फांसी से वापसी

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शहंशाह अकबर और उनकी बेगम साहिबा घर में आपस में बातचीत कर रहे थे।

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा बोली – हमने अक्सर दरबार में आपको बीरबल की तरफदारी करते देखा है।

शहंशाह अकबर बोले अपनी बेगम साहिबा से – हम आपको कितनी बार समझा चुके हैं कि हमारे सभी वजीरों में बीरबल सबसे होशियार है।

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा बोली – मान सिंह भी होशियार हैं, पर आप हमेशा नजर अंदाज करते हैं। ये जानते हुए भी, वो हमारे भाई हैं।

शहंशाह अकबर बोले अपनी बेगम साहिबा से – एक बादशाह को अपने सबसे अकलमंद वजीर पर निर्भर रहना पड़ता है। और हमारे दरबार में ऐसे वजीर हैं। बीरबल…..! मान सिंह बेशक आपके भाई हैं, पर ज्यादातर बीरबल की राय सही होती है।

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा बोली – ये आप कैसे कह सकते हैं….. ? कि मान सिंह बीरबल जितने होशियार नहीं हैं। हम जानते हैं कि एक मौका मिलने पर मान सिंह बीरबल से ज्यादा नहीं तो, बीरबल की तरह अपनी होशियारी दिखा सकते हैं। उन्हें एक मौका तो दीजिये…..!

शहंशाह अकबर बोले अपनी बेगम साहिबा से – ठीक है, हमारे पास एक तरकीब है। हम उन दोनों को एक दौरे पर भेजेंगे और हमें यकीन है कि बीरबल की वजह से ही दोनों कामयाब लौटेंगे। इससे आपको भी यकीन हो जायेगा कि बीरबल के बारे में हमारी राय सही है। हम बीरबल और मान सिंह कल सुबह ही ईरान के लिए रवाना होने को कहेंगे।

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा बोली – ईरान, पर क्यों ?

शहंशाह अकबर बोले अपनी बेगम साहिबा से – उनके वापस लौटने पर, हम तुम्हें बताएँगे।

शहंशाह अकबर दरबार में गए और बोले……!

शहंशाह अकबर दरबार में बोले – बीरबल और मान सिंह…..! हम चाहते हैं कि आप दोनों ईरान जाये। शाही ईरान के लिए, हमारा ये पैगाम लेकर हम उनके लिए कुछ तोहफे भी भेजना चाहते हैं । इसलिए हमने अपने सबसे भरोसेमंद वजीरों को भेजने का फैसला किया है।

बीरबल और मान सिंह बोले अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह…….!

मान सिंह बोला अकबर से – हुजूर……! इस सम्मान के लिए आपका बहुत…. बहुत….. शुक्रिया…..! मैं आपको यकीन दिलाता हूँ, हम आपका मान जरुर रखेंगे।

बीरबल बोला अकबर से – हमें कब निकलना होगा। हुजूर……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल और मान सिंह से – हम चाहते हैं कि आप आज ही रवाना हो जाये। शाही ईरान के साथ कुछ दिन बिताकर उनका जबाब लेकर लौटे।

बीरबल और मान सिंह बोले अकबर से – जैसी आपकी मर्जी……। जहाँपनाह…….!

बीरबल और मान सिंह शाही ईरान के दरबार पहुँच जाते हैं।

बीरबल और मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – आदाब हुजूर…..!

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – हुजूर……! मैं मान सिंह और ये हैं बीरबल…..! हम बादशाह अकबर के राजदूत हैं।

ईरान के शहंशाह बोले मान सिंह से – हमारी खुश किस्मती है कि आज हमारे दरबार में अजीज दोस्त बादशाह सलामत अकबर वजीर मौजूद हैं। हम जानते हैं वजीर, मान सिंह जी…..! कि आप बादशाह अकबर के रिश्तेदार हैं। राजा बीरबल के किस्से तो हमारे दरबार में भी मशहूर हैं।

बीरबल और मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – शुक्रिया जहाँपनाह…….!

