पानीपत का पहला युद्ध | Panipat Ka Pehla Yuddh | First Battle of Panipat in Hindi

0
127
पानीपत का पहला युद्ध
तिथि 21 अप्रैल 1526
स्थान पानीपत, हरियाणा, भारत
परिणाम दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी की पराजय और दिल्ली पर मुगल शाशन की स्थापना

 

पानीपत का पहला युद्ध मुगल साम्राज्य को स्थापित करने के लिए उत्तरी भारत में 11 अप्रैल सन. 1526 को लड़ा गया। पानीपत का ये युद्ध दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी और अफगानी शासक मोहम्मद बाबर के बीच लड़ा गया। इतिहास का यह प्रथम युद्ध था जिसमें आधुनिक तोपें और बंदूकों का प्रयोग हुआ। बाबर ने अपने शाशन को भारत पे स्थापित करने की इच्छा को अंजाम देते हुए भारत पर आक्रमण किया और इब्राहीम को युद्ध में मारकर मुगल साम्राज्य को भारत में स्थापित किया।

युद्ध

नवम्बर सन. 1517 को दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी की मृत्यु के पश्चात उनकी संतान इब्राहीम लोदी को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया। उन दिनों भारत निजी स्वार्थ और आपसी मतभेदों जैसी परिस्थितियों से गुजर रहा था। इन विपरीत परिस्थितियों के चलते अफगानी शाशक बाबर का ध्यान भारत की ओर आकर्षित हुआ। मुगल शाशन को दिल्ली पर स्थापित करने के लिए 5 जनवरी सन. 1526 को बाबर भारत की ओर कूच कर गया। जब यह सुचना इब्राहीम लोदी को मिली तो उन्होंने अपने हिसार के सहयोगी शेखदार हमीद खाँ को सेना सहित बाबर को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने के लिए भेजा। उधर बाबर को यह सुचना मिलने पर उसने अपनी संतान हुमांयु को हमीद खाँ से युद्ध करने के लिए भेज दिया। हुमांयु ने युद्ध में अपना रणकौशल दिखाते हुए हमीद खाँ को परास्त कर दिया। हुमांयु की इस विजय से बाबर बहुत प्रशन्न हुआ, उसने अपनी सेना के साथ अंबाला के निकट शाहाबाद मारकंडा में अपना डेरा डाल दिया। बाबर को जब अपने दूत से पता चला कि दोबारा सुल्तान लोदी की तरफ से उनका सहयोगी दौलत खाँ लोदी उनसे युद्ध करने के लिए आ रहा है, तो बाबर ने अपनी ओर से मेहंदी ख्वाजा को अपनी सेना की एक टुकड़ी के साथ युद्ध करने के लिए भेजा। हुमांयु की तरह मेहंदी ख्वाजा ने भी अपना बेहतरीन रणकौशल दिखाते हुए इस युद्ध के निर्णय को अपने पक्ष में कर लिया और दौलत खाँ लोदी को इस युद्ध में परास्त कर दिया। उसके उपरांत बाबर ने इस युद्ध का निर्णायक फैसला करने के लिए अपने पूरे सैन्यबल के साथ दिल्ली की ओर कूच किया। उधर इस सुचना को पाकर इब्राहीम लोदी भी अपने पूरे सैन्यबल के साथ दिल्ली से चल दिया। 11 अप्रैल सन. 1526 को पानीपत के युद्ध स्थल पर दोनों तरफ की सेनाएँ आमने सामने युद्ध के लिए आ खड़ी हुईं। इस युद्ध में बाबर के सैनिकों की संख्या “बाबरनामा” के अनुसार 12,000 थी और इब्राहिम लोदी के सैनिकों की एक लाख जिसमें अलग से एक हज़ार हाथी भी शामिल थे। इब्राहीम लोदी का सैन्य बल बाबर के सैन्य बल से बहुत अधिक था लेकिन बाबर के हथियार, तोपों, बंदूकों और रणनिति के आगे बहुत कम। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ था, जब किसी युद्ध में हथियार, तोपों और बंदूकों का इस्तेमाल किया गया हो। दोनों सेनाओं की तरफ से भयंकर युद्ध लड़ा गया, परन्तु इब्राहीम की कमज़ोर रणनिति और बाबर की तुलुगमा युद्ध निति के आगे इब्राहिम और बाबर के इस युद्ध का जल्द ही निर्णय हो गया। युद्ध में सभी सेनिकों सहित इब्राहीम लोदी भी सहीद हो गए।

बाबर की इस युद्ध में विजय प्राप्त करने से भारतवर्ष में लोदी वंश का अंत हो गया और मुगल वंश का दौर प्रारंभ हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here