जो वाक्यांश सामान्य अर्थ के स्थान पर विशेष अर्थ को प्रकट करता है, उसे मुहावरा कहते हैं। मुहावरों के प्रयोग से भाषा में सरलता और सरसता उत्पन्न होती है।

प्रमुख मुहावरे: अर्थ और प्रयोग

अर्थप्रयोग
अंधे की लाठी (एक मात्र सहारा)मेरे पड़ोसी का इकलौता बेटा स्वर्ग सिधार गया, अब तो उनकी बेटी ही उनके लिए अंधे की लाठी है।
अपने मुँह मियाँ-मिट्ठू बनना (अपनी प्रशंसा स्वयं करना)अपने मुँह मियाँ-मिट्ठू बनने वाले व्यक्ति का सम्मान नहीं होता।
अपना उल्लू सीधा करना (अपना मतलब निकालना)आजकल के नेता अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं।
आशा जाग उठना (उम्मीद होना)डाॅक्टर द्वारा सांत्वना देने पर बेटे मधुर के मन में माता के बचने की आशा जाग उठी।
आँखों से ओझल होना (गायब हो जाना)साँझ का अँधेरा होते ही आकाश में उड़ते पक्षी आँखों से ओझल हो गए।
आँखों का तारा (अत्यधिक प्रिया)प्रवीण माता-पिता की आँखों का तारा है।
आसमान पर चढ़ना (बहुत अभिमान करना)मोहन दौड़ में प्रथम क्या आया वह तो आसमान पर ही चढ़ गया।
आग में घी डालना (क्रोध को भड़काना)माँ-बेटे में झगड़ा हो रहा था, बहू ने माँ की कमियाँ गिनाकर और आग में घी डाल दिया।
आस्तीन का साँप (कपटी मित्र)रवि अकेला तुम्हारे लिए आस्तीन का साँप बना हुआ है। हर जगह तुम्हारी निन्दा करता है।
पलकें बिछाना (आदर सम्मान करना)जब मेरा मित्र वर्षों बाद विदेश से आया तो उसके स्वागत में मैंने पलकें बिछा दीं।
ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना)इरफान भाई बहुत दिनों बाद मिले हो, आप तो सच में ईद का चाँद हो गए हो।
कलेजे पर साँप लोटना (ईष्र्या करना)अमित का उच्च पद पर चयन हो जाने पर रवि के कलेजे पर साँप लोट गया।
कान भरना (चुगली करना)चापलूस लोग किसी-न-किसी के विरूद्ध अधिकारियों के कान भरते रहते हैं।
कोल्हू का बैल (दिन-रात काम में जुटे रहना)मोहन दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह काम में जुटा रहता है, फिर भी उसे समय से पारिश्रमिक नहीं मिलता।
उन्नीस-बीस का अन्तर (बहुत कम अंतर होना)मोहन और सोहन जुड़वाँ भाई हैं, उनमें उन्नीस-बीस का ही अंतर है।
एक और एक ग्यारह (संगठन में शक्ति)भारतीय हर विपत्ति में परस्पर भेद-भाव भुलाकर एकजुट होकर यह सिद्ध करते देते हैं कि एक और एक ग्यारह होते हैं।
एक ही थैले के चट्टे-बट्टे (एक जैसे)उसके पाँच लड़के हैं, किस पर विश्वास किया जाए, सब के सब एक ही थैले के चट्टे-बट्टे हैं।
एक ही लकड़ी से हाँकना (सबसे एक जैसा व्यवहार करना)कभी तो बड़े-छोटे का ध्यान रखा करो, सबको एक ही लकड़ी से हाँकते हो।
कमर कसना (तैयार होना)भारतीय सैनिकों ने आतंकवाद का सामना करने के लिए कमर कस ली है।
कमर सीधी करना (लेटकर आराम करना)अब मैं बहुत थक गया हूँ, थोड़ा कमर सीधी कर लूँ तो चलूँ।
काँटे विछाना (बाधा डालना)तुम मेरे मार्ग में चाहे जितने काँटे बिछाओ, मैं अपना लक्ष्य अवश्य प्राप्त करूँगा।
कलई खुलना (भेद खुलना)जब मोहन की चोरी की कलई खुली तो उसे मित्रों के सामने लज्जित होना पड़ा।
