ग्राम पंचायत का गठन‌ कब हुआ था (Gram Panchayat ka gathan kab hua tha)

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि ग्राम पंचायत का गठन हुआ कैसे ? तो ग्राम पंचायत का गठन गांव की जरूरतों को पूरा करने और उनकी समस्या का निवारण करने हेतु किया गया था । ग्राम पंचायत के सदस्यों की संख्या पंचायत के क्षेत्र की आबादी के अनुसार ही होती है जो इस प्रकार है –

* 500 की जनसंख्या में – 5 सदस्य होते है

* 501  – 1000 की जनसंख्या में – 7 सदस्य होते हैं

* 1001 – 2000 की जनसंख्या में – 9 सदस्य होते हैं

* 2001 – 3000 की जनसंख्या में – 11 सदस्य होते हैं

* 3001 – 5000 की जनसंख्या में 13 सदस्य होते हैं

* 5000 से ज्यादा जनसंख्या में – 15 सदस्य होते हैं ।

ग्राम पंचायत के प्रधान और उनके 2 तिहाई सदस्यों के चुनाव के बाद ही पंचायत का गठन किया जाता । 

Gram Panchayat ka gathan kab hua tha

पंचायत के प्रतिनिधियों का चुनाव –

* प्रधान चुनाव –  प्रधान चुनाव ग्राम के सदस्यों के द्वारा निर्वाचित प्रणाली के द्वारा ही सम्पन्न होती है । और अगर किसी वजह से प्रधान चुनाव नहीं हो पाते हैं तो सामान्य चुनाव में पंचायत के लिए 2 तिहाई और इससे कम सदस्यों को चुना जाता है और उनसे द्वारा सरकार एक प्रशासनिक समिति बनाई जाती हैं ।

* उपप्रधान चुनाव – उपप्रधान का चुनाव ग्राम पंचायत के सदस्यों में से ही किया जाता है । और यदि उपप्रधान चुनाव ना हो पाए तो उस समय नियत अधिकारी ही ग्राम के सदस्यों में से ही किसी एक सदस्य का चयन करता हैं ।

पंचायत का कार्यकाल कैसा रहता है –

ग्राम पंचायत में सभी पंचायत के सदस्यों के द्वारा ई बैठकों का आयोजन किया जाता है जिसमें सबसे पहली बैठक का गठन के दिन से 5 साल तक का कार्यकाल रहता हैं । और यदि पंचायत का कार्यकाल पूर्ण  होने के 6 महिने बाद भंग कर दिया जाता हैं । तो इस पंचायत का फिर से गठन कराया जाता हैं । अब इस नवनिर्वाचित ग्राम पंचायत का कार्यकाल बाकि बचे हुए 5 साल के लिए ही होता है ।

ग्राम पंचायत की बैठक –

सभी पंचायती राज को स्थानीय निवासियों के रूप में स्थापित किया जाता हैं और इस दशा में पंचायतों में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकों का भी आयोजन किया जाता हैं । और इसका भी एक विशेष महत्व होता हैं । 73वें संशोधन के बाद जो पंचायत व्यवस्था लागू की गई हैं उसमें ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सभी बैठकों का आयोजन वैधानिक रूप से आवश्यक माना जाता हैं ।

ग्राम पंचायत की बैठक से संबंधित कार्यवाही –

ग्राम पंचायत की बैठक का हर माह होना जरूरी होता है और इन‌ बैठक का आयोजन पंचायत घर में ही किया जाता हैं । और इन बैठकों के बीच दो माह से अधिक का अंतराल भी नहीं होना चाहिए ।

* पंचायत की बैठक की सूचना देने के लिए एक निश्चित तारीख के 5 दिन पहले एक लिखित नोटिस सदस्यों को दिया जाना जरूरी होता है ।

* प्रधान पंचायत की होने वाली बैठक की अध्यक्षता करेंगे और इससे संबंधित समय, स्थान और तारीख भी वो ही तय करेंगे । और अगर बैठक के दौरान प्रधान या उप प्रधान अगर दोनों हाजिर ना हो तो प्रधान बैठक में उपस्थित किसी भी सदस्य को बाकी सभी सदस्य बैठक की अध्यक्षता के लिए चुन सकते हैं ।

* बैठक के दौरान बैठक में सभी सदस्यों की एक तिहाई संख्या होना आवश्यक होता है । इसे कोरम कहते हैं । इन सभी सदस्यों में प्रधान और उपप्रधान को मिलाकर सभी सदस्यों की संख्या 18 होनी चाहिए और अगर बैठक में सदस्यों की संख्या 6 हैं तो भी बैठक का आयोजन किया जा सकता है । और अगर कोरम के ना होने पर अगर सदस्यों की संख्या कम है तो बैठक नहीं हो सकती है अब पुनः बैठक का गठन करने के लिए प्रधान को फिर से नोटिस देना होगा।

* अगर किसी कारण से 15 दिन के अंदर प्रधान बैठक नहीं बुलाता है तो ए.डी.ओ. पंचायत के द्वारा भी बैठक का आयोजन कर सकता है ।

* बैठक के दौरान जो भी कार्यवाही होगी वो सब एक रजिस्टर पर नोट किया जाता है और इस रजिस्टर को ” ऐजेन्डा रजिस्टर कहते हैं ।

ग्राम प्रधान के कार्य –

* ग्राम सभा की बैठक के बारे में सभी को सूचित करना और बैठक की कार्यवाही को नियंत्रित करना ।

* ग्राम पंचायत में चल रही विकास संबंधी योजनाओं, कार्य और निर्माण के साथ साथ बाकि के कार्यक्रम की जानकारी एकत्रित करना ।

* पंचायत प्रशासन व्यवस्था और पंचायत की आर्थिक व्यवस्था की देखभाल और इससे संबंधित सूचना गांव तक पहुंचाना ।

* पंचायत से संबंधित रजिस्टर का रख रखाव करना और पंचायत के कर्मचारियों की देखभाल करना ।