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – हुजूर……! हम शहंशाह अकबर की ओर से आपके लिए पैगाम लाये हैं।

मान सिंह ने पैगाम ईरान के दूत को दिया और पैगाम ईरान के दूत ने ईरान के शहंशाह को दिया। और ईरान के शहंशाह ने पैगाम को देखा तो बोले……!

ईरान के शहंशाह बोले – हमें शहंशाह के पैगाम पर यकीन नहीं आ रहा है। वो चाहते हैं, कि हम इन दोनों को फांसी पर लटका दें।

ईरान के शहंशाह बोले अपने दूत से – क्या किया जाये…. ?

ईरान का दूत बोला अपने शहंशाह से – हुजूर……! बादशाह सलामत ने खुद आपके लिए पैगाम भेजा है, इसलिए हमें लगता है कि उनकी दरखास्त मान लेनी चाहिए।

ईरान के शहंशाह बोले अपने दूत से – पर हम, इनका गुनाह भी तो नहीं जानते। और इन्हें सजा देने के लिए, यहाँ पर क्यों भेजा गया ?

ईरान का दूत बोला अपने शहंशाह से – हुजूर…..! मुझे यकीन है, कि कोई वजह जरुर होगी। इसलिए जहाँपनाह…….! ने अपने देश में ही सजा नहीं दी। शायद उन्हें बगावत का डर होगा। क्योंकि, ये दोनों ही अपने मुल्क में बहुत मशहूर हैं।

ईरान के शहंशाह बोले अपने दूत से – हमारे ख्याल से आप सही फरमा रहे हो। हमारे पास ओर कोई रास्ता भी नही है, हमें शहंशाह की मर्जी पूरी करनी पड़ेगी।

ईरान के शहंशाह बोले अपने सिपाहियों से – सिपाहियों, इन दोनों को बंदी बना लो। कल सुबह इन्हें फांसी पर लटकाया जायेगा।

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – फ…. फांसी…!

बीरबल बोले ईरान के शहंशाह से – हुजूर…..! हमें फांसी पर क्यों चढ़ाया जायेगा ?

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – हमारा गुनाह क्या है ?

ईरान के शहंशाह बोले मान सिंह और बीरबल से – हमें यकीन है कि आप अपने गुनाहों से वाकिफ हैं और ये हमारी नहीं, बल्कि आपके शहंशाह की मर्जी है।

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – मुझे यकीन है, आपको कोई गलतफहमी हुई है। हुजूर…..! बादशाह ऐसा नहीं कर सकते।

ईरान के शहंशाह बोले मान सिंह से – अफ़सोस…..! हमें कोई गलतफहमी नहीं हुई है। आप शहंशाह का जो पैगाम हमारे पास लाये हैं।, इसमें साफ-साफ आप दोनों की सजा लिखी हुई है।

ईरान के शहंशाह बोले अपने सिपाहियों से – सिपाहियों, ले जाओ इन्हें।

और ईरान के दो सिपाही बीरबल और मान सिंह को बंदी बनाकर ले जा रहे थे, तो मान सिंह बोला…..!

मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – हुजूर… हुजूर…..! मेरी बात सुनिए। मुझे यकीन है, आपको कोई गलतफहमी हो रही है। हमारी जान बख्श दीजिये। हुजूर…… हुजूर…..!

मान सिंह इसी तरह कहता हुआ जा रहा था। बीरबल और मान सिंह को फांसी हो, तब तक उन दोनों को जेल में बंद कर दिया।

मान सिंह बोला जेल के अंदर – मुझे यकीन नहीं होता। ये नहीं हो सकता। मैं मरना नहीं चाहता। हमारा गुनाह क्या है ?

बीरबल उसकी बातों को सुनते रहे और बीरबल इस फांसी से बचने के लिए कुछ सोच रहे थे। तो मान सिंह बोला बीरबल से…..!   

