चित्रकार की व्यथा

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शहंशाह अकबर को गुस्सा जल्दी आता था और अगर कोई उन्हें गुस्सा दिलाता, तो कभी कभार छोटी सी गलती पर बड़ी सजा दे देते। बीरबल ये जानते थे, सिर्फ वो ही एक शहंशाह के गुस्से को शांत कर सकते थे। एक दिन शहंशाह घर की दीवारों पर हुआ रंग को देखकर बोले……!

शहंशाह अकबर बोले – सिपाही…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जी जहाँपनाह…….! आदाब

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – हमारे ख्वाबगाह की दीवारों का ये रंग किसने चुना है ?

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – आ….!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – क्या हुआ तुम्हे ? तुम जबाब, क्यों नहीं देते ? अल्फाज नहीं मिल रहे।

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – अ..अ.. जहाँपनाह…….! ये रंग आप ही ने चुना था।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – तुम्हारी ये जुर्रत, हम ऐसा रंग चुन ही नहीं सकते। और तुम हमसे इस तरह बात कैसे कर सकते हो ? और अब जाओ उसे लेकर आओ….! जिसने इस कमरे को रंगा है।

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जी…जी…. जहाँपनाह…….! माफ़ कीजियेगा मुझे…! मैं अभी जाकर उसे ले आता हूँ।

सिपाही उस रंग वाले को बुलाकर लाया, शहंशाह अकबर के पास….!

रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – आदाब जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले रंग वाले से – ओ….  आ गए तुम ?

रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! कोई गलती हुई है क्या ?

शहंशाह अकबर बोले रंग वाले से – गलती…. नहीं बिलकुल नहीं….! नाम क्या है तुम्हारा ?

रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – याकूब …. जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले रंग वाले से – याकूब ….! तो तुम्हें, अपना नाम पता है। तुम मेरी जबान समझते हो। तो तुम सीधी-सीधी बातें भी समझ सकते हो।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – अ…अ… हुजूर…..! मुझसे कोई गलती हुई है। तो मैं उसे फ़ौरन सुधार देता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले रंग वाले से – क्या फ़ौरन ? तुम हमारे ख्वाबों की दीवारों का रंग फौरन कैसे बदल सकते हो ? बताओ हमें….! हम जानना चाहते हैं।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – हुजूर…..! अब ये रंग पसंद नहीं तो, मैं सारी रात काम करके रंग बदल दुंगा।

शहंशाह अकबर बोले रंग वाले से – हमें ये रंग बिलकुल पसंद नहीं है। ये बेहद घटिया रंग है। हमें इस तरह इतना गुस्सा कभी नहीं आता। अगर ठीक से, तुम हमारा कहना मानते।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – मुझे माफ़ कीजियेगा। हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – माफ़ी मांगने से कुछ नहीं होगा। अपने सारे रंग हमें दिखाओ….! और हम बताएँगे कि कौन-सा रंग होना चाहिए ? और इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिये। वर्ना, तुम्हें वो सारे रंग पीने होंगे।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – आदाब जहाँपनाह…….!

और याकूब रंग वाला अपने सारे रंग शहंशाह अकबर के पास लाया।

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – हमें ये गुलाबी रंग चाहिए। तुम्हें याद रहेगा। अब कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जी हुजूर…..! समझ गया। हुजूर…..! मैं अभी काम शुरू करके, कल तक काम खत्म कर दुंगा।

शहंशाह अकबर के कमरे को याकूब के द्वारा रंग से रंग दिया और अकबर ने देखा और बोले…..!

शहंशाह अकबर ने कमरे का रंग देखा और बोले – अरे….! ये क्या ? सिपाही… सिपाही……!

सिपाहीबोला शहंशाह अकबर से – जी जहाँपनाह…….! जाओ….! उस रंगरेज को लेके आओ….! जाओ….! यू खड़े मत हो।

और सिपाही याकूब रंग वाले को बुलाकर लाया और शहंशाह अकबर के सामने याकूब रंग वाला बोला…..!

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – आदाब जहाँपनाह…….! आदाब…..!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – जाओ….! अपने सारे रंग लेकर तुरंत आओ….!

याकूब रंग वाला अपने सारे रंग लेने गया। तो रस्ते में बीरबल मिल गए…..!

याकूब रंग वाला बोला बीरबल से – जी माफ़ कीजियेगा हुजूर…..!

बीरबल बोले याकूब रंग वाले से – क्या बात है ? तुम क्यों परेशान हो ?

और बीरबल को याकूब रंग वाला अपनी बात बीरबल को बताने लगा…..!

बीरबल बोले याकूब रंग वाले से – सुनो, जहाँपनाह अभी काफी गुस्से में है। अगर उन्होंने पहले कहा है, तो वो तुम्हे अपने रंग पीने को जरुर कहेंगे।

याकूब रंग वाला बोला बीरबल से – रंग पीने को…..!

बीरबल बोले याकूब रंग वाले से – हाँ…..! रंग पीने को, लेकिन घबराओ मत। जो मैं कहता हूँ, वैसा ही करो। सब ठीक हो जायेगा।

बीरबल ने जो बताया याकूब रंग वाले ने वो ही किया और अपने सारे रंग लेकर शहंशाह अकबर के सामने पेश हो गया। याकूब रंग वाला बोला…..!

