हिमा दास की जीवनी | Hima Das Biography in Hindi

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जन्म व परिवार

हिमा दास IAAF वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2018 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला धावक है। इनका जन्म 9 जनवरी 2000 में असम राज्य के नौगांव जिले के ढिंग में हुआ था। हिमा दास एक बंगाली ब्राह्मण परिवार से हैं। हिमा दास के पिता का नाम रंजीत दास और माता का नाम जोनाली दास है। इनके परिवार  का मुख्य व्यवसाय खेती है। हिमा दास के पिता जी  खेती-बाड़ी का काम करते हैं तथा माता जी एक गृहणी हैं। उनके घर में कुल मिलाकर 16 लोग हैं। हिमा दास के 5 भाई-बहिन हैं, हिमा दास अपने माता-पिता की सबसे छोटी बेटी है। इनके घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि किसी तरह खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है। हिमा दास की शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल में ही पूरी हुई।

हिमा दास ने धिंग पब्लिक स्कूल में भाग लिया और एक बच्चे के रूप में फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया। हिमा दास ने अपने स्कूल में लड़कों के साथ फुटबॉल खेला था तथा वह फुटबॉल में करियर बनाना चाहती थी। बाद में जवाहर नवोदय विद्यालय के एक शारीरिक शिक्षक शम्सुल हक के सुझाव पर हिमा दास ने एथलेटिक्स करना शरू किया तथा छोटी और मध्यम दूरी की दौड़ में भाग लेने लगी। शम्सुल हक ने उन्हें नागांव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से मिलवाया। बाद में हिमा दास ने अंतर-जिला प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया और खेल बैठक में दो स्वर्ण पदक जीते।

करियर

हिमा दास का झुकाव बचपन से ही  स्पोर्ट्स की तरफ था तथा बचपन से ही स्पोर्ट्स खेला करती थी। कहा जाता है कि उन्हें बचपन से लडकों के साथ फुटबॉल खेलना पसंद था और इसी वजह से हिमा दास का स्टैमिना बढ़ गया। हिमा दास नौगांव में रहती थी, नौगांव एक कम विकसित जगह है, अक्सर नौगांव में बाढ़ के हालात जल्दी ही बन जाते हैं। जब हिमा दास नौगांव में रहती थी, तब बारिश की वजह से सब जगह पानी भर जाने से कई-कई दिनों तक प्रैक्टिस नहीं कर पाती थी। 2017 में हिमा दास की मुलाकात निपुण दास से हुई, जो इनके कोच बने। इसके बाद निपुण दास इन्हें गुवाहाटी ट्रेनिंग के लिए ले गए। हिमा दास का परिवार काफी गरीब था, इसलिए गुवाहाटी में उनको ट्रेनिंग देने के दौरान उनका सारा खर्च उनके कोच ने उठाया था। शुरू-शुरू में निपुण दास ने इन्हें 200 मीटर्स की रेस के लिए तैयारी किया था। जैसे-जैसे हिमा दास का स्टैमिना बढ़ता गया, इन्होंने 200 मीटर्स की जगह 400 मीटर्स के ट्रैक पर दौड़ना शुरू कर दिया।

IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप

हाल ही में हिमा दास पहली ऐसी भारतीय महिला बनी हैं, जिन्होंने IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा है। इससे पहले कोई भी भारत की महिला IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में 400 मीटर्स में नहीं जीत पाई थी। उन्होंने यह रेस 51.46 सेकंड में पूरी की और रेस में प्रथम स्थान हासिल किया।

हिमा दास द्वारा स्वर्ण पदक जीतने पर उनके कोच निपुण दास कहते हैं- “रेस में जब आखिरी 100 मीटर तक हिमा दास चौथे स्थान पर थी, तो मुझे यक़ीन हो गया था कि वह इस बार गोल्ड ले आएगी, मैं उसकी तकनीक को जानता हूं, वह शुरुआत में थोड़ी धीमी रहती है और अपनी पूरी ऊर्जा अंतिम 100 मीटर में लगा देती है, यही उसकी खासियत है।”

निपुण दास आगे कहते हैं- “हिमा को ट्रैक के कर्व (मोड़) पर थोड़ी समस्या होती है, यह बहुत हल्की सी दिक्कत है, यही वजह है कि शुरुआत में वह हमेशा पीछे ही रहती है, लेकिन जब ट्रैक सीधा हो जाता है तो वह तेज़ी से रिकवर करते हुए सबसे आगे निकल जाती है।”

रेस में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर, स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमा दास को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द द्वारा बधाई दी गई। हिमा दास ने भी सभी का धन्यवाद दिया और कहा कि वे देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हैं, वे आगे भी और अधिक मेडल जीतने की कोशिश करेंगी।