पंडित दीनदयाल उपाध्याय कोट्स | Deendayal Upadhyay Quotes in Hindi

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“जब स्वभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होती है।”
“स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है अगर वो हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बन जाए।”
“अवसरवाद ने राजनीति में लोगों के विश्वास को बहुत हिला कर रख दिया है।”
“भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि यह जीवन को एक विशाल रूप में देखती है।”
“मानवीय ज्ञान सभी की संपत्ति है।”
“भारत जिन मुश्किलों का सामना कर रहा है, उसका प्रमुख कारण इसकी राष्ट्रीय पहचान की उपेक्षा करना है।”
“किसी सिद्धांत को ना मानने वाले अवसरवादी हमारे देश की राजनीति को नियंत्रित करते हैं।”
“एक हज़ार वर्षों में हमने जो भी ग्रहण किया हो या वो हम पर थोपा गया हो, वह हमने अपनी स्वेच्छा से अपनाया इसलिए उसे अब छोड़ा नहीं जा सकता।”
“जिंदगी में विविधता वा बहुलता है, पर हमने हमेशा इसके पीछे की एकता को खोजने का प्रयास किया है।”
“सबसे जरुरी है कि हम हमारी राष्ट्रीय पहचान के बारे में सोचें जिसके बिना आजादी का कोई अर्थ नहीं होता।”
“धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष यह चार पुरुषार्थ की लालसा मनुष्यों में जन्म से ही होती है और विशुद्ध रूप में इनकी संतुष्टि भारतीय संस्कृति का सार है।”
“जब राज्य राजनीतिक और आर्थिक शक्तियों का अधिग्रहण कर लेता है, तो इसका परिणाम धर्म का पतन होता है।”
“अनेकता में एकता वा विभिन्न रूपों में एकता की अभिव्यक्ति ही भारतीय संस्कृति की सोच रही है।”
“नैतिकता के सिद्धांत किसी व्यक्ति द्वारा बनाये नहीं जाते बल्कि खोजे जाते हैं।”
“मानव प्रकृति में दो प्रवृत्तियां रही हैं एक तरफ क्रोध और लोभ तो दूसरी तरफ प्रेम और त्याग।”
“अंग्रेजी का शब्द ‘रिलिजन’, धर्म के लिए सही शब्द नहीं है।”
“धर्म एक बहुत ही व्यापक विचार है, जो समाज को बनाये रखने के सभी पहलुओं से सम्बंधित है।”
“धर्म के मूल सिद्धांत सत्य और सार्वभौमिक हैं, हालांकि उनका क्रियान्वयन समय, स्थान वा परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।”
“भारत में नैतिकता के सिद्धांतों को धर्म कहा जाता है।”
“20 व्यक्ति को वोट दें, बटुए को नहीं, पार्टी को वोट दें, व्यक्ति को नहीं; सिद्धांत को वोट दें, पार्टी को नहीं।”