द्रोणाचार्य पुरस्कार | Dronacharya Award

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द्रोणाचार्य पुरस्कार आधिकारिक तौर पर खेल और खेलों में उत्कृष्ट कोचों (प्रशिक्षकों) को दिया जाता है। यह पुरस्कार ‘द्रोण’ के नाम पर रखा गया है, जिन्हें लोग “द्रोणाचार्य” या “गुरु द्रोण” के नाम से भी जानते हैं। द्रोणाचार्य प्राचीन भारत के संस्कृत महाकाव्य महाभारत का एक किरदार हैं।  द्रोणाचार्य बहुत अच्छे योद्धा और शिक्षक थे, इसी वजह से उन्हें कौरव और पांडव राजकुमारों के युद्ध कला के शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। द्रोणाचार्य पुरस्कार युवा मामलों और खेल मंत्रालय द्वारा हर साल दिया जाता है। पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं का चुनाव मंत्रालय द्वारा बनाई हुई एक समिति करती है। इस पुरस्कार में द्रोणाचार्य की एक कांस्य प्रतिमा (Bronze Statue), एक प्रमाण पत्र, औपचारिक पोशाक (Formal Dress), और 5 लाख रुपयों का नकद पुरस्कार शामिल है।

द्रोणाचार्य पुरस्कार की स्थापना 1985 में हुई थी। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है, जो लोग ओलंपिक खेलों, पैरालाम्पिक खेलों, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप क्रिकेट, स्वदेशी खेलों और पैरास्पोर्ट्स के साथ इनमें से किसी क्षेत्र में कुछ बड़ा कर चुके हो। किसी दिए गए वर्ष के लिए नामांकन 30 अप्रैल तक या अप्रैल के अंतिम कार्य दिवस तक स्वीकार किए जाते हैं। एक 10 लोगों की समिति नामांकन का मूल्यांकन करती है और बाद में वे केंद्रीय मामलों और खेल मंत्री को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत (सौंपा) करती है।

इस पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता भालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती), ओम प्रकाश भारद्वाज (मुक्केबाजी), और ओ. एम. नंबियार (एथलेटिक्स) थे, जिन्हें 1985 में सम्मानित किया गया था। आमतौर पर एक वर्ष में पांच से अधिक कोचों को यह पुरस्कार प्रदान नहीं किया जाता है।

पुरस्कार के सबसे हालिया प्राप्तकर्ता आर. गांधी (एथलेटिक्स), हीरा नंद कटारिया (कबड्डी) के साथ जी. एस. एस. वी. प्रसाद (बैडमिंटन), बृज भूषण मोहंती (मुक्केबाजी), पी. ए. रैफेल (हॉकी), संजय चक्रक्रिया (शूटिंग), और रोशन लाल (कुश्ती) जिन्हें उनके जीवनकाल के योगदान के लिए सम्मानित किया गया था।

नामांकन

पुरस्कार के लिए नामांकन सभी सरकारी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल संघों से प्राप्त होते हैं, जैसे- भारतीय ओलंपिक संघ, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया, स्पोर्ट्स प्रमोशन एंड कंट्रोल बोर्ड, और राज्य और संघ शासित प्रदेश सरकारों द्वारा हर खेल के लिए 2 कोचों को ही चुना जाता है।

क्रिकेट के मामले में, भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड से नामांकन प्राप्त होते हैं, क्योंकि क्रिकेट का सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई राष्ट्रीय खेल संघ नहीं है। जब नामांकन करने वाली प्राधिकरणों से नामांकन प्राप्त नहीं होते, तब सरकार योग्य मामलों में दो कोचों को नामांकित कर सकती है। किसी दिए गए वर्ष के लिए नामांकन 30 अप्रैल तक या अप्रैल के अंतिम कार्य दिवस तक स्वीकार किया जाता है।