गरीबी | Garibi | Poverty

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गरीबी वह अवस्था है, जिसमें कोई इन्सान अपने जीवन की जरुरत को पूरा नहीं कर पाताहै, जैसे- खाना, पानी, कपड़े और घर का न होना गरीबी कहलाता है। जिन लोगों की आय गरीबी रेखा से नीचे होती है, वो गरीब होते हैं और उनका जीवन बहुत कठिनाई से गुजरता है।

एक गरीब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पता और अपने परिवार में किसी का भी भविष्य सुरक्षित नहीं रख पाता। वर्ल्ड बैंक की 2013 की रिपोर्ट के हिसाब से दुनिया की 10% आबादी 1.9 dollar/day, यानि कि 121 रुपये प्रति दिन से भी कम आय में गुजर-बसर कर रही थी। यह आंकड़ा 2012 में 12.4% था और 1990 में 35% था।

1990 के बाद से लगभग 100 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आएं हैं। 2013 में 76 करोड़ लोग 121 रुपये से नीचे की आय में जीवन व्यतीत करते थे, वहीं 1990 में यह संख्या 185 करोड़ की थी। मगर सभी देशों में लोग गरीबी से बराबर रूप से बहार नहीं आएं हैं। कुछ देशों में गरीबी कम हुई है, तो कुछ देशों में कम नहीं हुई। आज भी गरीबों की कुल आबादी में से आधी से ज्यादा आबादी अफ्रीका में रहती है।

कारण

लोगों को सही शिक्षा नहीं मिलने की वजह से सही नौकरी नहीं मिलती और वो धीरे-धीरे और गरीब होने लगते हैं। शिक्षा और गरीबी दोनों एक दूसरे की वजह हैं, गरीबी की वजह से लोग शिक्षित नहीं हो पाते और शिक्षित न होने की वजह से वो गरीब बन जाते हैं। जिस जगह पर साधन कम और लोग ज्यादा होते हैं, वहाँ पर लोगों को आसानी से रोजगार नहीं मिलता और गरीबी बढ़ने लगती है।

जिस देश में गरीबी ज्यादा होती है, उस देश का आगे बढ़ना बहुत मुश्किल होता है। भारत के गरीब होने की एक वजह यह भी है कि भारत बहुत सालों तक अंग्रजों का गुलाम रहा था और यह तो सब जानते हैं, कि अगर कोई देश किसी दूसरे देश का गुलाम बन जाता है, तो वह गरीब होने लगता है। यह कारण भारत की गरीबी का एक मुख्य कारण भी है।

प्रभाव

  • गरीब लोगों को हमेशा जीवित रहने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • कम गुणवत्ता वाला खाना ‘खराब पोषण’ की ओर ले जा सकता है।
  • मनपसंद पेशे के लिए गरीब लोगों को स्वतंत्रता कम मिलती है।
  • गरीबी अत्यधिक कठिनाई में रहने वाले लोगों के आत्म-सम्मान को प्रभावित कर सकती है।
  • गरीबी से भी तनाव पैदा होता है, जो लोगों के रिश्ते को प्रभावित करता है।

गरीबी का हल

  • नौकरी के अवसरों को बढ़ाकर गरीबी परकाबू पाया  जा सकता है।
  • इससे बेरोजगारी की दर कम हो जाएगी और अर्थव्यवस्था में गरीबी में कमी का परिणाम देखने को मिल सकता है।
  • सरकार को उन सामाजिक संस्थानों में पैसा खर्च करते समय दान, ट्रस्ट और कुछ पारदर्शिता की दिशा में अधिक कदम उठाने चाहिए।
  • शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जाना चाहिए और स्कूलों में अधिक बच्चों को लाने के लिए पहल की जानी चाहिए।