बाज | Baaj | Hawk in Hindi

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बाज़ का वैज्ञानिक नाम बुटेओ (Buteo) है और अंग्रेजी में इसको हॉक (hawk) कहते हैं। बाज़ 320 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है। यह पक्षी माँसाहारी होता हैं। यह पक्षी सिर्फ आसमान का सबसे तेज पक्षी ही नहीं बल्कि धरती पर सबसे तेज दौड़ने बाला पक्षी भी है। बाज़ एक शिकारी पक्षी है जो गरुड़ से छोटा है। इसके पंख लम्बे और पतले तथा मुड़े हुए होते हैं, जो इसे तेज गति से उड़ने में और उसी गति में अपनी दिशा बदलने में मदद करते हैं। बाज़ की छाती की माँसपेशियाँ मजबूत होती हैं। बाज के शरीर की लम्बाई लगभग 13-25 इंच तथा पंख की लम्बाई 29-47 इंच होती है। इतनी ऊंचाइयों पर उड़ने के बाद भी इसकी अत्यधिक तेज नजर हमेशा अपने शिकार को दूर से देख लेती है और बिना किसी रुकावट की परवाह किए वो अपने शिकार को एक ही झपट्टे में दबोच लेता है। बाज एक बहुत ही चालाक पक्षी होता है। इसकी नाक पर कन्द कोशिकाएं होती हैं जो उड़ने या चलने के दौरान साँस लेने में मदद करती हैं।

आहार

बाज़ के भोजन का अनुमान लगाया जा सकता है जिसमें कई छोटे जानवर शामिल हैं। कुछ छोटे जानवर जैसे:- साँप, छिपकली, चूहे, खरगोश, गिलहरी, पक्षी और अन्य तरह के छोटे जीव, कीड़े-मकोड़े आदि होते हैं। बाज अपने शिकार को दूर से देख लेता है और उसे अपने पंजों से पकड़ कर खा लेता है।

जीवन

बाज की उम्र 70/ साल की होती है, लेकिन जिंदगी के इस मुकाम को तय करने के लिये उसे एक मुश्किल फैसला लेना पड़ता है। इसके पंजे 40 वर्ष तक सही ढंग से काम करते हैं। 40 साल के बाद ये पंजे मुड़ने के कारण कमजोर हो जाते हैं और शिकार नहीं पकड़ पाते। इसकी लंबी और तीखी चोंच भी आगे से मुड़ जाती है। पंख मोटे हो जाने से भारी हो जाते हैं और उसकी छाती से चिपक जाते हैं। इससे उसे उड़ने में बहुत दिक्कत होती है। ऐसे समय में बाज के पास दो ही रास्ते रह जाते हैं या तो जीवन त्याग दे या फिर बदलाव के लिए एक दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरे जिसका समय 5 महीने होता है। फिर नया जीवन प्राप्त करने के लिए बाज उड़कर एक ऊँची चट्टान पर जाता है और वहाँ घोंसला बना कर वहाँ रहना शुरू कर देता है। बदलाव की प्रक्रिया के अंतर्गत बाज चट्टान में अपनी चोंच मार-मार कर दर्द की परवाह ना करते हुए तोड़ देता है। उसके बाद अपने पंजों को तोड़ता है। अंत में अपने भारी हो चुके पंखों को भी नोच कर फेंक देता है। अब इस दर्द भरी विधि को पूरा करने के बाद बाज को पुरानी अवस्था में आने के लिए 5 महीने का इंतज़ार करना पड़ता है। बाज का जीवनकाल जंगलों में सिर्फ 17 वर्ष का होता है। इसके बाद बाज का नया जन्म होता है। जिसके बाद वो एक बार फिर से शिकार कर सकता है, उड़ सकता है और मनचाहा आनंद ले सकता है। आगे के 30 साल उसे इन कष्टों के बाद ही मिलता हैं। इसे सबसे अच्छा उड़ान मशीन कहा जाता है। यह हलके भूरे रंग का होता है, इसकी पूंछ का रंग थोडा अलग होता है और पंखों का व पंजों का रंग भी हल्का भूरा होता है। इसके शरीर पर गोले, रेखाएं या तीर के निशान बने होते हैं।