जयललिता की जीवनी | Jayalalithaa Biography in Hindi

98

परिचय

जयललिता भारतीय राजनीति में आने से पहले एक अभिनेत्री थीं, उन्होंने तमिल फिल्मों के अलावा तेलुगू, कन्नड, हिंदी तथा अँग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी कार्य किया। वे सन 1991 से 1996, 2001 में, 2002 से 2006 तक और 2001 से 2014 तक तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री रहीं तथा दक्षिण भारतीय राजनीतिक दल ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (AIADMK) की महासचिव भी रहीं।

जब जयललिता स्कूल में पढ़ रही थीं, तब उन्होंने ‘एपिसल’ नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया और 15 वर्ष की आयु में कन्नड फिल्मों में मुख्‍य अभिनेत्री के तौर पर भूमिकाएं निभाने लगी थीं। इसके बाद तमिल फिल्मों में काम करने लगीं और सन 1965 से 1972 के दौरान ज्यादातर फिल्मों में ‘एम.जी. रामचंद्रन’ (मारुदुर गोपालन रामचंद्रन) के साथ काम किया।

फिल्मी करियर के बाद जयललिता ने सन 1982 में एम.जी रामचंद्रन के साथ राजनीति में शुरुआत की। उन्होंने सन 1984 से 1989 तक तमिलनाडु राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। सन 1987 में एम.जी. रामचन्द्रन की मृत्यु हो जाने के बाद जयललिता ने खुद को एम.जी. रामचंद्रन का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

जयललिता 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक तमिलनाडु राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया, तो वे 3 बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री पद पर रहीं।

शुरूआती जीवन

जयललिता का जन्म मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) के मांडया जिले के पांडवपुरा तालुका के मेलुरकोट गांव में 24 फ़रवरी 1948 को एक ‘अय्यर ब्राम्हण’ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘जयराम’ तथा उनकी माता का नाम ‘संध्या’ था। उनके दादा तत्कालीन मैसूर राज्य में एक सर्जन थे। जब जयललिता मात्र 2 वर्ष की थी, तब उनके पिता चल बसे थे। पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता उन्हें लेकर ‘बंगलौर’ चली गई, वहाँ जयललिता के नाना-नानी रहते थे। उनकी शुरूआती पढ़ाई बंगलौर के ‘बिशप कॉटन गर्ल्स’ स्कूल से हुई। उनकी माता फिल्मों में किस्मत आजमाने चेन्नई चली गयीं। चेन्नई आने के बाद उन्होंने ‘चर्च पार्क प्रेजेंटेशन कान्वेंट’ और ‘स्टेला मारिस’ कॉलेज के शिक्षा प्राप्त की। जयललिता शुरू से ही तीव्र बुद्धि की थी।

फिल्मी जीवन

परिवार की आर्थिक मुसीबत की वजह से उनकी माता ने उन्हें फिल्मों में कार्य करने को कहा। स्कूली पढ़ाई के समय ही जयललिता ने सन 1961 में ‘एपिसल’ नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में कार्य किया। जयललिता ने मात्र 15 साल की उम्र में अपना नाम प्रसिद्ध अभिनेत्री के तौर पर प्रमाणित कर लिया। कन्नड भाषा में उनकी पहली फिल्म ‘चिन्नाडा गोम्बे’ है, जो सन 1964 में प्रदर्शित हुई। उसके बाद उन्होंने तमिल फिल्मों की ओर रुख किया। वे पहली ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने स्कर्ट पहनकर भूमिका निभाई थी।

तमिल सिनेमा में जयललिता ने जाने-माने निर्देशक ‘श्रीधर’ की फिल्म ‘वेत्रीरादई’ से अपना करियर शुरू किया और करीब 300 फिल्मों में काम किया। उन्होंने तमिल फिल्मों के अलावा तेलुगु, कन्नड़, अँग्रेजी और हिन्दी फिल्मों में भी कार्य किया है। जयललिता ने ‘धर्मेंद्र’ सहित कई अभिनेताओं के साथ कार्य किया, लेकिन उनकी अधिकतर फिल्में ‘शिवाजी गणेशन’ और ‘एम.जी. रामचन्द्रन’ के साथ ही आईं।

राजनीतिक करियर

जयललिता ने 1982 में ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (AIADMK) की सदस्यता ग्रहण करते हुए एम. जी. रामचंद्रन के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। सन 1983 में उन्हें पार्टी का प्रोपेगेंडा सचिव चुना गया। बाद में अंग्रेजी में उनकी बोलने की योग्यता को देखते हुए पार्टी प्रमुख एम. जी. रामचंद्रन ने उन्हें राज्यसभा में प्रवेश कराया और राज्य विधानसभा के उपचुनाव में जीतकर उन्हें विधानसभा सदस्य बनवाया। सन 1984 से 1989 तक वे तमिलनाडु से राज्यसभा की सदस्य रहीं।

