Gateway of India ka Nirman kab Hua l Gateway of India का निर्माण कब हुआ था ?

Gateway of India मुम्बई का सबसे स्मारक हैं Gateway of India ka Nirman kab Hua 20वीं शताब्दी में किया गया था। इसकी आधारशिला 31 मार्च 1911 में रखी गई थी । Gateway of India ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है । यह स्मारक पंचम किंग जार्ज और महारानी मैरी के मुम्बई आगमन के अवसर पर उन्हें सम्मानित करने के लिए बनवाया गया विशाल स्मारक था ।

इस स्मारक का निर्माण अपोलो बंदर पर जो कि मेल जोल के लिए एक लोकप्रिय स्थान है इस स्मारक को ब्रिटिश वास्तुकार जार्ज विटेट ने डिजाइन किया था । Gateway of India की आधारशिला मुम्बई के पार द्वारा 31 मार्च 1913 को रखी गई थी । इस स्मारक की ऊंचाई 26 मीटर ऊंचा है तथा इसमें 4 मीनारें भी बनाई गई तथा पत्थरों पर खोदी गई बारीक पच्चीकारी की गई है । इस स्मारक केवल गुम्बद निर्मित करने में 21 रु.लाख रूपए खर्च हुए थे । Gateway of India सासैंनिक शैली में निर्मित भवन है ।

Gateway of India ka Nirman kab Hua l Gateway of India का निर्माण कब हुआ था ?
Gateway of India

History: Gateway of India का इतिहास

Gateway of India के ऊपर एक शिला लेख लिखा है ” 1911 में अपने शाही मजिस्ट्रेट राजा जार्ज पंचम और रानी मैरी के भारत में उतरने की स्मृति में बनाया गया “। जिस स्थान पर Gateway of India बनाया गया है उस जगह पर पहले मछली पकड़ने का काम होता था । और उससे पहले उस जगह पर मुम्बई आने वाले लोग नाव से उतरते थे । देश की स्वतंत्रता के बाद भारत को छोड़ने वाली अंतिम ब्रिटिश सरकार की पहली बटालियन 28 फरवरी 1948 में ब्रिटिश सरकार के अंत का संकेत देते हुए एक समारोह के चलते Gateway से गुजरी थी ।

Design: Gateway of India की डिजाइन

Gateway of India को scotis वास्तुकार जार्ज विटेट ने डिजाइन एक बड़ा गेट बना है जिसकी ऊंचाई लगभग 20 मीटर है । इस स्मारक का डिजाइन हिन्दू और मुस्लिम स्थापत्य शैली का संयोजन मना जाता है क्योंकि इसका मेहराब यानि बड़ा गेट मुस्लिम शैली का है और इसकी सजावट हिन्दू शैली की है । Gateway of India पीले बेसाल्ट और कंक्रीट से बनाया गया है । Gateway of India का केन्द्र बिन्दु गुंबद का व्यास 48 फीट और इसकी उच्चतम बिंदु जमीन से 83 फीट ऊपर है । Gateway of India के दोनों तरफ 600 लोगों के हिसाब के दो बड़े hole भी बनाते गए हैं ।

Importance: Gateway of India का महत्व

Gateway of India को एक प्रतीक स्मारक माना जाता है जो मुम्बई शहर का प्रतिनिधित्व करता है । Gateway of India होटल ताजमहल के सामने ही स्थित है । अंग्रेज भारत में Getway of India को शक्ति और महिमा का प्रतीक भी माना जाता है । Gateway of India के सामने की तरफ छत्रपति शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा भी है । और इस प्रतिमा का अनावरण 26 जनवरी 1961 में भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुआ था । तथा Gateway of India के पास ही दूसरी मूर्ति स्वामी विवेकानंद की है , जिसको एक भारतीय मूर्तिकार सीताराम एस आरके के द्वारा बनाईं गई थी ।

Gateway of India एक पर्यटक स्थल है

Gateway of India मुम्बई का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है तथा यह स्थान स्थानीय लोगों और फ्रोटोग्राफरों का एक लोकप्रिय स्थान है । हर दूसरे सेकेंड इस स्मारक को छूती समूद्री लहरों को देखना और महसूस करने का जो अनुभव होता है उसकी बात ही निराली है । इस स्थान का हर शाम का नजारा कमाल का होता है । यह स्थल कबूतरों का मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है । संगीत और नृत्य का Elephanta festival जो पहले Elephanta की गुफाओ में मनाया जाता था , पर जगह की कमी के कारण 2012 में महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के द्वारा उस Festival को Gateway of India पर स्थानांतरित कर दिया गया था । क्योंकि Gateway of India 2,000 से 2,500 लोगों तक की मेजबानी कर सकता है ।

इस स्मारक का नाम Gateway of India क्यों रखा गया ?

क्योंकि अरब सागर से जो जहाज आते थे वह यही आकर रूकते थे और यही से वह भारत में प्रवेश करते थे । मतलब कि इसे  भारत में प्रवेश करने के Symbol के रूप में जाना जाता था इसलिए इसका नाम Gateway of India रखा गया ।

Gateway of India और India Gate के बीच का अंतर –

India Gate और Gateway of India दोनों ही भारत की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इसलिए दोनों जगहों पर हमेशा ही पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। India gate और Gateway of India दोनों की पहचान करने में विदेशी ही नहीं बल्कि भारत में भी लोग अक्सर भ्रमित हो ही जाते हैं । आपको बता दें ये दोनों अलग अलग ही है और दोनों ने का अपना अपना अलग इतिहास है आइए आज इन दोनों के बारे में जानते हैं –

