अव्यय | Avyay | Indeclinable in Hindi

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जिन शब्दों के रूप में काल, लिंग, वचन के बदलने पर कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।

अव्यय के प्रकार – अव्यय पाँच प्रकार के होते हैं-

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1) क्रियाविशेषण

क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रियाविशेषण कहते हैं।

क्रियाविशेषण के प्रकार – क्रियाविशेषण चार प्रकार के होते हैं

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(क) कालवाचक क्रियाविशेषण – वे अव्यय शब्द, जो क्रिया के करने या होने के समय का ज्ञान कराते हैं, उन्हें कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।

जैसे-

(i) तुम अब जा सकते हो। (कब जा सकते हो? उत्तर- अब)
(ii) मयंक परसों गाएगा। (कब गाएगा? उत्तर- परसों)

(ख) स्थानवाचक क्रियाविशेषण – वे अव्यय शब्द, जो क्रिया के होने के समय का ज्ञान कराते हैं, उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।

जैसे-

(i) पूजा ऊपर बैठी है। (कहाँ बैठी है? उत्तर- ऊपर)
(ii) मोहन अंदर गया है। (कहाँ गया है? उत्तर- अंदर)

(ग) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण – वे अव्यय शब्द, जो क्रिया की मात्रा या उसके परिमाण को बताते हैं, उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।

जैसे-

(i) रेडिओ की आवाज कम करो। (कितनी आवाज करो? उत्तर- कम)
(ii) वह अधिक बोलता है। (कितना बोलता है? उत्तर- अधिक)

(घ) रीतिवाचक क्रियाविशेषण – वे अव्यय शब्द, जो क्रिया के होने की रीति, विधि, तरीके या ढंग का ज्ञान कराते हैं, उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।

जैसे-

(i) मैं आपकी बात ध्यानपूर्वक सुन रहा हूँ। (कैसे सुन रहे होे? उत्तर- ध्यानपूर्वक)
(ii) झटपट काम करो। (कैसे काम करो? उत्तर- झटपट)

(2) संबंधबोधक

वे अव्यय जो संज्ञा-सर्वनाम के साथ जुड़कर उनका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताते हैं, उन्हें संबंधबोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे-

(i) खुशी के मारे वह पागल हो गया।
(ii) बालक चाँद की ओर देख रहा था।

इन वाक्यों में ‘के मारे’, ‘की ओर’ संज्ञा शब्दों के साथ आकर उनका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों के साथ जोड़ रहे हैं। अतः ये संबंधबोधक अव्यय हैं।

(3) समुच्चयबोधक

वे अव्यय शब्द, जो दो या अधिक शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। इनको ‘योजक’ भी कहा जाता है।

समुच्चयबोधक अव्यय के प्रकार – समुच्चयबोधक अव्यय दो प्रकार के होते हैं

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(क) समानाधिकरण समुच्चयबोधक– वे अव्यय शब्द जो समान स्तर के दो या दो से अधिक शब्दों या प्रधान उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे- और, या, किन्तु आदि।

(i) सुबह हुई और पक्षी चहके।
(ii) मेरे पिताजी या माताजी विवाह में सम्मिलित होंगे।
(iii) वह गरीब है किंतु ईमानदार है।

(ख) व्यधिकरण समुच्चयबोधक – एक से अधिक आश्रित उपवाक्यों को प्रधान वाक्य से जोड़ने वाले अव्यय व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।

जैसे-

(i) यदि मैं दौड़ कर जाता तो उसे बचा लेता।

यहाँ ‘मैं दौड़ कर जाता’ आश्रित उपवाक्य ‘उसे बचा लेता’ प्रधान वाक्य से जुड़ा हुआ है। इन्हें जोड़ने वाले योजक हैं ‘यदि’ और ‘तो’। अतः यह व्यधिकरण समुच्चयबोधक है।

(4) विस्मयादिबोधक

हर्ष, शोक, आश्चर्य, ¬प्रशंसा, घृणा, लज्जा, ग्लानि आदि भावों को प्रकट करने वाले अव्यय शब्द विस्मयादिबोधक कहलाते हैं।

जैसे-

(i) अहा! कितना सुन्दर गुलाब है!
(ii) ऐं! यह कैसे हो सकता है।

इनमें ‘अहा’ और ‘ऐं’ विस्मयादिबोधक शब्द हैं।

(5) निपात

जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगाकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल ला देते हैं, उन्हें निपात कहते हैं।

जैसे-

(i) मोहन भी जा रहा है।
(ii) तुमने पत्र तक नहीं लिखा।
(iii) केवल दो रूपये मिलेंगे।