मान सिंह बोला जेल के अंदर बीरबल से – हमें कल फांसी लगने वाली है और तुम्हें कोई फिक्र भी नहीं। क्या तुम्हें डर नहीं लगता ? जब सजा सुनाई जा रही थी, तुमने एक शब्द भी नहीं कहा….!

बीरबल बोले जेल के अंदर मान सिंह से – शांत रहिये। मान सिंह जी…..! यकीन मानिये। हमें कुछ नहीं होगा।

मान सिंह बोला जेल के अंदर बीरबल से – क्या मतलब कुछ नहीं होगा ? क्या तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा ? हमें कल फांसी लगने वाली है। हम कल मरने वाले हैं।

बीरबल बोले जेल के अंदर मान सिंह से – मान सिंह जी…..! धीरज रखिये। मैं आपको यकीन दिलाता हूँ। हम इस मुसीबत से जरुर निकलेंगे। वो भी जिन्दा…..! मैं सिर्फ, ये जानना चाहता हूँ। बादशाह सलामत ने ऐसा क्यों किया ?

मान सिंह बोला जेल के अंदर बीरबल से – तुम्हारा दिमाग ख़राब है, बादशाह ने ऐसा क्यों किया ? तुम्हें इस बात कि चिंता है, जबकि हमें मुसीबत से निकलने के तरीके सोचने चाहिए।

बीरबल बोले जेल के अंदर मान सिंह से – मेरा यकीन कीजिये। हम कल सुबह तक आजाद हो जायेंगे। पर जैसा मैं कहूँ, वैसा ही करना होगा। सुनिए…..!

बीरबल ने बताया मान सिंह को – हमारा एक ही तरीका है, यहाँ से बचने का….! तुम कहना मुझे दो फांसी….! मैं कहूँगा। मुझे दो फांसी…..!

और अगला दिन सुबह हुई। बीरबल और मान सिंह को दो सिपाही जेल से फांसी के फंदे पर ले गए।

बीरबल बोले ईरान के शहंशाह से – पहले मुझे फांसी दीजिये। हुजूर…..!

मान सिंह बोला ईरान के शहंशाह से – नहीं हुजूर……! पहले मुझे फांसी दीजिये।

बीरबल बोले ईरान के शहंशाह से – नहीं…नहीं हुजूर…..! पहले मैंने दरख्वास्त दी थी। मुझे पहले लटकाये…!

और ईरान के शहंशाह और उनके मंत्री बीरबल और मान सिंह कि तरफ देखने लगे।

मान सिंह बोला ईरान के शहंशाह से – नहीं, मैं शहंशाह का रिश्तेदार हूँ। पहले फांसी मुझे दी जाये।

बीरबल बोले मान सिंह से – आप जहाँपनाह…….! के साले साहब हैं, तो क्या हुआ ? मैं उनका सबसे भरोसे मंद वजीर हूँ। पहले फांसी मुझे दी जाये।

ईरान के शहंशाह बोले – आप दोनों पागल तो नहीं हो गए हैं…..। क्या आपको डर नहीं लगता ? आप मरने के लिए, इतने बेताब क्यों हैं…. ?

बीरबल बोले ईरान के शहंशाह से – डरना क्यों ? हुजूर….! ऐसे इनाम के लिए, तो हम खुशी से मरने के लिए तैयार हैं।

ईरान के शहंशाह बोले बीरबल से – इनाम कैसा इनाम…. ?

बीरबल बोले ईरान के शहंशाह से – हुजूर….! हमारे दरबार राजपुरोहित ने ऐलान किया था कि आज यहाँ पर पहली फांसी जिसको दी जाएगी, वो अगले जन्म में ‘शाह’ बनेगा और जिसको बाद में मिलेगी वो ‘प्रधानमंत्री’।

ईरान के शहंशाह बोले बीरबल से – ये कैसे हो सकता है…. ? ये सच नहीं हो सकता।

मान सिंह बोला ईरान के शहंशाह से – ये सच है। हुजूर…..! हमारे राजपुरोहित कभी गलत नहीं साबित हुये। और बोला मान सिंह….! पहले मुझे फांसी पर लटका दीजिये हुजूर……!