बाद में, पार्टी के कुछ नेताओं ने जयललिता के और एम. जी. रामचंद्रन के बीच दरार पैदा कर दी। उस समय वे एक तमिल पत्रिका में अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में कॉलम लिखती थीं, पर एम. जी. रामचंद्रन ने दूसरे नेताओं के कहने पर उन्हें ऐसा करने से रोका। सन 1984 में जब मस्तिष्क के स्ट्रोक के चलते एम. जी. रामचंद्रन अक्षम हो गए, तब जयललिता ने मुख्यमंत्री की गद्दी संभालनी चाही, लेकिन एम. जी. रामचंद्रन ने उन्हें पार्टी के उप नेता पद से भी हटा दिया।

सन 1987 में एम.जी रामचंद्रन का निधन हो गया और इसके बाद अन्ना द्रमुक दो धड़ों में बंट गई। एक धड़े की नेता एम.जी रामचंद्रन की विधवा ‘जानकी रामचन्द्रन’ थीं और दूसरे की जयललिता, लेकिन जयललिता ने खुद को एम. जी. रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

सन 1989 में उनकी पार्टी ने राज्य विधानसभा में 27 सीटें जीतीं और जयललिता तामिलनाडु की पहली निर्वाचित नेता प्रतिपक्ष बनीं। सन 1991 में ‘राजीव गांधी’ की हत्या के बाद राज्य में हुए चुनावों में उनकी पार्टी ने कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ा और सरकार बनाई। वे 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं।

सन 1992 में जयललिता की सरकार ने बालिकाओं की रक्षा के लिए ‘क्रैडल बेबी स्कीम’ शुरू की, ताकि अनाथ और बेसहारा बच्चियों को खुशहाल जीवन मिल सके। इसी वर्ष राज्य में ऐसे पुलिस थाने खोले गए, जहां केवल महिलाएं ही तैनात होती थीं।

सन 1996 में जयललिता की पार्टी चुनावों में हार गई और वे खुद भी चुनाव हार गईं। इस हार के बाद सरकार विरोधी जनभावना और उनके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुये। पहली बार मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगे। उन्होंने शादी नही की, किन्तु गोद लिए हुए पुत्र ‘वी. एन. सुधाकरण’ की शादी में पानी की तरह पैसा बहाया।

भ्रष्टाचार के मामलों और कोर्ट से सजा होने के बावजूद जयललिता अपनी पार्टी को चुनावों में जिताने में सफल रहीं। हालांकि गंभीर आरोपों के कारण उन्हें काफी कठिन दौर से गुजरना पड़ा। सन 2001 में वे फिर एक बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में सफल हुईं, उन्होंने गैर चुने हुए मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी संभाल ली।

जयललिता ने दोबारा सत्ता में आने के बाद लॉटरी टिकट पर रोक लगा दी। हड़ताल पर जाने की वजह से 2 लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया, किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी, 5 हजार रुपये से अधिक कमाने वालों के राशन कार्ड रद्द कर दिए, बस का किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी।

इसी बीच भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया और उन्हें अपनी कुर्सी अपने विश्वस्त मंत्री ‘ओ. पन्नीरसेल्वम’ को सौंपनी पड़ी। जब उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से कुछ आरोपों से राहत मिल गई, तो वे मार्च 2002 में फिर से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गईं। हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद उन्होंने पशुबलि की अनुमति दे दी और किसानों की मुफ्त में बिजली भी दे दी गई।

अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत प्राप्त किया तो जयललिता 3 बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और मृत्यु पर्यन्त तक अर्थात 5 दिसम्बर 2016 तक मुख्यमंत्री रहीं।

सम्मान

जयललिता को सर्वप्रथम मद्रास विश्वविद्यालय से सन 1991 में डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली और उसके बाद उन्हें कई बार मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया। सन 1997 में उनके जीवन पर बनी एक तमिल फिल्म ‘इरूवर’ आई थी, जिसमें जयललिता की भूमिका ‘ऐश्वर्या राय’ ने निभाई थी।

मृत्यु

जयललिता को दिल का दौरा पड़ने की वजह से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में ICU (Intensive Care Unit) में भर्ती किया गया। 5 दिसम्बर 2016 को चेन्नई अपोलो अस्पताल ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि रात 11 बजकर 30 मिनट पर उनकी मृत्यु हो गई।