जज कैसे बने – 

जज या न्यायाधीश बनने का मतलब होता  है कि आप कानूनी Law करके उसके शीर्ष पर पहुंचना चाहते हो । न्यायाधीश हाइकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का सबसे अहम पद माना जाता है । तथा यदि किसी भी न्यायाधीश पद पर पदस्थ व्यक्ति ने अगर एक भी ग़लत निर्णय ले लिया तो उसकी सजा किसी निर्दोष को भी भुगतनी पड़ सकती है । इसलिए यह पद बहुत ही गरिमामय पद माना जाता है तथा इस पद की सभी इज्जत भी करते । भारत में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को सबसे ऊपर माना जाता है तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है । यदि आप न्यायाधीश या जज बनना चाहते हैं तो आपको बहुत परिश्रम करना होगा । भारत में बहुत से न्यायालय होते हैं जैसे – उच्च न्यायालय, Tribunal, fasttrack courtजिला और अधीनस्थ न्यायालय और लोक अदालत । यह 6 प्रकार के न्यायलय स्थापित है । भारत का एक शीर्ष न्यायालय भी है जो दिल्ली में स्थित है । जिसको सर्वोच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के नाम से जाना जाता है । हर राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय या हाईकोर्ट स्थापित होता है इसे निचली अदालत के नाम से भी जाना जाता है । 

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सुप्रीम कोर्ट का जज बनने हेतु क्या योग्यता होनी चाहिए – 

* आवेदक भारत का नागरिक हो । 

* सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से पहले आवेदक ने कम से कम पांच साल के लिए उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या किसी भी दो या अधिक न्यायालयों में वह लगातार पांच वर्ष तक न्यायधीश के तौर पर कार्य कर चुका हो । 

* आवेदक किसी भी न्यायालय में या न्यायलयों में लगातार दस वर्षों तक अधिवक्ता के पर पर काम कर चुका हो । 

* न्यायाधीश के लिए सेवा हेतु कोई निश्चित समयावधि नहीं होती है, 65 वर्ष की आयु होने पर भी वह व्यक्ति अपनी सेवाएं दे सकता है । 

* जज की परीक्षा तीन चरणों में सम्पन्न होती है । 

1. प्रारंभिक परीक्षा, 2. मुख्य परीक्षा, 3. साक्षात्कार । 

सुप्रीम कोर्ट के जज हेतु चयन प्रक्रिया – 

भारत में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है यह प्रक्रिया भारत के संविधान के अधिनियम की संख्या 124 के दूसरे सेक्शन‌ के अन्तर्गत आती है । सुप्रीम कोर्ट के जज का पद भारतीय गणतंत्र का सबसे ऊंचा न्यायिक पद होता है। और संविधान के मुताबिक 30 न्यायधीश तथा 1 मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का प्रावधान होता है । 

सुप्रीम कोर्ट के जज का कार्यकाल और वेतन –

संविधान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जज के कार्यकाल का कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है पर इस संबंध में तीन प्रावधान दिए गए हैं – 

* सुप्रीम कोर्ट के जज 65 की आयु तक भी अपना पद संभालते हैं । 

* सुप्रीम कोर्ट के जज राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी अपना इस्तीफा दे सकते हैं । 

* सुप्रीम कोर्ट के जज को संसद की सिफारिश पर राष्ट्रपति के द्वारा जज के पद से हटाया जा सकता है । 

* सुप्रीम कोर्ट के जज का वेतन‌ 2.80 लाख है तथा सर्वोच्च न्यायालय के अन्य जज का वेतन 2.50 लाख रूपए होता है । 

हाईकोर्ट के जज हेतु योग्यता – 

* वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो । 

* वह व्यक्ति कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर काम कर चुका हो । 

* वह व्यक्ति किसी भी उच्च न्यायालय में या एक से अधिक उच्च न्यायालयों में अधिवक्ता के रूप में काम कर चुका हो । 

* उच्च न्यायालय के जज की कोई न्यूनतम आयु निश्चित नहीं की गई हैं । 

हाईकोर्ट के जज हेतु नियुक्ति प्रक्रिया – 

* उच्च न्यायालय के जज के अतिरिक्त अन्य जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल से सम्बंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद ही प्रस्ताव पहले राज्यपाल के पास जाता है । उसके बाद राज्यपाल उस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजता है । इसके बाद मुख्यमंत्री उस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री को भेजता है और प्रधानमंत्री उस प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजता है और आखिर में सबकी सहमति के बाद राष्ट्रपति हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति करता है । 

* 1999 में उच्च न्यायालय के 9 सदस्यीय संविधान पीठ में यह निर्धारित किया गया है कि उच्च न्यायालयो के न्यायाधीशों की नियुक्ति में उच्च न्यायालय के केवल 2 वरिष्ठ न्यायाधीशों की सलाह लेना आवश्यक है । 

कार्यकाल और वेतन – 

* उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 साल की उम्र तक अपने पद पर काम कर सकता है । 

* उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 90,000 रूपए होता है ।

* और अन्य न्यायधीशों का वेतन 80,000 रूपए होता है ।