चिराग तले अँधेरा (सर्वाधिक उपयुक्त स्थान पर किसी गुण का अभाव)कल रात थाने में पुलिस अधिकारी की गाड़ी चोरी हो गई, सच है, चिराग तले अँधेरा होता है।
छक्के छुड़ाना (बुरी तरह हराना)छत्रपति शिवाजी ने मुगलों के छक्के छुड़ा दिए।
जमीन-आसमान एक कर देना (प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ना)मैंने अपनी अंकतालिका खोजने में जमीन-आसमान एक कर दिया।
ढाक के तीन पात (सदा एक सा रहना)अनपढ़ को उसके हित की बात समझाना व्यर्थ है, क्योंकि वह तो वही ढ़ाक के तीन पात है।
खटाई में पड़ना (दुविधा में पड़ना)आर्थिक संकट के कारण सरकार की कई योजनाएँ खटाई में पड़ गयीं।
ख्याली पुलाव पकाना (व्यर्थ कल्पना करना)बिना धन के शहर में मकान बनवाने की बात करना ख्याली पुलाव पकाना है।
खाक में मिलना (नष्ट होना)परीक्षा में असफल होने से मेरा सारा परिश्रम खाक में मिल गया।
खून खौलना (गुस्सा चढ़ना)कारगिल पर पाकिस्तान के कब्जे से भारतीय सैनिकों का खून खौल उठा।
खून सवार होना (किसी को मार डालने के लिए उद्यत होना)अपनी प्रेमिका को छेड़ने का समाचार सुनकर उसपर खून सवार हो गया।
खून का घूँट पीना (बुरी लगने वाली बात को सह लेना)अपनी पत्नी के साथ बदमाशों को छेड़खानी करता देख वह खून का घूँट पीकर रह गया।
गले का हार होना (अत्यन्त प्रिय होना)तुलसी का रामचरितमानस जनता के गले का हार हो रहा है।
गिरगिट की तरह रंग बदलना (किसी बात पर स्थिर न रहना)राजनीति में लोग गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
गुरू घण्टाल (बहुत धूर्त)आपकी लापरवाही से आपका लड़का गुरू घण्टाल हो गया है।
गूलर का फूल (असम्भव बात या अदृश्य होना)आज बाजार में शुद्ध देशी घी मिलना गूलर का फूल हो गया है।
गाल बजाना (डींग हाँकना)तुम्हारे पास धेला नहीं, पता नहीं क्यों गाल बजाते फिरते हो।
घर फूँक तमाशा देखना (अपना नुकसान करके आनंद मनाना)घर फूँक तमाशा देखने वालों को कष्ट उठाना पड़ता है।
घाट-घाट का पानी पीना (बहुत अनुभव प्राप्त करना)मुझसे चाल मत चलो, मैं घाट-घाट का पानी पी चुका हूँ।
घाव पर नमक छिड़कना (दुःखी को और दुःखी करना)रामू अस्वस्थ तो था ही, परीक्षा में असफलता की सूचना ने घाव पर नमक छिड़क दिया।
घी के दीये जलाना (खुशियाँ मनाना)प्रथ्वीराज की मृत्यु सुनकर जयचन्द ने घी के दीये जलाये।
घोड़े बेचकर सोना (निश्चिन्त होकर सोना)परीक्षा के बाद सभी छात्र घोड़े बेचकर सोते हैं।
चाँदी का जूता मारना (रिश्वत या घूस देना)आजकल सरकारी कार्यालयों में बिना चाँदी का जूता मारे काम नहीं हो पाता है।
दिल भर आना (शोकाकुल होना या भावुक होना)संजय की मृत्यु का समाचार सुनकर दिल भर आया।
दाँत पीसकर रह जाना (क्रोध रोक लेना)मोहन के खिलाफ सोहन दाँत पीसकर रह जाता है।
नाकों चने चबाना (बहुत तंग होना)लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए।
नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना)चोर मकान में चोरी कर नौ दो ग्यारह हो गए।
दिमाग आसमान पर चढ़ना (बहुत घमण्ड होना)कभी-कभी मेरा दिमाग आसमान पर चढ़ जाता है।
