सारस का वैज्ञानिक नाम गरुडाऐ (Grudaei) है और सारस को अंग्रेजी में क्रेन (Crane) कहते हैं। यह पक्षी दुनिया भर में पाए जाने वाली सभी पक्षियों में उड़ने वाला सबसे विशाल पक्षी है। भारत में सारस पक्षी को अधिक संख्या में देखा जा सकता है। सबसे बड़ा पक्षी होने के आलावा इस पक्षी की कुछ ऐसी अन्य विशेषताएं हैं, जिसके कारण इसको अधिक महत्व दिया जाता है। इस पक्षी को उत्तर प्रदेश के मैदानी और जलवायु वाले भागों में पाया जाता है। यह भौगोलिक क्षेत्र को पसंद करते हैं और यहाँ के स्थाई प्रवासी होते हैं। यह हमेशा जोड़ों में रहना पसंद करते हैं। यह पक्षी जीवन में एक ही बार जोड़ा बनाते हैं और जोड़ों में से किसी अगर किसी एक की म्रत्यु हो जाए, तो दूसरा जीवन के अंत तक दूसरा साथी नहीं चुनता या अपने साथी की याद में अन्न जल का सेवन छोड़ देता है, जिससे कुछ समय के पश्चात उसकी भी मृत्यु हो जाती है।

आहार

सारस भूमि पर बोने वाले बीज, पत्ते, नट और एकोर, बेरीज, फल और कभी-कभी यह पक्षी छोटे-छोटे जीवों का आहार करते हैं। इन पक्षियों के भोजन की सटीक संरचना स्थान, मौसम और उपलब्धता के अनुसार भिन्न होती है। सारस अलग-अलग आहार के लिए अलग-अलग तरकीबों का इस्तमाल करते हैं। यह पक्षी अपने आहार की पूर्ति के लिए बगुले के शिकार करने के तरीके को बड़ी बखूबी से इस्तमाल करते हैं, बगुले के भांति सारस भी शिकार करने के लिए अपनी चोंच में चारा रखकर कीड़े-मकोंड़ो के बिल के सामने अपनी चोंच को स्थित करके अपने आहार की पूर्ति करते हैं। हालाँकि यह पक्षी शाकाहारी होते हैं और अनाज के दाने, हरे भरे पौधों को खाना ज्यादा पसंद करते हैं, परन्तु भोजन की पूर्ति पूर्ण ना होने पर यह पक्षी मांसाहारी आहार भी कर लेते हैं।

प्रजातियाँ और निवास

सारस की विश्व में आठ प्रकार की जातियाँ पाई जाती हैं। जिनमें से चार प्रकार की जातियाँ भारत देश में देखी जा सकती हैं। इस पक्षी की कुल संख्या अब भारत में लगभग 7500 से 10000 तक उपलब्ध है। यह पक्षी भारत के उत्तरी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी और नेपाल के तराई इलाकों में देखे जाते हैं विशेषकर गंगा के क्षेत्रों के मैदान उनके रहने के लिए प्रिय हैं। इन पक्षियों के रहने के स्थान दलदली जमीन, बाड़ वाले स्थान, तालाब, झील और अधिकतर धान के खेत आदि होते हैं। यह पक्षी दो से पाँच की संख्या में समूह बनाकर रहते हैं। ये अपने घोंसले कम पानी वाली जगह पर बनाना ज्यादा पसंद करते हैं, जहाँ हरे-भरे पौधों (अधिकतर घास और झाड़ियाँ) की संख्या ज्यादा होती है।