जैसलमेर का किला

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जैसलमेर का किला भारत देश में राजस्थान के शहर जैसलमेर की पहाड़ी पर स्थित है। यह किला दुनिया के सबसे बड़े संरक्षित गढ़वाले किलों में से एक है। इस किले का निर्माण सन. 1156 या सन. 1178 (समकालीन साक्ष्यों के अध्ययन के अनुसार) में राजपूत शाशक रावल जैसल द्वारा आरम्भ किया गया (यह किला पूर्ण रूप से कब तैयार हुआ इसका कोई तथ्य नहीं मिलता है)। इसके निर्माण कार्य में कहीं भी चूने और गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया, केवल पत्थर के उप्पर पत्थर को फंसाकार या खांचा बनाकर रखा गया है। इस किले के अन्दर 600 से भी अधिक मूर्तियों के साथ बहुत से पुराने ग्रंथ भी उपलब्ध हैं। जैसलमेर के किले को सन. 2013 में यूनेस्को ने राजस्थान के पाँच अन्य किलों सहित पहाड़ियों पे स्थित किलों की श्रेणी में रखते हुए, इनको विश्व धरोहर घोषित किया था।

इतिहास

सन. 1175 में रावल जैसल ने मोहम्मद गोरी के राजस्थान में निचले सिंध व उसके समीप स्थित लोद्रवा नामक शहर को पराजित करके अपने आधीन कर लिया। उसके उपरांत राजा जैसल ने शीघ्र ही उचित स्थान देखकर सन. 1178 के करीब राजस्थान में त्रिकूट नामक पहाड़ी पर अपनी राजधानी को स्थापित करने हेतु एक विशाल किले का निर्माण करवाया। यह राजधानी आगे चलकर राजा जैसल के नाम से उत्पन्न ‘जैसलमेर’ कहलाई। इस राजधानी के स्थापित होने के कई वर्षों के पश्चात इस जगह पर अपना कब्जा करने के लिए कई देश-विदेश के राजाओं ने आक्रमण किए। इन आक्रमणों के चलते यहाँ की महिलायों ने अपने सतीत्व की रक्षा करने हेतु जौहर (भारत में राजपूत स्त्रियों के द्वारा की जाने वाली क्रिया, युद्ध में हार निश्चित हो जाने पर राजपूत महिलाएं जौहर कुंड में आग लगाकर उसमें कूद जाती थी) किया।

निर्माण कार्य

स्थानीय स्रोतों के अनुसार राजा जैसल ने इस किले का निर्माण सन. 1156 में प्रारंभ करवाया, जबकि समकालीन साक्ष्यों से पता चलता है कि जैसल ने इसका निर्माण सन. 1178 में करवाया था। किले के निर्माण कार्य को प्रारंभ होने के पाँच वर्ष के पश्चात राजा जैसल की मृत्यु हो गई, जिससे किले का कार्य पूर्ण नहीं हो सका। उसके उपरांत जैसल के उत्तराधिकारी शालीवाहन के द्वारा इस किले के निर्माण को पुन: जारी किया गया (इस कार्य को जैसल व उसके उत्तराधिकारी के द्वारा निर्माण करवाने के कार्य का कोई अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिलता है, केवल ख्यातों व तवारीखों के द्वारा इसका वर्णन प्राप्त है)। किले के निर्माण के लिए चुने और गारे इस्तमाल कहीं भी नहीं किया गया है, केवल बड़े पत्थरों को पत्थरों के उप्पर फँसाकर व खाँचा बनाकर रखा गया है। 12 से 16 शताब्दी के दौरान इस किले के अन्दर सात जैन मंदिरों का निर्माण भी करवाया गया था। इसके अन्दर एक बहुत ही सरल जल निकासी की व्यवस्था को बनाया गया है, जिसको ‘घुट नाली’ के नाम से जाना जाता है। इस घुट नाली से किले के अन्दर जमा बारिश का पानी चारों दिशाओं से बाहर निकाल जाता है।

पर्यटन

जैसलमेर का किला पूरे राजस्थान में सर्वाधिक देखे जाने वाले किलों में से एक है। प्रतिवर्ष इस किले को देखने देश-विदेश से पाँच से छह हजार लोग यहाँ आते हैं। इस किले को देखने वाले लोगों की गिनती हर साल बढ़ रही है। यह किला जैसलमेर का सबसे बड़ा और खुबसूरत स्थान है।

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