ग्वालियर किला | Gwalior Qila | Gwalior Fort in Hindi

202

परिचय

ग्वालियर का किला भारत में मध्य प्रदेश जिले के ग्वालियर शहर में स्थित है। इस किले का निर्माण 8वीं सदी में सूरजसेन नामक व्यक्ति ने करवाया, फिर उसके उपरांत इस किले को 14वीं सदी में वर्तमान स्वरुप राजा मानसिंह तोमर ने दिया। इस किले के निर्माण की सही अवधि निश्चित नहीं है। यह किला बलुआ पत्थर के पर्वत पर बना हुआ है, जिसे गोपाचल पर्वत कहते हैं। यह किला जमीन से 300 फीट ऊँचा है और इसकी लम्बाई लगभग 3 किलो मीटर है। यह किला लाल बलुआ पत्थरों से बना हुआ है। इस किले पर कई राजाओं ने राज किया था। यह किला मुख्यत: दो भाग- मुख्य किला और महल (गुजारी महल और मान मंदिर महल) में बाँटा हुआ है, इन किलों का निर्माण राजा मान सिंह ने करवाया था। एक ऊँचे पर्वत पर बने इस किले तक पहुँचने के दो रास्ते- ग्वालियर गेट और ऊरवाई गेट हैं।

इतिहास

इस किले का निर्माण 8वीं सदी में सुरजसेन नामक एक स्थानीय सरदार ने करवाया था (इस किले के निर्माण की अवधि निश्चित नहीं है)। इस किले पर कई राजाओं ने राज किया। किले की स्थापना के बाद करीब 10वीं सदी तक इस पर पाल वंश ने राज किया। इसके बाद इस किले पर प्रतिहार वंश ने राज किया। सन. 1023 में मोहम्मद गजनी ने इस किले पर आक्रमण किया, लेकिन उसे हार का सामना करना पडा। सन. 1196 में लंबे घेराबंदी के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस किले को अपने अधीन किया, लेकिन सन. 1211 में उसे भी हार का सामना करना पडा। उसके बाद सन. 1231 में गुलाम वंश के संस्थापक इल्तुतमिश ने इसे अपने अधीन किया। इल्तुतमिश के बाद यह किला तोमर वंश के अधीन रहा, इस वंश के राजा मानसिंह तोमर हुए, जिन्होंने सन. 1398 में इस किले पर राज किया। दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने सन. 1505 में किले कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। एक और हमला उनके बेटे इब्राहिम लोदी ने सन. 1516 में किया, इस हमले में मानसिंह तोमर की मौत हो गयी। उनकी मौत के बाद एक साल की घेराबंदी के बाद तोमर वंश ने आखिर में दिल्ली सल्तनत को किला आत्मसमर्पण कर दिया। इब्राहिम लोदी की मौत के बाद इस किले पर मानसिंह तोमर के बेटे ने राज किया था। उसके बाद बाबर ने किले पर हमला कर इसे अपने कब्जे में लिया और इस पर राज किया। उसके बाद शेरशाह सूरी ने बाबर को हराकर इस किले पर राज किया, शेरशाह सूरी की मौत के बाद सन. 1540 में उनके बेटे इस्लाम शाह सूरी ने राज किया, इस्लाम शाह सूरी की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी आदिल शाह सूरी ने इस किले की रक्षा का जिम्मा हेमचंद्र विक्रमादित्य को दिया और इस किले पर उन्होंने राज किया। इसके बाद अकबर ने किले पर आक्रमण कर इसे अपने कब्जे में लिया और इसे कारागर में तब्दील कर दिया गया। मुगल वंश के बाद इस पर सन. 1736 में जाट राजा महाराजा भीम सिंह राणा ने राज किया फिर उसके बाद मराठों ने इसे जीता। सन. 1779 में सिंधिया कुल के मराठा छत्रप ने इसे जीता और किले में सेना तैनात कर दी, लेकिन इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने छीन लिया। सन. 1780 में इसका नियंत्रण गौंड राणा छत्तर सिंह के पास गया, जिन्होंने मराठों से इसे छीना। इसके बाद सन. 1784 में महादजी सिंधिया ने इसे वापस हासिल किया। सन. 1804 और सन. 1844 के बीच इस किले पर अंग्रेजों और सिंधिया के बीच नियंत्रण बदलता रहा। सन. 1844 में महाराजपुर की लड़ाई के बाद यह किला आखिर में सिंधिया के कब्जे में आ गया। 1 जून सन. 1858 में रानी लक्ष्मीबाई ने मराठा विद्रोहियों के साथ मिलकर इस किले पर कब्जा किया। 16 जून को जनरल ह्यूरोज की ब्रिटिश सेना ने हमला कर दिया और इस दौरान उन्हें गोली लग गई। अगले दिन 17 जून को उनकी मृत्यु हो गई और मृत्यु के बाद ब्रिटिश सरकार ने राज किया। सन. 1886 तक यह किला ब्रिटिश सरकार के पूर्ण नियंत्रण में था और अब उनके लिए किले को कोई रणनीतिक महत्व नहीं था। इसलिए, उन्होंने किले को सिंधिया परिवार को सौंप दिया सन. 1947 में सिंधियों ने भारत की आजादी तक ग्वालियर का शासन जारी रखा। यह किला कई शासकों के अधीन रहा, पर कोई इसे पूरी तरह नहीं जीत पाया।

