होली | Holi in Hindi

332

 होली हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है, जिसे ‘हिन्दू पंचांग’ के अनुसार प्रति वर्ष फागुन माह की पूर्णिमा को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को रंगों का त्यौहार भी कहा जाता है। प्रमुख रूप से यह त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन ‘होलिका दहन’ तथा दूसरे दिन ढोल बजाकर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जाकर लोगों को रंग, गुलाल या धुरलेख आदि एक दूसरे पर लगाते हैं।

ऐसा  माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी दुर्भावना को भूलकर गले मिलते हैं। शाम को नए-नए वस्त्र पहनकर एक दूसरे के घर जाकर मिठाइयाँ खाते हैं, इस दिन ‘कांजी के बड़े’ खाने व खिलने का भी रिवाज है और आपस में गले मिलकर होली की बधाई देते हैं। छोटे बच्चे अपने से बड़ों के पैर छुते हैं व हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं। होली का पर्व ‘बसंत पंचमी’ से ही प्रारम्भ हो जाता है, उसी दिन से गुलाल उड़ाना शुरू हो जाता है।

इतिहास

होली भारत का बहुत ही पुराना त्यौहार है जिसे होली, होलिका के नाम से भी जाना जाता है। बसंत की ऋतु में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाए जाने के कारण इसे ‘बसंतोत्सव’ और ‘काम-महोत्सव’ भी कहा जाता है। इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों में भी इस त्यौहार को प्रचालन था, लेकिन ज्यादातर यह पूर्वी भारत में ही मनाया जाता है। इस त्यौहार का बारे में बहुत सी पुरानी धार्मिक किताबों में लिखा है।

विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 साल पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा स्मरण में होली का वर्णन किया है। भारत में बहुत से मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है। होली के त्यौहार को केवल हिन्दू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। मुगलकाल के होली के किस्से और इस काल के होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया है।

कहानियाँ   

होली के त्यौहार से बहुत सी कहानियाँ जुडी हैं, जिसमें सबसे प्रसिद्ध कहानी भक्त प्रह्लाद की मानी जाती है। पुराने समय में हिरण्यकश्यप नाम का बहुत बलवान असुर था। वह खुद को ही भगवान मानने लगा था। हिरण्यकशिपु ने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर रोक लगा दी थी। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को भगवान विष्णु की पूजा करने से मना किया, लेकिन भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की पूजा करने से नहीं रुका। हिरण्यकश्यप ने क्रोधित होकर भक्त प्रह्लाद को कठोर दंड दिए, परन्तु उसने भगवान विष्णु की भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका से कहा कि तुम प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर अग्नि ने बैठ जाओ। हिरण्यकश्यप के कहने पर होलिका अग्नि में बैठ गई, होलिका तो अग्नि ने जल गई, लेकिन भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ, क्योंकि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था।

उसी समय से हिन्दू धर्म के लोग इस पर्व को पर्व मनाते चले आ रहे हैं। होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जिसमें लकड़ी, घास और गाय का गोबर से बने ढेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस अग्नि में जलाता है। होलिका दहन के समय सभी लोग इसके चारों ओर घूमकर अपने स्वास्थ्य और यश की मंगल कामना करते हैं, साथ ही अपनी बुराईयों को अग्नि में भस्म कर देते हैं। होलिका दहन के अगले दिन सभी लोग इक्कठे होकर रंग और गुलाल से आपस में मिलकर होली खेलते हैं।

विशेष त्यौहार  

भारत में होली का त्यौहार अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी पूरे देश में जानी जाती है, बरसाने की लठमार होली बहुत ही प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं को रंग और गुलाल लगते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़ों से बनाए गए कोड़ों से मरती हैं। मथुरा और वृन्दावन में होली का त्यौहार लगभग 15 दिनों तक मनाया जाता है। बरसना की होली, मथुरा-वृन्दावन की होली, नंदगाँव की होली, बलदेव की होली आदि स्थानों पर होली का त्यौहार बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।