परिचय

जैसलमेर का किला राजस्थान के प्रसिद्ध किलों में से एक है। इस किले को जैसलमेर की शान कहा जाता है। यह किला शहर के मध्य में स्थित है। इसे “सोनार किला” या “स्वर्ण किले” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह किला पीले बलुआ पत्थर का बना हुआ है, जो सूर्यास्त के समय सोने की तरह चमकता है। इस किले का निर्माण सन. 1156 में राजपूत शासक रावल जैसल ने करवाया था, इसलिए इस किले का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया। सन. 2013 में कोलंबिया के फ्नोम पेन्ह में हुई 37वीं वर्ल्ड हेरिटेज समिति में राजस्थान के 5 किलों के साथ जैसलमेर किले को भी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल किया गया। जैसलमेर किले के अन्दर कई खूबसुरत हवेलियाँ (मकान), मंदिर, सैनिकों और व्यापारियों के आवासीय परिसर हैं।

जैसलमेर किला | Jaisalmer Qila | Jaisalmer Fort in Hindi

जैसलमेर का किला थार मरुस्थल के त्रिकुटा पर्वत पर बना हुआ है। यहाँ काफी ऐतिहासिक लड़ाईयां भी हुई हैं। यह किला एक 30 फुट ऊँची दीवार से घिरा हुआ है। जैसलमेर का किला 1500 फुट लम्बा और 750 फुट चौड़ा है, जो एक 250 फुट ऊँचे पर्वत पर बना हुआ है। किले के तहखाने की लम्बाई 15 फीट है। किले में प्रवेश करने के लिए चार द्वार हैं, जिनमें से एक द्वार पर तोप लगी हुई है। जैसलमेर शहर में पीले पत्थर से बनी हुई कई विशाल और सुन्दर हवेलियाँ हैं। किले में एक शानदार जल निकासी की व्यवस्था है, जिसे घुट नाली नाम दिया गया, क्योंकि यह बरसात के पानी को आसानी से चारों दिशाओं में किले से दूर ले जाता है। यहाँ सम्पूर्ण प्रदेश में जल का कोई स्थाई स्रोत नहीं है। वर्षा होने पर कई स्थानों पर वर्षा का मीठा जल एकत्र हो जाता है। यहाँ के अधिकांश कुंओं का जल खारा है तथा वर्षा का एकत्र किया हुआ जल ही एकमात्र पानी का साधन है।

मौसम

जैसलमेर राज्य का सम्पूर्ण भाग रेतीला व पथरीला होने के कारण यहाँ का तापमान मई-जून में अधिकतम 47 सेंटीग्रेड तथा दिसम्बर-जनवरी में न्यूनतम 05सेंटीग्रेड रहता है। जनवरी-मार्च तक यहाँ पर ठण्ड पड़ती है और तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अप्रैल-जून तक यह खूब तपता है और औसतन तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस मौसम में जब मध्याह्न में सूर्य सिर पर होता है, तो उसकी किरणें थार के रेगिस्तान पर पड़ती है और सुनहरी रेत को देखकर ऐसा लगता है कि मानो चहुंओर सोने के कण बिखरे पड़े हों। ऐसे मनमोहक दृश्य का आनन्द लेने के लिए पर्यटक भीषण गर्मी की भी परवाह नहीं करते और यहाँ पर सैर–सपाटा करते फिरते हैं। अक्टूबर से दिसंबर तक मानसून और ठण्ड के मौसम के बीच में आप यहाँ ठण्ड और बारिश दोनों तरह के मौसम का आनन्द ले सकते हैं।

जैसलमेर किले का इतिहास

जैसलमेर किले का निर्माण सन. 1156 में राजा रावल जैसल ने करवाया था। इस किले की तीन स्तरीय दीवारों से मजबूत किलेबंदी की गयी थी। इस किले में 99 गढ़ हैं, जिनमें से 92 गढ़ों का निर्माण सन. 1633 से सन. 1647 के मध्य हुआ था। इस किले पर 13वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया और 9 वर्षों तक इस किले पर शासन किया। किले पर खिलजी का शासन होने के कारण राजपूत महिलाओं ने अपने आत्मसम्मान के लिए आत्महत्या की थी। सन. 1541 में मुग़ल सम्राट हुमायूँ ने इस किले पर दूसरा हमला किया था। इसके बाद मुगलों के साथ सम्बन्ध बेहतर करने के लिए रावल ने सन. 1570 में अकबर के साथ अपनी बेटी की शादी कर दी। किले पर सन. 1762 तक मुगलों का शासन रहा। इसके पश्चात् महारावल मूलराज ने किले पर नियंत्रण कर लिया। 12 दिसंबर सन. 1818 को मूलराज और अंग्रेजों के बीच संधि हो गई। सन. 1820 में मूलराज की मृत्यु के बाद पोते गज सिंह ने किले पर शासन किया।

ब्रिटिश नियम के आते ही बम्बई बंदरगाह पर समुद्री व्यापार की शुरुआत हुई। इससे बम्बई का विकास तो हुआ, लेकिन जैसलमेर की आर्थिक स्थिति नाजुक होती गयी। स्वतंत्रता और भारत के विभाजन के पश्चात् प्राचीन व्यापार यंत्रणा पूरी तरह से बंद हो चुकी थी। सन. 1965 और सन. 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय जैसलमेर के किले ने अपनी महानता को प्रमाणित किया था।