दूध का दूध और पानी का पानी (पूर्ण न्याय करना)आजकल न्यायालयों में दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाता।
दाँतों तले ऊँगली दबाना (आश्चर्यचकित होना)शिवाजी की वीरता देखकर औरंगजेब ने दाँतों तले ऊँगली दबा ली।
नाक का बाल होना (किसी का प्रिय होना)मनोज तो नेता जी की नाक का बाल है।
पहाड़ टूट पड़ना (मुसीबत आना)वर्षा में मकान गिरने की सूचना पाकर राम पर पहाड़ टूट पड़ा।
पानी उतर जाना (लज्जित हो जाना)लड़के का कुकृत्य सुनकर सेठ जी का पानी उतर गया।
पाँचों अँगुलियाँ घी में होना (सभी प्रकार का आराम या लाभ होना)फैक्ट्री बढ़िया चल रही है, अब तो सेठ जी की पाँचों अँगुलियाँ घी में हैं।
फूला न समाना (बहुत प्रसन्न होना)पुत्र की उन्नति देखकर माता-पिता फूले नहीं समाते हैं।
बहती गंगा में हाथ धोना (बिना प्रयास ही यश पाना)जीवन में कभी-कभी बहती गंगा में हाथ धोने के मौके मिल जाते हैं।
बाँए हाथ का खेल (सरल कार्य होना)उसके लिए वाद-विवाद प्रतियोगिता जीतना बाँए हाथ का खेल है।
बल्लियों उछलना (बहुत खुश होना)सरकारी नौकरी में सलेक्शन की बात सुनकर वह बल्लियाँ उछलने लगा।
बीड़ा उठाना (जिम्मेदारी लेना)समाज सेविका ने अपने आस-पड़ोस के सभी गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का बीड़ा उठाया है।
पर्दाफाश करना (रहस्य खोलना)पुलिस मंुबई में हुए आतंकवादी हमले का पर्दाफाश करने में सफल रही।
भीगी बिल्ली बनना (भयभीत होकर रहना)प्रधानाचार्य के कक्षा में आते ही सब शरारती विद्यार्थी भीगी बिल्ली बन गए।
रंग में भंग पड़ना (खुशी में विघ्न पड़ना)शादी के मंड़प में लड़के वालों के दहेज माँगने से रंग में भंग पड़ गया।
लुटिया डुबाना (हानि करना)मैं कोट में मुकदमा जीत ही रहा था कि तुम ने मेरे विरूद्ध गवाही देकर मेरी लुटिया ही ड़ुबो दी।
लोहा मानना (श्रेष्ठ मानना)अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का लोहा माना है।
सपने देखना (कल्पनाएँ करना)केवल सपने देखने से काम नहीं चलेगा, कुछ करके दिखाओ।
मुँह में पानी भर आना (जी ललचाना)चाॅकलेट देखते ही बच्चों के मुँह में पानी भर आया।
रँगा सियार होना (कपटी होना)मोहन की लल्लो-चप्पो में न आना, वह तो रँगा सियार है।
सिर धुनना (पछताना)अमित अपने बेटे को कुमार्ग पर चलता देख सिर धुन रहा है, समय रहते जाग जाता तो ऐसा न करना पड़ता।
हवाइयाँ उड़ना (घबराना)अपने घर में डाकुओं को देख मेरे चेहरे की हवाइयाँ उड़ने लगीं।
हाथ धो बैठना (खो देना)रिश्वत लेना बंद करो, कहीं ऐसा न हो कि नौकरी से हाथ धो बैठो।
भैंस के आगे बीन बजाना (बेसमझ आदमी को उपदेश)अनपढ़ व अन्धविश्वासी लोगों से माक्र्सवाद की बात करना भैंस के आगे बीन बजाना है।
रफूचक्कर होना (भाग जाना)पुलिस के आने की सूचना पाकर दस्यु दल रफूचक्कर हो गया।
लकीर का फकीर होना (रूढ़िवादी होना)पढ़े-लिखे समाज में भी बहुत से लकीर के फकीर हैं।
साँप सूँघना (बेदम हो जाना)कक्षा में बहुत शोर-गुल हो रहा था, परन्तु गुरू जी के आते ही सभी बच्चे ऐसे हो गए जैसे उन्हें साँप सूँघ गया हो।
