फारूक अब्दुल्ला की जीवनी | Farooq Abdullah Biography in Hindi

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परिचय

फारूक अब्दुल्ला भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य के एक मशहूर राजनेता हैं। वे जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र सरकार में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने समय में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन कई बार अलग हुआ और कांग्रेस समर्थक राज्यपाल सरकार भी भंग की गई। जब उनकी पार्टी ने सन 1987 में चुनाव जीता तब धांधली की भी कई अफवाहें उड़ीं थीं।

सन 1980 और 1990 के दशक में फारूक अब्दुल्ला के प्रशासन के दौरान जम्मू-कश्मीर राज्य में बेरोजगारी बढ़ी और राज्य उग्रवाद से ग्रस्त रहा, इस कारण हजारों कश्मीरियों को जान गंवानी पड़ी। इस अवधि में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह जीवन गुजारना पड़ा। फारूक अब्दुल्ला कश्मीर मसले पर अपना नजरिया भारत समर्थक के साथ-साथ स्वायत्त समर्थक के तौर पर स्पष्ट करते हैं। अपने बच्चों की शादी गैर-मुस्लिम परिवार में करके वह स्वयंभू धर्म निरपेक्षतावादी की छवि पेश करते हैं।

फारूक अब्दुल्ला अपने पिता की मृत्यु के बाद मुख्यमन्त्री बने। 

  • वे पहली बार जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री 8 सितम्बर 1982 से 2 जुलाई 1984 तक रहे।
  • दूसरी बार मुख्यमंत्री 7 नवम्बर 1986 से 19 जनवरी 1990 तक रहे।
  • तीसरी बार मुख्यमंत्री 9 अक्टूबर 1996 से 18 अक्टूबर 2002 तक रहे।

प्रारंभिक जीवन

फारूक अब्दुल्ला का जन्म 21 अक्टूबर 1937 को सौरा, श्रीनगर में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘शेख अब्दुल्ला’ तथा उनकी माता का नाम ‘बेगम अकबर जहान अब्दुल्ला’ था। उनके पिता नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के महान नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री थे और उन्हें ‘कश्मीर का शेर’ कहा जाता था। फारूक अब्दुल्ला ने सन 1930 तथा 1940 के दशक में जम्मू-कश्मीर में सामंत डोगरा शासन को समाप्त करने के लिए लगातार कार्य किया। फारूक अब्दुल्ला की पढ़ाई श्रीनगर में शेखबाग (लाल चौक) स्थित CMS ट्रायंडले बिस्को स्कूल से हुई और इसके बाद उन्होंने राजस्थान के जयपुर में SMS मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री प्राप्त की।

करिअर

फारूक अब्दुल्ला को अगस्त 1981 में नेशनल कांफ्रेंस का अध्यक्ष चुना गया। वे कई बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनके पिता ‘शेख अब्दुल्ला’ एक राष्ट्रीय नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें चिकित्सा का अभ्यास करने के लिए UK जाना पड़ा। वहाँ उनकी मुलाकात एक ब्रिटिश मूल की नर्स ‘मौली’ से हुई, जिससे उन्होंने शादी कर ली। दंपत्ति ने एक बेटा और तीन बेटियों को जन्म दिया। सन 1987 में जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। इस समय जम्मू-कश्मीर के लोगों की चिंता के कई कारण थे। बेरोजगारी और आतंकवाद हावी था, जिस पर नियंत्रण करने में फारूक अब्दुल्ला नाकाम साबित हुए। हजारों धार्मिक अल्पसंख्यक घाटी छोड़कर चले गए।

इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। सन 1987 में जब उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की, तब कांग्रेस ने भी उन पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इस अवधि के दौरान उग्रवाद चरम पर पहुंच गया और प्रशिक्षित उग्रवादियों ने भारत से पाकिस्तान तक अपना रास्ता बना लिया।

इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री की पुत्री का अपहरण हो गया। इसके चलते अब्दुल्ला सरकार को बर्खास्त कर दिया गया और राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। सन 1982 से 1984 के बीच उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान राज्यपाल जगमोहन ने उन्हें बर्खास्त कर दिया, लेकिन कांग्रेस के साथ बातचीत करके वे सन 1986 में वापस सत्ता में आए।

सन 2002 में फारूक अब्दुल्ला की सरकार चुनाव में ‘मुफ़्ती मोहम्मद सईद’ के नेतृत्व वाली INC-PDP (Indian National Congress-People’s Democratic Party) गठबंधन से हार गई। फारूक अब्दुल्ला को एक अच्छे वक्ता के तौर पर भी जाना जाता है। उनकी पार्टी भारतीय संविधान में कश्मीर की स्वायत्ता के पक्ष में है तथा नियंत्रण रेखा को अंतर्राष्ट्रीय सीमा निर्धारित करने की वकालत करती है। फारूक अब्दुल्ला दिल्ली गोल्फ क्लब, रॉयल स्प्रिंग गोल्फ कोर्स, कश्मीर एंड सेंट एंडयू स्कॉटलैंड गोल्फ क्लब के सदस्य हैं। वह जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के भी अध्यक्ष हैं।

सन 2002 के विधान सभा चुनावों में ‘उमर अब्दुल्ला’ को नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व करने के लिए चुना गया, जबकि फारूक अब्दुल्ला ने अपने राजनीतिक करियर को जारी रखने का इरादा रखा। नेशनल कॉन्फ्रेंस चुनाव हार गई, ‘उमर अब्दुल्ला’ गांदरबल की पारंपरिक पारिवारिक सीट हार गए। ‘मुफ्ती मोहम्मद सईद’ के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी की गठबंधन सरकार ने पदभार संभाला।

फारूक अब्दुल्ला को बाद में सन 2002 में जम्मू और कश्मीर से 6 साल के कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुना गया था। बाद में उन्हें 2009 में फिर से चुना गया। श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने और जीतने के बाद उन्होंने मई 2009 में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। फारूक अब्दुल्ला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हुए।

फारूक अब्दुल्ला ने 2014 के आम चुनाव में श्रीनगर लोकसभा सीट पर फिर से चुनाव लड़ा, लेकिन पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार ‘तारिक हमीद कर्रा’ से हार गए। 2017 में, उन्होंने श्रीनगर संसदीय सीट पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के ‘नजीर अहमद खान’ को हराकर बारीकी से मतदान देखा।

जीवन घटनाचक्र

  • सन 1980 में 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए।
  • सन 1982 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए और राज्य के ‘स्वास्थ्य मंत्री’ बने।
  • सन 1983 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे और मुख्यमंत्री बने।
  • सन 1987 में तीसरी बार विधानसभा का चुनाव जीता और दोबारा मुख्यमंत्री बने।
  • सन 1996 में चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य के मुख्यमंत्री बने।
  • सन 2002 में पहली बार राज्यसभा सदस्य बने।
  • सन 2008 में पाचवीं बार जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य बने।
  • सन 2009 में दूसरी बार राज्यसभा के सदस्य नियुक्त किए गए।
  • सन 2009 में 15वीं लोकसभा में दूसरी बार लोकसभा सदस्य बने।
  • सन 2009 में जम्मू व कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस संसदीय पार्टी के लोकसभा में नेता बने।
  • सन 2009 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के केंद्रीय मंत्री बने।
  • सन 2009 में जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष बने।