ईरान का दूत बोला अपने शहंशाह से – हुजूर…..! मेरे ख्याल से, हमें एक बार फिर सोच लेना चाहिए। इनकी बातें तो सच लगती हैं।

ईरान के शहंशाह बोले अपने दूत से – हाँ…. पर, अब हमें क्या करना चाहिए ? मुझे बिना नाराज किये। हम उनका खत कैसे टाल सकते हैं ?

ईरान का दूत बोला अपने शहंशाह से – आप, इन दोनों के साथ पैगाम भेज सकते हैं । बिना इन दोनों का जुर्म जाने आप इन्हें फांसी पर नहीं लटका सकते। इस तरह इसका जिम्मा वापस शहंशाह पर ही डाल दें।

ईरान के शहंशाह बोले अपने दूत से – तुम सही फर्मा रहे हो। हमें ऐसा ही करना होगा।

ईरान के शहंशाह बोले बीरबल और मान सिंह से – आप दोनों आजाद हैं। हमें कुछ गलतफहमी हो गई थी। आप दोनों हमारा पैगाम लेकर जहाँपनाह…….! के पास लौट जायें।

बीरबल और मान सिंह बोले ईरान के शहंशाह से – जैसी आपकी मर्जी हुजूर…..!

बीरबल और मान सिंह अपने देश शहंशाह अकबर के दरबार पहुँच गए। और बोले……!

बीरबल और मान सिंह बोले शहंशाह अकबर से – आदाब….. जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल और मान सिंह से – आपका स्वागत…..है। कैसी रही आपकी यात्रा ?

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – अच्छी रही हुजूर…..! शुक्रिया…

शहंशाह अकबर बोले बीरबल – अच्छा…. अच्छा बीरबल…..! हमने अपनी हार मान ली। बताइए…! आपने उस मुसीबत का सामना कैसे किया ?

मान सिंह बोला शहंशाह अकबर से – जी हुजूर……! हमें बताइए कि उस मुसीबत में हमें क्यों डाला गया ? हमारी गलती क्या थी ?

शहंशाह अकबर बोले मान सिंह से – कोई गलती नहीं थी। हम आपका इम्तिहान ले रहे थे। मगर हम ये जानने के लिए बेचैन हैं कि आप वापस कैसे लौटे….?

मान सिंह बोला शहंशाह अकबर से – हुजूर…..! बीरबल की होशियारी की वजह से आज हम जिन्दा हैं।

और मान सिंह ने आपबीती ईरान की कहानी बताई शहंशाह अकबर को……..! और शहंशाह अकबर बात सुनकर हँसने….. लगे। और बोले…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल और मान सिंह से – हम माफी चाहते हैं। आप दोनों को मुसीबत में डालने के लिए….! पर यकीन कीजिये। हमने एक सिपाही के साथ दूसरा पैगाम भी भेजा था। वो पैगाम शाही ईरान को दिया जाता, आपको फांसी से बचाने के लिए।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…! आपने फिर साबित कर दिया, कि आपको कोई मात नहीं दे सकता। आप किसी भी मुसीबत का होशियारी से सामना कर सकते हैं। शाबाश बीरबल…..! शाबाश….!

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा ने बीरबल की चतुराई को देखकर बोली…..! 

शहंशाह अकबर की बेगम साहिबा बोली – शाबाश बीरबल…..!

सीख-

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चतुर और होशियार मनुष्य की परीक्षा कभीभी ली जा सकती है। हमेशा चतुर और होशियार मनुष्य ही सफलता प्राप्त करते हैं।