निर्माण कार्य

इस किले का निर्माण 8वीं सदी में सूरजसेन नामक व्यक्ति ने करवाया, फिर उसके उपरांत इस किले को 14वीं सदी में वर्तमान स्वरुप राजा मानसिंह तोमर ने दिया। इस किले के निर्माण की सही अवधि निश्चित नहीं है। यह किला बलुआ पत्थर के पर्वत पर बना हुआ है, जिसे गोपाचल पर्वत कहते हैं। इस किले का निर्माण भी बलुआ पत्थर से हुआ किया गया है। यह किला जमीन से 300 फीट ऊँचा है और इसकी लम्बाई लगभग 3 किलोमीटर है। यह किला लाल बलुआ पत्थरों से बना हुआ है। यह किला मुख्यत: दो भाग- मुख्य किला और महल (गुजारी महल और मान मंदिर महल) में बाँटा हुआ है, इन किलों का निर्माण राजा मान सिंह ने करवाया था। इस किले में एक सूरज कुण्ड है, जिसे सूरजसेन ने बनवाया था।

पर्यटन

यह किला पर्यटकों के लिए बहुत ही अच्छा किला है, इस किले को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। इस किले में पर्यटकों के देखने के लिए कई ऐतिहासिक स्मारक, बौद्ध और जैन मंदिर, महल (गुजारी महल, मानसिंह महल, जहांगीर महल, करण महल, शाहजहां महल) मौजूद हैं। इस किले में बने गुजारी महल को संग्रहालय में बदल दिया है। इस संग्रहालय में दुर्लभ मूर्तियां रखी गई हैं, जो पहली ईस्वी की हैं। ये मूर्तियां यहीं के आसपास के इलाकों से प्राप्त हुई हैं, जो पर्यटकों को दिखाने के लिए इस महल में राखी गयी हैं।

किलों की तालिका

क्र सं किले का नाम निर्माण वर्ष निर्माणकर्ता स्थान
1 लक्ष्मणगढ़ किला सन. 1862  राजा लक्ष्मण सिंह सीकर, राजस्थान
2 गागरोन किला 12वीं शताब्दी राजा बीजलदेव झालावाड, राजस्थान
3 मदन महल किला सन. 1100 राजा मदन सिंह जबलपुर, मध्य प्रदेश
4 ग्वालियर किला 14 वीं सदी राजा मानसिंह तोमर ग्वालियर, मध्य प्रदेश
5 रणथंभोर किला सन. 944 चौहान राजा रणथंबन देव सवाई माधोपुर, राजस्थान
6 जूनागढ़ किला सन. 1594 राजा रायसिंह बीकानेर, राजस्थान
7 मेहरानगढ़ किला सन. 1459 राव जोधा जोधपुर, राजस्थान
8 लोहागढ़ किला सन. 1733 महाराजा सूरजमल  भरतपुर, राजस्थान
9 कुम्भलगढ़ किला सन. 1458 राजा महाराणा कुम्भा राजसमन्द, राजस्थान
10 भानगढ़ किला सन. 1573 राजा भगवंत दास अलवर, राजस्थान
11 आगरा किला सन. 1565 अकबर आगरा, उत्तर प्रदेश
12 लाल किला सन. 1648 शाहजहाँ दिल्ली
13 पुराना किला 16 वीं शताब्दी शेरशाह सूरी दिल्ली