* India gate –

India gate दिल्ली के राजपथ क्षपर स्थित है । तथा India Gate का निर्माण अखिल भारतीय युद्ध के द्वारा किया गया है । इसे प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्धों में शहीद हुए लगभग 90 हजार भारतीय सैनिकों की याद में अंग्रेजों के द्वारा बनवाया गया था । जिन्होंने ब्रिटिश सेना की ओर से उन युद्धों में भाग लिया था । India gate का निर्माण 1931 में किया गया था। तथा इस स्मारक को डिजाइन एडवर्ड लुटियंस ने किया था । India Gate का निर्माण लाल और पीले बहुला पत्थरों से किया गया था तथा इसकी ऊंचाई करीब 43 मीटर है । India Gate को Kingsway  भी कहा जाता है। इस स्मारक पर 13220 सैनिकों के नाम भी लिखे हुए हैं ।

India Gate और Gateway of India के बीच क्या अंतर है –

1. India Gate भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है और Gateway of India भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित है ।

2. India Gate को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय शहीदों की याद में बनवाया गया था इसलिए इसे युद्ध स्मारक भी कहा जाता है । जबकि Gateway of India को ब्रिटिश सम्राट जार्ज पंचम और क्वीन मैरी के आगमन के उपलक्ष्य में बनवाया गया था ।

3. India Gate की ऊंचाई 43 मीटर है और Gateway of India की ऊंचाई 26 मीटर है ।

4. India Gate को एलवर्ड लुटियंस ने डिजाइन किया था, और Gateway of India को जार्ज विटेट ने डिजाइन किया था ।

5. India gate का निर्माण 10 फरवरी 1921 में  शुरू हुआ था , और Gateway of India का निर्माण 31 मार्च 1911 में शुरू हुआ था ।

6. India gate का कार्य 1931 में पूरा हुआ था, और Gateway of India का काम 1924 में पूरा हुआ था ।

7. India gate का निर्माण लाल और पीले बलुआ के पत्थरों से हुआ था, और Gateway of India का निर्माण बेसाल्ट के पत्थरों से हुआ था ।

8. India gate स्मारक को पेरिस के Ark of trayamf से प्रभावित होकर बनाया गया था। और Gateway of India स्मारक को Roman Traymfal arkऔर गुजरात के सोलहवीं शताब्दी की वास्तुकला पर आधारित है ।

इससे हमें पता चला कि इन दोनों स्मारकों की अपनी एक अलग पहचान है । पर दोनों स्मारकों में एक बात समान है कि दोनों ही स्मारक बहुत ही आकर्षक और भव्य इमारतें हैं और दोनों ही जगह पर्यटकों का हमेशा ही तांता लगा रहता है ।

भारत का द्वार किसे कहा जाता है ? Bharat ka Dwar kise kaha Jata hai

Gateway of India को भारत का द्वार भी कहा जाता है। पहले Gateway of India का उपयोग पश्चिम से आने वाले अतिथियों के आगमन बिन्दु के रूप में किया जाता था पर परेशानी ये थी कि जब 1947 में ब्रिटिश राज समाप्त हुआ तब इसे एक उप निवेश का प्रतीक बना दिया गया था , जो कि एक प्रकार से स्मृति लेख ही बन गया । पर जब ब्रिटिश शासन का अंतिम जहाज यहां से रवाना हुआ था  तब से ही इस स्मारक ने अपनी एक अलग पहचान बनाई । और आज यह पूरे भारतीय में एक प्रतीक माना जाता है जहां ढेरों स्थानीय निवासी और नागरिक आते हैं ।

Gateway of India को विशाल अरब सागर की तरफ बनाया गया है जोकि मुम्बई शहर का आकर्षण एक अन्य आकर्षण मरीन ड्राइव से जुड़ा हुआ है, यह मरीन ड्राइव एक सड़क है जो कि समुद्र के समानांतर चलती है । Gateway of India की भव्यता रात के समय देखने लायक होती है जब इसकी विशाल भव्यता समुद्र में दिखाई देती है ।

इसी भव्यता को देखने के लिए यहां दुनिया भर से लाखों लोग आते हैं तथा यह स्थान मुम्बई के स्थानीय लोगों की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण स्थान है । यह शहर संस्कृति को भी परिभाषित करता है जो कि ऐतिहासिक और आधुनिक सांस्कृतिक के परिवेश का एक अनोखा संगम है ।

Gateway of India के बारे में कुछ रोचक बातें –

* मुम्बई के कोलाबा में स्थित Gateway of India सरसेनिक वास्तुशिल्प कि एक अद्भुत उदाहरण है जिसकी ऊंचाई लगभग आठ मंजिलों के समान है ।

* Gateway of India के समीप ही एक समुद्र भ्रमण हेतु नौका सेवा भी उपलब्ध है जो इसकी सुन्दरता को और भी निखर देती है ।

* Gateway of India के गुम्बद निर्माण हेतु 21 लाख रूपए का खर्च आया था, और पूरे Gateway of India के  निर्माण में लगभग 2.1 मिलियन की लागत लगी थी ।

* भारत की स्वतंत्रता के बाद अंतिम ब्रिटिश सेना इसी से होकर वापस यूरोप गई थी ।

* छत्रपति शिवाजी महाराज और स्वामी विवेकानंद की मूर्तियों को बाद में Gateway of India पर स्थापित किया गया था ।

* Gateway of India को मुंबई में ताजमहल के रूप में जाना जाता है ।

* Gateway of India में देश के तीन प्रमुख आतंकवादी हमले हुए हैं जो 2003 और 2008 में मुम्बई के ताजमहल होटल और अन्य प्रमुख स्थानों पर हुए थे ।

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