दीपावली के दिन पूजन सामग्री, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त जानें

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‘दीपावली’ हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इसे रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। यह त्यौहार अध्यात्मक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। दीपावली की रात को घरों तथा दुकानों को सभी लोग दीपक, मोमबत्तियों, झालरों और बल्बों से सजाते हैं, जिससे घर तथा दुकान जगमगा उठते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस दीपावली देवी माँ लक्ष्मी की पुजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 मिनट से 7:53 मिनट तक रहेगा और प्रदोषकाल में मुहूर्त शाम 5:27 मिनट से 8:06 मिनट तक रहेगा और वृषभ काल में शाम 5:57 मिनट से 7:53 मिनट तक रहेगा।

अमावस्या तिथि आरंभ

अमावस्या तिथि का आरंभ 6 नवंबर को रात 10:27 मिनट से प्रारम्भ होकर 7 नवंबर को रात 9:31 मिनट तक रहेगा।

इस दिन देवी लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है। दीपावली की रात को प्रत्येक घर में धन की देवी लक्ष्मी, गणेश और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात में देवी लक्ष्मी खुद प्रथ्वी पर आती हैं और सभी के घर-घर जाकर घूमती हैं। जो घर हर प्रकार से साफ, शुद्ध और प्रकाश युक्त होता है, वहां देवी लक्ष्मी अंश रूप में ठहर जाती हैं, इसलिए इस दिन सभी लोग अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं।

 

दीपावली पूजन सामग्री

दीपावली के पूजन के लिए रोली, चावल, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, घी या तेल से भरे हुए दीपक, पान-सुपारी, कलावा, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए इत्यादि वस्तुएँ आप अपने पूजन सामग्री में शामिल करे, ऐसा करने से देवी माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न होगी और पूरे साल अपनी कृपा दृष्टि आपके ऊपर बनाए रखेंगी। दरअसल ये दीपावली पूजन सामग्री देवी माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं और यदि आप इस दीपावली अपने पूजन सामग्री में शामिल करते हैं तो आपके इस भक्ति और समपर्ण से माँ लक्ष्मी आपसे प्रसन्न होगी।

भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के पश्चात जब अयोध्या वापस लौटे, तो लोगों ने खुश होकर घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया। दीयों की रोशनी से पूरा गाँव जगमगा उठा और लोग खुशी में झूम उठे। उस दिन की याद में हर साल इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार ज्यादातर ग्रिगेरियन कलेंडर के हिसाब से अक्टूबर और नवम्बर के महीने में आता है।

दीपावली दीपों का त्यौहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की हमेशा जीत होती है, झूठ का हार होती है। दीपावली स्वच्छता और प्रकाश का त्यौहार है। दीपावली का त्यौहार आने से पहले ही सभी लोग अपने घरों एवं दुकानों की मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी और साफ-सफाई करने में लग जाते हैं। बाजारों और गलियों को सुन्दर रंग- बिरंगी झिलमिलाती लडियों से सजाया जाता है।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन घरों, दुकानों और व्यापारिक स्थानों में भी किया जाता है। दीपावली के दिन कर्मचारियों को उपहार और मिठाई भी दी जाती है। इसका प्रधान लक्ष्य साल भर की परीक्षा करना है। इस प्रथा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती के जुआ खेलने के प्रसंग को भी जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान शिव की हार होती है। इस दिन शाम के समय में महिला-पुरुष पूजा करने के बाद भोजन करते हैं। दीपावली की रात को जादूगर (बाजीगर) और तंत्र-मंत्र करने वाले श्मशान में जाकर अपने मन्त्रों को बोलकर मजबूत करते हैं। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर की तरंग पर शांति से सोते हैं और माता लक्ष्मी भी दानवों के भय से विमुख होकर कमल के उदर (पेट) में शांति से सोती हैं। इसलिए लोगों को सुख-शांति प्राप्ति के साथ  विधि-विधान से त्यौहार मनाना चाहिए।

दीपावली के दिन शाम को लोग मंदिरों में जाकर खील-बताशे और चिरवा आदि का प्रसाद लगते हैं और उस प्रसाद को सभी लोगों में बांटते हैं। पड़ोसी एक-दूसरे को प्रसाद और उपहार देकर भाईचारे के प्यार को निभाते हैं। दीपावली की रात को अधिकतर लोग अपने पूरे परिवार के साथ इकट्ठे होकर पटाखे, फुलझड़ियाँ, अनार आदि आतिशबाजी चलाकर दीपावली त्यौहार का आनंद लेते हैं।

दीपावली का त्यौहार एक दिन का नहीं, बल्कि कई त्योहारों का समूह है, जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से शुक्ल की दूज तक बहुत ही हर्ष-उल्लास के साथ समाप्त होते हैं। जैसे – धनतेरस, नरक चतुदर्शी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज, ये सभी त्यौहार दीपावली के आस-पास ही मनाये जाते हैं।