इंडिया गेट

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इंडिया गेट स्वतंत्र भारत देश का रास्ट्रीय स्मारक है, जो नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित 42 मीटर ऊँचा एक विशाल द्वार है। इसे अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के नाम से भी जाना जाता है। पूर्व समय में यह स्मारक किंग्सवे (राजाओं का रास्ता जो वर्तमान के इंडिया गेट से होते हुए निकलता है) के नाम से जाना जाता था। इंडिया गेट का मुख्य रूप से निर्माण 82,000 भारतीय सैनिकों की याद में सन. 1921 में अंग्रेजी शाशक द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में बहुत वीरता से युद्ध किया और शहीद हुए। इंडिया गेट पे यूनाइटेड किंगडम के कुछ सैनिकों और अधिकारीयों के नामों के साथ 13,300 सैनिकों के नाम अंकित किए गए हैं। इंडिया गेट से होते हुए बहुत से महत्वपूर्ण मार्ग प्रकाशित होते हैं। शुरूआती समय में यहाँ से बहुत से वाहन होकर गुजरा करते थे, परन्तु वर्तमान समय में सरकार ने यहाँ से भारी वाहनों का गुजरना प्रतिबंधित कर दिया है। प्रत्येक वर्ष भारत में गणतंत्र दिवस के दिन इस स्थल पर भारत देश की आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी सहित भारत की रंगीन और विभिन्न प्रकार की संकृति का प्रदर्शन करती हुईं परेड निकाली जाती हैं। यह परेड प्रतिवर्ष रास्ट्रपति भवन से चलकर इंडिया गेट के मार्ग से होती हुई लाल किले तक प्रस्थान करती है।

इतिहास

पुरानी दिल्ली का रेलवे स्टेशन सन. 1920 के दशक में पूरे शहर का एकमात्र रेलवे स्टेशन था। आगरा से दिल्ली की रेलवे लाइन उस समय किंग्सवे से होकर गुजरती थी, जिसे बाद में यमुना नदी के पास सन.1926 तक स्थित कर दिया गया। इंडिया गेट का निर्माण ब्रिटिश शाशन ने उन 82,000 शहीद सैनिकों की याद में करवाया, जिन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था।
जब इंडिया गेट पूर्ण रूप से तैयार हुआ तब इसके सामने जार्ज पंचम (प्रथम ब्रिटिश शाशक) की प्रतिमा एक बड़े से छत्र के नीचे स्थापित थी, जिसे भारत स्वतंत्र होने के पश्चात भारतीय सरकार ने अन्य ब्रिटिश प्रतिमाओं के साथ कोरोनेशन पार्क में स्थापित करा दिया और अब वहाँ उस प्रतिमा का केवल छत्र ही शेष रह गया है। उसके पश्चात सन. 1971 में हुए इंडो पाक की लड़ाई के समय शहीद हुए सैनिकों की याद में भारत सरकार ने यहाँ काले संगमरमर से एक स्मारक का निर्माण करवाया, जिसको अमर जवान ज्योति के नाम से जाना जाता है। सन. 1972 के गणतंत्र दिवस के दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इस ज्योति को जलाया था, जो तब से हर समय प्रकाशित रहती है। इस स्मारक के ऊपर अज्ञात सैनिकों की स्मृति में राइफल के ऊपर एक टोपी भी रखी गई है, जिसके चारों ओर यह अमर ज्योति सदेव प्रकाशित रहती है।

निर्माण कार्य

इंडिया गेट का निर्माण कार्य पेरिस देश के आर्क डे ट्रॉयम्फ़ से प्रेरित होकर सन. 1921 में प्रारंभ किया गया। इस स्मारक की बनावट की रचना को बीसवीं शताब्दी के प्रशिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटएंस ने तैयार किया था। इंडिया गेट को बनाने के लिए पीले और लाल रंग के बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट का इस्तमाल किया गया। यह विशाल द्वार पूर्ण रूप से सन. 1931 में पूरे दस साल के पश्चात बनकर तैयार हुआ।

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