कोयल | koyal | Cuckoo in Hindi

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कोयल का वैज्ञानिक नाम यूडाइनेमिस स्कोलोपेकस (Eudynamys Scolopaceus) है और कोयल को अंग्रेजी में कुक्कू (Cuckoo) कहते हैं। कोयल को कोकिल के नाम से भी जाना जाता है। कोयल अपनी मीठी और शुरुली आवाज के लिए बहुत प्रचलित है। नर और मादा कोयल की पहचान करना सरल होता है, नर कोयल की आँखें लाल और शरीर काले रंग का होता है और मादा कोयल की भी आँखें लाल होती हैं, परन्तु उसका शरीर भूरा, धब्बे बने होते हैं। नर और मादा कोयल में केवल नर कोयल ही गाता है। कोयल अपने अण्डों के लिए घोंसला नहीं बनाती है यह अपने अंडे कौआ के घोंसले में रख देती है और कौए का अंडा खा जाती है। कोयल अधिकतर जगलों के झाड़ी वाले इलाकों में निवास करती है। कोयल पूर्णतः भारतीय पक्षी है। कोयल का मुख्य भोजन छोटे कीड़े – मकोड़े और फल हैं।

जीवन

कोयल अपनी मीठी और शुरुली आवाज के लिए बहुत प्रचलित है। यह अधिकतर जगलों के झाड़ी वाले इलाकों में निवास करती हैं। अपने शर्मीले स्वाभाव के कारण कोयल हमेशा छुपकर ही रहती है। केवल कोयल पक्षी की प्रजातियाँ अपना घोसला नहीं बनाती। यह अपना अंडा चुपके से कौए के घोसलों में रख देती है और एक कौए का अंडा अपनी चोंच में दबाकर वहाँ से चली जाती है। घोसले से दूर आने के बाद में अपनी चोंच में दबाकर लाए उस अंडे का बड़े चाव से भोग कर लेती है। मादा कौआ एक ही तरह के अंडे दिखने से उनमें कोयल के अंडे को पहचान नहीं पाती और मादा कौआ कोयल के अंडे को अपना समझकर सेकती है। कोयल और कौए के अण्डों का रंग एक समान दिखाई पड़ता है। जब कोयल का बच्चा अंडे से बाहर आता है, तब कौआ कोयल के बच्चे को घोंसले से नीचे गिरा देता है। संगीतकार कवी और लेखक अपने कार्यों में जब शुरुली आवाज की तुलना करते हैं तब वह कोयल का उल्लेख हमेशा करते हैं।