धर्म की परिभाषा 

सामाजिक विज्ञान में धर्म वो है जिसके माध्यम से मनुष्य के विचार और उसकी संस्कृति तय होती है। धर्म एक ऐसा विषय है जिसके परिप्रेक्ष्य में ही मनुष्य सारा जीवन व्यतीत करता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक धर्म का ही असर दिखता है। दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृति के हिसाब से अलग अलग धर्म स्थापित हुए हैं। मोटे तौर पर धर्म का सम्बन्ध मनुष्य की आस्था से है जिसमें वो विशेष प्रकार की पूजा और संस्कार का निर्वहन करता है।

प्राय: धर्म का अर्थ होता  है धारण करना। हिन्दू समाज में धर्म की मान्यता इस प्रकार है “ धारणात धर्ममाहुः” अर्थात् धारण करने के कारण ही किसी वस्तु को धर्म कहा जाता है। बोसांके ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा है कि ” जहाँ धर्मपरायणता, अनुशक्ति, एवं भक्ति मिलती है, वही धर्म का प्राथमिक रूप प्राप्त हो जाता है।”

धर्म की परिभाषा 

मजूमदार और मदन के मुताबिक  “धर्म किसी भय की वस्तु अथवा शक्ति का मानवीय परिणाम है, जो पारलौकिक है इन्द्रियों से परे है। यह व्यवहार की अभिव्यक्ति तथा अनुकूलन का रूप है, जो लोगों को अलौकिक शक्ति की धारणा से प्रभावित करता है।”


डॉ. राधाकृष्णन के मुताबिक “धर्म की अवधारणा के अंतर्गत हिन्दू उन स्वरूपों और प्रतिक्रियाओं को लाते हैं जो मानव-जीवन का निर्माण करती हैं और उसको धारण करती हैं।”

गिलिन के मुताबिक  ” धर्म के समाजशास्त्री क्षेत्र के अंतर्गत एक समूह में अलौकिक से संबंधित उद्देश्य पूर्ण विश्वास तथा इन विश्वासों से संबंधित बाहरी व्यवहार, भौतिक वस्तुएँ और प्रतीक आते हैं।”


फ्रेजर के मुताबिक “धर्म से मेरा तात्पर्य मनुष्य से श्रेष्ठ उन शक्तियों की संतुष्टि अथवा आराधना करना है जिनके बारे में व्यक्तियों का विश्वास हो कि वे प्रकृति और मानव-जीवन को नियंत्रित करती हैं तथा उनको निर्देश देती हैं।”


टेलर के मुताबिक “धर्म का अर्थ किसी आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास करना है।”


दुर्खीम के मुताबिक “धर्म पवित्र वस्तुओं से संबंधित विश्वासों और आचरणों की समग्रता है जो इन पर विश्वास करने वालों को एक नैतिक समुदाय के रूप में संयुक्त करती है।”


होनिगशीम  के अनुसार “प्रत्येक मनोवृत्ति जो इस विश्वास पर आधारित या इस विश्वास से संबंधित है कि अलौकिक शक्तियों का अस्तित्व है और उनसे सम्बन्ध स्थापित करना संभव व महत्वपूर्ण है, धर्म कहलाती है।”


ऑगबर्न और निम्कॉक  “धर्म मानवोपरि शक्तियों के प्रति अभिवृत्तियाँ हैं।”

धर्म की विशेषताएँ या लक्षण 

  1. शक्ति मे विश्वास:- धर्म की पहली विशेषता यह है कि यह शक्ति मे विश्वास पर आधारित है। धर्म शक्ति पर आधारित है, वह मनुष्य निर्मित न होकर प्राकृतिक होता है।


2. दिव्य चरित्र:- धर्म से जिस शक्ति में विश्वास किया जाता है, उसकी प्रकृति अलौकिक होती है। चूंकि यह चरित्र दिव्य होता है, अतः मानव समाज से परे होती है।

3. पवित्रता का पत्र:- सामाजिक जीवन के तत्वों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है- पवित्र और अपवित्र। धर्म मे सिर्फ उन्हीं तत्वों को महत्व प्रदान किया जाता है, जो पवित्रता की अवधारणा से संबंधित होते है।


4. सैद्धांतिक व्यवस्था:- सैद्धांतिक व्यवस्था भी धर्म का अनिवार्य तत्व है इसका कारण यह है कि प्रत्येक धर्म की एक सैद्धांतिक व्यवस्था होती है। इस सैद्धान्तिक व्यवस्था की सहायता से धर्म को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान किया जाता है।


5. निश्चित प्रतिमान:- प्रत्येक धर्म के कुछ निश्चित प्रतिमान होते है। ये प्रतिमान ईश्वरीय रक्षा का प्रतिनिधित्व करते है। यही कारण है कि व्यक्ति इन प्रतिमानों का आदर करता है तथा इन प्रतिमानों के आधार पर अपने व्यवहार का निर्धारण करता है।


6. मूल्यात्मक व्यवस्था:- धर्म समाज में मूल्यों की एक व्यवस्था का निर्धारण करता है। यही कारण है कि धर्म को मूल्य और भावनाओं के आधार पर समझने का प्रयास किया जाता है। तर्क और विवेक का धर्म मे कोई स्थान नहीं है।


7. धार्मिक चेतना:- प्रत्येक धर्म अपने मे धार्मिक चेतना को विकसित करता है। धार्मिक चेतना के कारण ही व्यक्ति धर्म का आदर करता है। आज संसार में जो अनेक धर्म पाए जाते है, उनका जन्म और विकास धार्मिक चेतना के कारण ही हुआ है।


8. कर्मकांड:- धर्म से संबंध की अभिव्यक्ति पूजा पाठ, प्रार्थना, या कर्मकांड के रूप में होती है। प्रत्येक धर्म की मान्यताएं, विश्वास एवं पौराणिक गाथाओं के अनुसार कर्मकांड होता है। यही वजह है कि विभिन्न धर्मों के कर्मकांडों में भिन्नता दिखाई पड़ती है।

9. धार्मिक मान्यताएं:– प्रत्येक समाज के धर्म की अपनी अलग-अलग मूल्य एवं मान्यताएं है, यही मान्यताएं धर्म को एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती हैं। यही कारण है कि लोग समस्याओं एवं कठिनाइयों में भी धर्म पर विश्वास करके साहस व धैर्य से कार्य करते हैं|

निश्चित रूप से आपको धर्म की परिभाषा समझ आई होगी, यदि आप किसी और विषय पर जानकारी चाहते हैं तो आप हमें लिख सकते हैं