नीलकंठ | Neelkanth | Indian Roller in Hindi

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नीलकंठ का वैज्ञानिक नाम कोरेशियस बेन्गालेन्सिस (Coracias Benghalensis) है और इसको अंग्रेजी में इंडियन रोलर (Indian roller) कहते हैं। नीलकंठ भारत में पाया जाने वाला पक्षी है। यह भारतीय राज्यों के कर्नाटक, बिहार, ओडिशा और आंध्रप्रदेश का राज्य पक्षी है। नीलकंठ के गले और गर्दन का रंग हल्का भूरा होता है, सर, पूंछ और उदर का रंग नीला होता है और आँखों के आस-पास का रंग गेरू होता है। यह अक्सर खेतों, बिजली के तारों और प्राकृतिक जगहों पर बैठे हुए दिख जाते हैं। नीलकंठ खेतों में उड़ने और रेंगने वाले कीड़ों को अपना आहार बनाते हैं, इसी कारण नीलकंठ को भारतीय किसानों को सच्चा मित्र भी कहा जाता है।

महत्त्व

नीलकंठ पक्षी का भारत में बड़ा महत्त्व है, इसको भारत में लोग धार्मिक दृष्टि से देखते हैं क्योंकि इसको भगवान शिव का प्रतिनिधि कहा जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव नीलकंठ के रूप में धरती पर ब्रह्मण करते हैं। भारत में यह प्रचलित है कि विजयदशमी पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन करना मतलब भगवान शिव के दर्शन कर लेना होता है। जिसको विजयदशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन होते हैं, तो उसके घर सुख-संपत्ति की वर्षा होती है।

लुप्तप्राय प्रजाति

बढ़ती आबादी और विकास के कारण मनुष्यों ने जंगलों और खेतों की भूमि को काफी समेट दिया है। विकास करने की दौड़ में मनुष्यों ने प्रकृति को कितना बर्बाद कर दिया, जिसका प्रभाव आज के समय में साफ-साफ देखने को मिल रहा है। प्रकृति में आए असंतुलन का सबसे अधिक प्रभाव पक्षियों पर पड़ा है। बहुत सी ऐसी प्रजातियाँ हैं जो लुप्त हो चुकी हैं और बहुत सी लुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकीं हैं, जिनमें नीलकंठ पक्षी भी शामिल हैं। वैसे तो पहले यह पक्षी कभी-कभी दिख जाया करते थे, परन्तु अब विजयदशमी पे इसके दर्शन करना तो दूर आम दिनों में भी इसको देख पाना लगभग ना के बराबर हो गया है। जिस पक्षी को कृषक ने अपना मित्र बताया, आज वही कृषक अपनी फसलों की उपज को पाने के लिए बहुत अधिक किटनाशक का प्रयोग कर रहे हैं। जिसके फलस्वरूप नीलकंठ पक्षीयों की मृत्यु हो रही है।