जादुई गधा

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शहंशाह अकबर और महारानी साहिबा अपने महल में बैठे हुये थे। शहंशाह अकबर ने महारानी के लिये एक अच्छा सा हार बनवाया। महारानी ने हार को देखा और बोली…..!

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – ओह…. कितना खूबसूरत हार है ये ? शुक्रिया जहाँपनाह……! कितना बेशकिमती होगा ये, मैं बहुत खुशनसीब हूँ मैं…..!

शहंशाह अकबर बोले महारानी से – हमें खुशी है कि आपको पसंद आया। हमने इसे ख़ास आपके लिये सबसे बेहतरीन कारीगरों से बनवाया है।

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – ओह…. मुझे तो इससे प्यार हो गया है। मैं इसे जिंदगीभर नहीं भूलूंगी।

शहंशाह अकबर बोले महारानी से – हम जब भी इसे आप पर देखेंगे, तो हमें आपका प्यार नजर आयेगा।

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – हम इसे कभी अपनी नजरों से दूर नहीं होने देंगे।

अगले दिन महारानी साहिबा ने अपने हार को पहनने के लिए निकालने गईं, तो देखा……!

महारानी साहिबा बोली – ओह….. कहां गया ? कल रात सोने से पहले मैंने इसे यही रखा था। तो फिर गया कहां? कोई है……!

दासी बोली महारानी साहिबा से – क्या हुकुम है रानी साहिबा ?

महारानी साहिबा बोली दासी से – हमें लगता है, हमारा हार कहीं खो गया है। उसे ढूंढने में हमारी मदद करो।

दासी बोली महारानी साहिबा से – आप परेशान न हो रानी साहिबा, मुझे यकीन है आपका हार जरुर मिल जायेगा। आप आज कोई दूसरा हार पहन लीजिये। आपके पास तो कई हैं…..!

महारानी साहिबा बोली दासी से – नहीं….. नहीं….! हम कोई और हार नहीं पहन सकते। वो बेश कीमती हार हमें जहाँपनाह ने दिया था। वो उन्हें बहुत प्यारा है, हम उन्हें मायूस नहीं कर सकते। हमें उसे ढूँढना ही होगा। अब हम क्या करें ?

शहंशाह अकबर शाम के वक्त घर आये और महारानी साहिबा रो रही थीं।

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – ज… ज.. जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले महारानी साहिबा से – क्या बात है महारानी…? आप इतनी परेशान क्यों हो ?

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – हम बेहद शर्मिंदा हैं, आप मायूस होंगे। हम आपके तोहफे की हिजाफत नहीं कर पाये। हार कहीं खो गया है।

शहंशाह अकबर बोले महारानी साहिबा से – हार कहीं खो गया है…..! क्या मतलब खो गया है ? क्या आपने ठीक से देखा ? आपने इसे कहीं बाहर तो नहीं गिरा दिया।

महारानी साहिबा बोली शहंशाह अकबर से – रात में हमने यही उतारा था और उसके बाद हम बाहर भी नहीं गये। तो इसे यहीं होना चाहिए, लेकिन हार अब यहाँ नहीं है। हमें बहुत शर्मिंदगी मह्सूस हो रही है।

शहंशाह अकबर बोले महारानी साहिबा से – एक मामूली से हार के खो जाने पर ये दिल छोटा न करें महारानी….! हम आपको दूसरा ला देंगे। पर हम ये वादा करते हैं कि इसे भी ढूढ़ लेंगे। आप आज रात हमारे कमरे में आराम करें। कल सुबह तक आपको हार मिल जायेगा।

शहंशाह अकबर सिपाही को आवाज देने लगे…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जी… जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – दूसरे सिपाहियों को लेकर जाओ…..! और महारानी की दासी से कहो कि हार को ढूंढने के लिये कमरे का कोना-कोना तलाश करें। हमें वो हार हर हाल में चाहिए।

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जैसी आपकी मर्जी जहाँपनाह…….!

