जन्म और शिक्षा

श्री इंद्र कुमार गुजराल का जन्म 4 दिसम्बर 1919 में ब्रिटिश भारत के अविभाजित भारत के झेलम में हुआ था। इनका पूरा नाम  इन्द्र कुमार गुजराल था। इनके पिता का नाम अवतार नरेन और माता का नाम पुष्पा गुजराल था। इंद्र कुमार गुजराल ने ‘डी.ए.व्ही (DAV) कॉलेज’, ‘हैली कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स’ और ‘फोर्मन क्रिस्चियन कॉलेज यूनिवर्सिटी’, लाहौर से अपनी पढाई पूरी की थी।

श्री इंद्र कुमार गुजराल ने भारतीय स्वतंत्रता अभियान में भी अपना योगदान दिया और 1942 में भारत छोड़ो अभियान का हिस्सा लेने की वजह से वे जेल गए थे। जब श्री इंद्र कुमार गुजराल एक विद्यार्थी थे, तब वे भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी बने। उनकी दो बहनें भी हैं, जिनका नाम उमा नंदा और सुनीता जज है।

श्री इंद्र कुमार गुजराल को उर्दू बोलना और कविता लिखना बहुत पसंद था। इनकी पत्नी का नाम शीला गुजराल था, वो भी एक प्रतिष्ठित कवियित्री थी। शीला गुजराल काफी बीमार रहती थीं, 11 जुलाई 2011 को उनका देहांत हो गया था। उनके 2 बेटे भी हैं, पहले बेटे का नाम नरेश तथा दूसरे बेटे का नाम विशाल है।

शुरूआती राजनीति

1958 में श्री इंद्र कुमार गुजराल नई दिल्ली के म्युनिसिपल कमेटी के उपाध्यक्ष बने और 1964 में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। श्री इंद्र कुमार गुजराल इंदिरा गांधी के काफी करीब थे और आगे चलकर 1964 में राज्य सभा के सदस्य बने। फिर आपातकाल के समय जून 1975 में श्री इंद्र कुमार गुजराल इनफार्मेशन और ब्राडकास्टिंग के मिनिस्टर बन गए। भारत में सेंसरशिप के समय पर वे मीडिया के इनचार्ज भी थे और दूरदर्शन भी उनके चार्ज में ही था।

इसके बाद दोबारा श्री इंद्र कुमार गुजराल राज्य सभा के लिए चुने गए और 1976 तक वे उसी पद पर रहे। उसके बाद उन्होंने जल-संसाधन मंत्री बनकर देश की सेवा की और उसके बाद इंदिरा गांधी ने श्री इंद्र कुमार गुजराल को सोवियत संघ में भारत का एम्बेसडर बना दिया। उसके बाद संजय गाँधी के साथ हुए विवाद के कारण विद्या चरण शुक्ला को उनकी जगह पर रख लिया गया और इसके बाद उन्हें योजना मंत्री बना दिया गया था।

प्रधानमंत्री पद

श्री इंद्र कुमार गुजराल भारत के 12वें प्रधानमंत्री थे। श्री इंद्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल 1997 से 19 मार्च 1998 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे।

श्री इंद्र कुमार गुजराल एक आम सहमती वाले उम्मीदवार के रूप में प्रधानमंत्री पद पर बैठे थे। इनकी सरकार के समय में ही ‘सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन’ (CBI) ने बिहार राज्य के मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में मुक़दमा चलाना शुरू किया था। श्री इंद्र कुमार गुजराल के अनुसार श्री लालू प्रसाद यादव इस मुक़दमा से भागने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, अधिकारिक सूत्रों के अनुसार श्री लालू प्रसाद यादव मुक़दमे से नहीं भाग रहे थे। परिणामस्वरूप जनता और दूसरी राजनीतिक पार्टीयों ने लालू यादव से इस्तीफा माँगा।

मृत्यु

श्री इंद्र कुमार गुजराल लम्बे समय से डायलिसिस पर चल रहे थे। 19 नवम्बर 2012 को उनकी छाती में संक्रमण होने के बाद उन्हें हरियाणा स्थित गुड़गाँव के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान ही उनकी हालत बिगडती चली गई। 27 नवम्बर 2012 को वे बेहोशी की हालत में चले गए, बहुत कोशिश के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। आखिरकार 30 नवम्बर 2012 को उनका देहांत हो गया। उनके देहांत का समाचार मिलते ही लोक सभा व राज्य सभा स्थगित हो गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई और प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति ने शोक प्रकट किया।