श्रीगणेश करना (कार्य आरम्भ करना)आज गुरूवार है, आप कार्य का श्रीगणेश करें।
हाथों के तोते उड़ जाना (होश हवास खो जाना)शिवानी के छत से गिरने से मेरे तो हाथों के तोते उड़ गए।
हक्का-बक्का रह जाना (अचम्भे में पड़ जाना)सोहन शिवानी को ट्रेन में देखकर हक्का-बक्का रह गया।
टाँग अड़ाना (विघ्न डालना)वह इतना दुष्ट है कि हर अच्छे काम में अपनी टाँग अड़ाता है।
टेढ़ी खीर (कठिन कार्य)वर्तमान बेरोजगारी को दूर करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर है।
घर का न घाट का (किसी तरफ का नहीं)इस व्यापार के लिए मैंने नौकरी छोड़ी, पर इसमें घाटा हो गया। इस तरह न मैं घर का रहा न घाट का।
नाक रगड़ना (बहुत विनती करना)अपने स्वार्थ के लिए मूर्खों के सामने भी नाक रगड़ना पड़ता है।
पत्थर की लकीर (अमिट, स्थायी)मैंने जो वचन दे दिया, उसे पत्थर की लकीर समझो।
नमक अदा करना (उपकारों का बदला चुकाना)संजय ने मोहन को अपना सारा धन देकर नमक अदा कर दिया।
नाक कटना (इज्ज्त चली जाना)उसके पास कुछ खाने को नहीं था और घर में एकाएक मेहमान आ गए, परन्तु पड़ोसी की मदद से उसकी नाक कटने से बच गई।
बगुला भगत (धूर्त आदमी)सोहन की भोली सूरत पर न जाना, वह बगुला भगत है। बातों ही बातों में ठग लेगा।
बट्टा लगना (कलंकित करना)मनोहर ने पुस्तकालय से पुस्तक चुराकर हमारे सम्मान पर बट्टा लगा दिया।
बाँछें खिलना (बहुत प्रसन्न होना)बेटे के प्रथम आने की बात सुनकर पिता की बाँछें खिल गई।
भंडा फोड़ना (भेद खोलना)विभीषण ने रावण की सारी काली करतूतों का भंडा फोड़ दिया।
भाड़ झोंकना (व्यर्थ समय नष्ट करना)अरे नालायकों! कुछ काम भी करोगे या सारा दिन भाड़ झोंकते रहोगे।
मग्ज चाटना (व्यर्थ में दिमाग खर्च करवाना)नालायक बच्चे अध्यापक का मग्ज चाट जाते हैं, फिर भी उन्हें कुछ समझ नहीं आता।
मुँह में पानी भर आना (ललचाना)गरम-गरम गुलाब जामुनों को देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।
लाल-पीला होना (क्रूद्ध करना)पाँडवों की प्रशंसा सुनकर दुर्योधन लाल-पीला हो जाता था।
विष उगलना (द्वेषपूर्ण बातें कहना)शकुनि दुर्योधन के कान में पाँडवों के विरूद्ध विष उगलता रहता था।
सब्ज बाग दिखाना (लोभ-आकर्षण की बातें करना)नौकरी दिलवाने वाली एजेन्सी ने लोगों को सब्ज बाग तो खूब दिखाए परन्तु नौकरी किसी को नहीं मिली।
सिर पर भूत सवार होना (धुन सवार होना)जब से मैंने कम्प्यूटर सीखना शुरू किया है, मेरे सिर पर कम्प्यूटर का ही भूत सवार हो गया है।
हाथ साफ करना (चुरा लेना)दुकानदार ने थोड़ी-सी पीठ फिराई कि चोर एक आभूषण पर हाथ साफ कर गया।
होश उड़ना (डर जाना)आयकर अधिकारी के दस्ते को देखकर सेठ जी के होश उड़ गए।
लट्टू होना (मुग्ध होना)मुरारीलाल अपनी नई वधू पर लट्टू हुआ जा रहा था।
पगड़ी उछालना (अपमानित करना)जो लड़के अपने माता-पिता की पगड़ी उछालते हैं, वे स्वयं भी जीवन में कभी सुख नहीं पा सकते।
पाला पड़ना (मुकाबला होना)यह बदमाश ठीक रास्ते पर तभी आएगा, जब इसका किसी शक्तिशाली से पाला पड़ेगा।