सिपाही महारानी के कमरे की तलाशी लेकर आया और बोला शहंशाह अकबर से…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – ज… ज… जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – कहो, कहाँ है हार ? लाओ उसे हमें दो…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – गुस्ताखी माफ़ हो हुजूर…..! हमने सारे कमरे की तलाशी ली, पर हमें वो हार नहीं मिला।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – क्या मतलब हार नहीं मिला ? महारानी… ने कल रात वो हार वहीं रखा था। तो फिर कहाँ गया ?

सिपाई बोला शहंशाह अकबर से – ज… ज… जहाँपनाह…….! लगता है हार चोरी हो गया है।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – चोरी…..! किसकी हिम्मत है, महारानी का हार चुराने की ?

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरियां हो चुकी हैं। महल के पहरेदारों ने छानबीन की, पर आज तक कामयाब नहीं हुये।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – महल में चोरियां…..! छानबीन, इसके बारे में हमें क्यों नहीं ख़बर दी गई ? हम आज रात ही इसका पता लगायेंगे। हम महारानी को सुबह मायूस नहीं देखना चाहते। फ़ौरन बीरबल को बुलाया जाये। अब सिर्फ वही इस मामले को सुलझा सकते हैं।

शहंशाह अकबर के सिपाही बीरबल को महारानी के महल में बुलाया और बीरबल बोले…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – आदाब जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! आपको आज रात एक खास मामला सुलझाना है। आपको महारानी का हार तलाश करना होगा।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! महारानी का हार…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ…..! हुआ यूं कि…..!

बीरबल को शहंशाह अकबर ने हार चोरी होने की सारी बात बताई और बीरबल बोले…..! 

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – हूँ…. अच्छा ये मामला है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! मेरे मित्र आपको इसे आज रात ही सुलझाना है।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! एक बात तो तय है कि हार चोरी ही हुआ है। वर्ना इतनी बार कमरे में ढूंढ़ने पर जरुर मिल जाता। और जो रात में कमरे के पास मौजूद सिपाही या फिर दासियों में से होगा। जहाँपनाह कल रात वहां तैनात सिपाहियों और दासियों को महारानी के कमरे में बुलवायें। मैं कुछ देर में हाजिर होता हूँ। मैं अपने एक मित्र को लाने जा रहा हूँ, जो चोर की पकड़ने में हमारी मदद करेगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – महारानी के कमरे में क्यों ? और कौन-सा मित्र ? तुम क्यों जाना चाहते हो ? हम किसी के हाथों पैगाम भेज देते हैं।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! आपके सारे सवालों का जबाब मिल जायेगा। मुझे खुद ही जाना पड़ेगा, मेरे मित्र को लाने, क्योंकि उसके पास जादुई शक्तियाँ हैं। जो चोर को ढूंढने में हमारी मदद करेंगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो हम भी आपके मित्र से मिलने को बेताब हैं बीरबल…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – मैं अभी हाजिर हूँ। जहाँपनाह…….!

महारानी के महल में दासियों और सिपाहियों को एकत्रित किया। राजा बीरबल अपने जादुई गधे को आपने साथ लेकर आये और शहंशाह अकबर बोले……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…. ये क्या तमाशा है ? हमने सोचा था कि आप अपने दोस्त को लायेंगे। फिर आप इस गधे को क्यों लाये यहाँ ?

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! यही मेरा मित्र है और ये जादुई ताकतों का मालिक है। ये चोर को पकड़ने में हमारी मदद करेगा। मुझे कुछ समय दीजिये…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है, पर जरा जल्दी करें।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जैसी आपकी मर्जी हुजूर….!

बीरबल ने जादुई गधे को एक कमरे में खड़ा कर दिया और बीरबल बोले…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से –  जहाँपनाह…….! जैसा कि मैंने कहा कि मेरा मित्र जादुई शक्तियाँ के जरिये चोर का पता लगायेगा। इसीलिये मैं चाहता हूँ कि सभी लोग बारी-बारी से अंदर जायें। और मेरे मित्र की पूंछ पकड़कर कहे कि मैंने हार नहीं चुराया है। और वापस आ जायें, जैसे ही सभी ऐसा कर लेंगे। मैं अंदर जाकर अपने मित्र से पूछुंगा और वो मुझे बतायेगा कि चोर कौन है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! हम ये जानने को बैचेन हैं, पर हमें ताजुब है कि आप अपने मित्र से कैसे बात करेंगे। अगर आपका दोस्त सचमुच चोर का पता बता सकता है, तो समय बर्बाद मत कीजिये। जल्दी कीजिये….!

