्याकार जैसे भक्तिसिद्वांत सरस्वती गोस्वामी जी और उनके शिष्य भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का कहना है कि पृथ्वी वर्तमान में कलियुग ही है और यह काल 432,000 वर्षों तक रहेगी। कुछ लेखकों के अनुसार 6480 वर्षों तक कलियुग माना जाता है । हालांकि अभी तक इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

कलियुग कब से प्रारंभ हुआ था (Kaliyug kab se prarmbh hua tha)

कलियुग के गुण –

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कलियुग के दौरान मानव सभ्यता आध्यात्मिक रूप से पतित हो जाएगी  । और इसे डार्क ऐज कहते हैं । क्योंकि इस काल में मानव ईश्वर की भक्ति से दूर रहना पसंद करते हैं । हिन्दू धर्म के अनुसार कलियुग के आखिर तक नैतिकता स्वर्ण युग में एक चौथाई तक की कमी आ जाऐगी । इसको यदि सामान्य अर्थ समझे तो इसका मतलब है कि जब कलियुग अपनी चरम सीमा पर होगा तब नैतिकता का पूरी तरह से हास होगा । और कुछ लोगों में ही मानवीयता मूल्य ही शेष रह जाऐगी ।

कलियुग के शुरूआत की कहानी –

* माना जाता है कि युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के बाद ही कलिकाल का प्रारंभ हो गया था । तो उनके स्वर्ग में सशरीर चले जाने के बाद से कलियुग का आरंभ हुआ था ।

* राजा परीक्षित से जुड़ी एक कहानी । माना जाता है कि उनके मुकुट में कलियुग छुपा हुआ था । और उसने मुकुट से बाहर निकलकर राजा कुछ वार्तालाप किया, जिसका वर्णन पुराणों में भी किया गया है ।

* आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत का युद्ध 3139 ईसा पूर्व हुआ था । और महाभारत के युद्ध के 35 वर्ष के पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी देह त्याग दी थी । तभी से कलियुग का आरंभ हुआ था ।

* कलियुग के संवत् कलियुग के विषय में सबसे प्राचीन संकेत आर्यभट्ट के द्वारा ही दिया गया हैं । उनके अनुसार जब वे 23 वर्ष के थे तब कलियुग के 3600 वर्ष बीत चुके थे । अगर मध्यकाल के भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कलियुग एवं कल्प के प्रारंभ में सभी ग्रह चंद्र , सूर्य को मिलाकर ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के साथ एकत्र हुए थे ।

विद्वानों के मतानुसार कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व हुआ था । और इस अनुसार कलियुग काल 4,36,000 साल लंबा चलेगा । और अभी कलियुग का प्रथम चरण ही चल रहा है । कलियुग का आरंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था जब पांच ग्रह मंगल , बुध , शुक्र , बृहस्पति और शनि सभी मेष राशि पर 0 डिग्री पर चले गए थे । मतलब 3102 +2020=5122 वर्ष बीत चुका है और अभी 426882 वर्ष बाकी हैं ।

वर्तमान में 28वें चतुर्यगी का कलियुग बीत गया है और यह युग भी कलियुग ही चल रहा हैं । यह कलियुग का ब्रम्हा के द्वीतीय परार्ध में श्वेतवराह नाम के कल्प और वैवस्वत मनु चल रहा हैं और यह कलियुग का पहला ही चरण हैं अभी । कलियुग के पहले ही चरण में लोगों का धर्म और भक्ति के प्रति बहुत कम विश्वास होता जा रहा है और जैसे जैसे कलियुग बढता जाऐगा मनुष्य पूरी तरह से धर्म  और भक्ति को भूलते जाएंगे ऐसा माना जाता है ।

 धर्म की हानि –

* सतयुग – सतयुग के अनुसार मनुष्य की लम्बाई 32 फिट अर्थात् लगभग 21 हाथ मानी गई हैं । और सतयुग में पाप मात्र 0% होती है और पुण्य मात्र 100% होती हैं ।

* त्रेतायुग – त्रेतायुग में मनुष्य की ऊ 21 फिट मानी गई हैं अर्थात 14 हाथ बतायी गई है । त्रेतायुग में पाप मात्र 25% होती है और पुण्य मात्र 75% होती है ।

* द्वापरयुग – द्वापरयुग में मनुष्य की लम्बाई 11 फिट होती है अर्थात 7 हाथ । इस युग में पाप मात्र 50% ही और पुण्य 50% हैं ।

* कलियुग – इस युग में मनुष्य की लम्बाई 5 फिट बतायी गई है अर्थात साढ़े तीन हाथ । इस युग में धर्म सिर्फ ¼ ही रह जाता है । इसलिए इस युग में पाप की मात्रा 75% होती है और पुण्य की मात्रा 25% होती हैं । और यह कलियुग का पहला ही चरण हैं अभी ।