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! मैं अपने सारे रंग साथ लाया हूँ।

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – क्या मैंने तुम्हे ? ये रंग लगाने को नहीं कहा था।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जी जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – जी हुजूर….! तो फिर तुमने, ये रंग क्यों नहीं लगाया ? कोई बात नहीं। मैं जनता हूँ कि, तुम्हे ये कैसे याद रहेगा ? एक बार ये रंग पीयोगे, फिर कभी नहीं भूलोगे।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – रंग पीऊंगा। जहाँपनाह…….!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – हाँ… पीओगे….! चलो उठाओ मटके को और पीओ…। और तब तक मत रुकना, जब तक कि हम ना कहे….!

याकूब रंग वाले ने रंग पीना शुरू किया तो, शहंशाह अकबर देखकर घबराने लगे और बोले…..!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – रुको….! ये रंग पीकर, हम तुम्हें मरना नहीं चाहते। उम्मीद है, तुमने सबक सीख लिया होगा। हम चाहते हैं, यही रंग लेकर तुम इन दीवारों को अच्छी तरह से रंग दो।

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जी जहाँपनाह…….! शुक्रिया जहाँपनाह…….! अब कोई गलती नहीं होगी। जहाँपनाह…….! शुक्रिया जहाँपनाह…….! शुक्रिया….!

शहंशाह अकबर सोचने लगे – इतना रंग पीने के बाद….! अब ये शायद दो तीन दिनों तक बीमार रहेगा।

अगले दिन शहंशाह अकबर दरबार से आये। अपने घर की दीवारों पर याकूब रंग को रंग करते हुए देखा, तो सोचने लगे…..!

भला, ये कैसे हो सकता है ? इतना सारा रंग पीने के बाद, ये काम पर कैसे आया ? इसे तो बीमार होना चाहिए था। और बोले….!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – सुनो, तुम आज अपना काम खत्म करने वाले थे। लेकिन, तुमने तो अपना पुराना रंग भी नहीं उतारा। जाओ और अपने रंग लेकर आओ….!

याकूब रंग वाला शहंशाह अकबर के घर थोडा आगे चलकर सिपाही से पूछने लगा….!

याकूब रंग वाला सिपाही से बोला – अभी मुझे राजा बीरबल…! कहाँ मिलेंगे ?

सिपाही बोला याकूब रंग वाले से – शाही बाग़ में जाकर ढूंढो। शाम के वक्त वो वही रहते हैं।

याकूब रंग वाला शहंशाह अकबर के शाही बाग़ में बीरबल से मिलने गया। और बोला….!

याकूब रंग वाला बोला बीरबल से – आदाब हुजूर…..! मुझे आपकी मदद चाहिए। शहंशाह अकबर मेरा इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सिर्फ मुझे रंग लाने को कहा है। अब मैं क्या करुंगा ? हुजूर…..!

बीरबल बोले याकूब रंग वाले से – घबराओ मत। ऐसा करो…..!

याकूब रंग वाला फिर शहंशाह अकबर के सामने अपने रंग लेकर आया। और याकूब बोला….!

याकूब रंग वाला बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह…….! मैं अपने रंग ले आया।

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – ठीक है, अब हम तुम्हें दोगुनी सजा देंगे। आज तुम दो रंग पीओगे। ये और ये….!

याकूब रंग वाला दो मटका रंग को देखकर घबराने लगा…..! और मटका उठाकर रंग पीने लगा। तो शहंशाह अकबर देखकर अचंभित रह गए। और बोले…..!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – रुको….! ये काफी है। रंग का मटका मुझे दो….!

याकूब ने एक रंग का मटका शहंशाह अकबर को दिया। शहंशाह अकबर ने रंग के मटके में ऊँगली डालकर अपने मुंह से चाखकर देखा तो बोले….!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – क्या….? ये तो शरबत है। तुम्हारी ये मजाल…..! हमें बेवकूफ बनाना चाहा। बोलो, ये तरकीब किसने बताई ?

तभी बीरबल शहंशाह अकबर और याकूब रंग वाले के पास आ गये। और बोले…..!

बीरबल बोले अकबर से – मैंने कहा हुजूर….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हमें समझ जाना चाहिए था। बीरबल…..! ये तुम ही हो सकते हो। तभी इसने रंग लाने में देर लगा दी। कल भी आज भी, पर ये बताओ….! तुम्हे कैसे पता चला कि आज में कौन सा रंग पीने को कहुंगा ?

बीरबल बोले अकबर से – हुजूर….! मुझे नहीं पता था कि आप इसे कौन सा रंग पीने को कहेंगे ? इसीलिये मैंने रसोई घर से हर मटके में अलग-अलग रंगों के शरबत बनाने को कहा…..!

और इस बात को सुनकर शहंशाह अकबर हंसने लगे….! और बोले…..!

शहंशाह अकबर बीरबल से – बहुत खूब बीरबल…..! तुमने मेरा गुस्सा शांत कर, इस आदमी की जान बचाई है। शाबास बीरबल…..! शाबास और गुस्से में आकर एक और गलती करने से मुझे रोकने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया…..!

शहंशाह अकबर बोले याकूब रंग वाले से – और तुम, इस बार कोई भी गलती मत करना। वर्ना, बीरबल भी नहीं बचा सकेंगे। और फिर इस दौरान, तुम्हारी परेशानी की ऐवज में….! आज रात दावत में तुम भी शामिल होना।

बीरबल और याकूब बोले अकबर से – आदाब हुजूर…. आदाब…..!