बीरबल बोला सिपाही से – जाईये, पर याद रहे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिये तुम्हें गधे कि पूंछ पकड़कर कहना है मैंने हार नहीं चुराया है।

सारे सिपाही और दासियाँ ने एकएक करके गधे के कमरे में जाकर पूछ पकड़कर बोला कि मैंने हार नहीं चुराया है। उसके बाद बीरबल बोले…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! माफ़ करें। अब मुझे मेरे मित्र से बात करनी पड़ेगी।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – जरुर….!

बीरबल गधे वाले कमरे में गया अपने जादुई गधे से बात करने के बाद बोला…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे इन सब के हाथ जांचने होंगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – जरुर जल्दी करें….!

बीरबल ने सिपाहियो और दासियों इन सबके हाथ देखे और बोले…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से एक सिपाही की तरफ हाथ करके – जहाँपनाह…….! ये रहा आपका चोर…!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – क्या वो यही है ? बीरबल ये आप कैसे कह सकते हैं ? इस पर तो कोई निशान भी नहीं है।

चोर बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! मैंने आपकी वर्षों सेवा की है। मैं कोई चोर नहीं हूँ। इस गधे की गवाही कुछ साबित नहीं करती और फिर बीरबल गधे की जुबान कैसे समझ सकते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ.. बीरबल……! आप ये कैसे कह सकते हैं ?

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से –  जहाँपनाह……! मैंने गधे की पूंछ में खास इत्र लगा दिया था। इसी वजह से मैंने सभी से गधे की पूंछ पकडने को कहा। क्योंकि मैं जनता था चोर पकडे जाने के डर से गधे की पूंछ से हाथ नहीं लगायेगा और बिलकुल वैसा ही हुआ। मैंने सभी के हाथों की जांच की सभी के हाथों वही खुशबू आ रही है। सिर्फ इस चोर को छोडकर, क्योंकि राज खुल जाने के डर से इसने गधे की पूंछ पकड़ी ही नहीं। जहाँपनाह…. गधा मेरे धोबी का है और उसमें कोई जादुई शक्ति नहीं है।

शहंशाह अकबर बोले चोर से – तुम एहसान फरामोश हो। महल में चोरी करने कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? हमारे भरोसे को तुमने खाक में मिला दिया है।

चोर शहंशाह अकबर के सामने घुटनें पर गिरकर हाथ जोडकर रोने लगा और बोला….!

चोर बोला शहंशाह अकबर से – मुझे माफ़ कर दें। जहाँपनाह……! मैं लालच में अन्धा हो गया था। मुझ पर रहम करें…..! मैं चोरी की सारी चीजें वापस कर दुंगा। मुझे सिर्फ एक मौका और दे दें जहाँपनाह…..!

शहंशाह अकबर बोले चोर से – अब तुम भरोसे के काबिल नहीं हो। तुम्हें हरगिज माफ़ी नहीं मिलेगी।

शहंशाह अकबर बोले सिपहियों से – सिपहियों, इससे चोरी की सारी चीजें बरामद कर इसे काल कोठरी में डाल दो।

शहंशाह अकबर बोले अन्य सिपहियों और दासियों से – आप सबको जो परेशानी हुई, उसका हमको अफ़सोस है। जाइये….! आप सब अपना-अपना काम करिये।

दो सिपाही उस चोर को काल कोठरी में बंद करने के लिये खींचकर ले गए और शहंशाह अकबर बोले बीरबल से……….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! एक बार फिर तुम्हारी होशियारी ने चोर को पकड़ने में मदद की और महारानी का बेश कीमती हार हमें वापस मिल गया। यकीनन तुम्हारे जादुई दोस्त की मदद से……!

शहंशाह अकबर हँसने लगे और बोले शुक्रिया बीरबल शुक्रिया…..!

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – शुक्रिया… जहाँपनाह शुक्रिया…..!