दहेज प्रथा | Dahej Pratha | Dowry System

1137

भारत में दहेज प्रथा काफी लंबे समय से चली आ रही है। दहेज का मतलब होता है- “शादी से पहले जब लड़की के परिवार वाले अपनी ‘संपत्ति और धन’ लड़के के परिवार को दे देते हैं।” दहेज लेना या देना दोनों क़ानूनी तौर पर जुर्म है। यह प्रथा पूरी तरह से सोच पर निर्भर है। यह प्रथा लोगों की सोच को बताती है कि किस तरह हमारे समाज से पुरुषों को स्त्री से ऊपर रखा गया है।

इतना ही नहीं लोग इस प्रथा को आसानी से पैसे कमाने का तरीका समझते हैं। इसमें लड़के के परिवार वाले लड़की के परिवार वालों से पैसों की मांग करते हैं। दहेज प्रथा को हमारे समाज में लगभग हर श्रेणी की स्वीकृति मिल गई है, जो आगे चलकर एक बड़ी समस्या का रूप भी ले सकती है।

कारण

  • शादी के समय पर दहेज की बात करना।
  • दुल्हे के परिवार में आसानी से पैसे कमाने का लालच भी इसका एक बड़ा कारण है।
  • लोग अपने रुतबे को दिखाने के लिया भी दहेज मांगते हैं।
  • लड़की के परिवार का दबना- कभी-कभी लड़की के परिवार वालों को लगता है कि वह लड़की के परिवार से हैं, तो उन्हें झुककर रहना चाहिये। हालांकि, यह सोच पूरी तरह गलत है।
  • महिलाओं का दर्जा भी इसका एक बड़ा कारण है, क्योंकि लोग पुरुषों को महिलाओं से ऊपर दर्जा देते हैं। इसलिए ज्यादातर लडकियों के परिवार वाले अपने आपको कमजोर समझते हैं।
  • अगर लड़की की सुन्दरता में कोई कमी है या फिर लड़की की किसी भी कमी के कारण शादी में दिक्कत आती है, तो माँ-बाप लड़की की शादी को तुरंत करवाने की आड़ में दहेज देना आरम्भ कर देते हैं, यही बात दहेज प्रथा को हवा देती है।

नुकसान

  • इसका सबसे बड़ा नुकसान लड़की (दुल्हन) के परिवार को होता है, क्योंकि ज्यादातर लड़कियों का परिवार अमीर नहीं होता, पर उन्हें दहेज देना पड़ता है।
  • माँ-बाप को दहेज़ के लिऐ उधार तक लेना पड़ता है, जिसकी वजह से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है।
  • कई बार लड़की (दुल्हन) अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखकर परेशान रहती है।
  • कभी-कभी दहेज़ के पैसे जमा न होने पर लोग आत्महत्या जैसे संगीन अपराध कर लेते हैं।
  • भारत में पिछले कुछ सालों में दहेज़ की वजह से आत्महत्या के बहुत सारे मामले सामने आए हैं।
  • दहेज़ न मिलने पर लड़के के परिवार वाले लड़की को बहुत परेशान भी करते हैं।

हल

  • लोगों को लड़का और लड़की में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
  • लड़कियों को भी पढ़ने-लिखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
  • लोगों के बीच जागरूकता होनी चाहिए और यह काम मीडिया ही कर सकती है।
  • सबसे जरुरी बात यह है, कि लोगों को अपने मन से दहेज़ का लालच निकाल देना चाहिए।