चरण सिंह की जीवनी | Charan Singh Biography in Hindi

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जीवन व परिवार

चरण सिंह का पूरा नाम ‘चौधरी चरण सिंह’ था। इनका जन्म 23 दिसम्बर 1902 को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इनके पिता का नाम चौधरी मीर सिंह था। इनका विवाह 1929 में गायत्री देवी से हुआ और उनसे इनके 5 बच्चे हुए। इनके पिता एक गरीब किसान थे, गरीब होने के बावजूद चौधरी मीर सिंह ने पढ़ाई को पहला दर्जा दिया।

इनके परिवार का संबंध 1857 की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले राजा नाहर सिंह से था। चौधरी चरण सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा नूरपुर गांव में हुई और मैट्रिक इन्होंने मेरठ के उच्च विद्यालय से की। 1923 में वे विज्ञान से ग्रेजुएट हुए। इसके बाद चौधरी चरण सिंह वकील बने और गाजियाबाद में वकालत करने लगे।

आजादी में योगदान

1929 में चौधरी चरण सिंह ने स्वतंत्रता आन्दोलन में हिस्सा लेना शुरू किया। सबसे पहले चौधरी चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस का गठन किया। चौधरी चरण सिंह को 6 महीनों के लिए जेल भी जाना पड़ा।

राजनीतिक पद

  • वित्त मंत्री- 24 जनवरी 1979 से 28 जुलाई 1979 तक।
  • उप-प्रधानमंत्री- 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक।
  • गृहमंत्री- 24 मार्च 1977 से 1 जुलाई 1978 तक।
  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री- 3 अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 तक, तथा 18 फरवरी 1970 से 1 अक्टूबर 1970 तक।

चौधरी चरण सिंह जनता पार्टी से थे। चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहे और देश की सेवा करते रहे। चौधरी चरण सिंह केवल 7 महीनों के लिए ही प्रधानमंत्री रहे, मगर इस दौरान उन्होंने किसानों के हालात सुधारने और उनके अधिकारों के लिए बहुत काम किया। देश की आजादी में भी चौधरी चरण सिंह ने अपना योगदान दिया। इन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा देश की राजनीति के नाम किया।

कार्य

चौधरी चरण सिंह किसानों के लिए एक मसीहा की तरह थे। चौधरी चरण सिंह सारे उत्तर प्रदेश के किसानों से मिले और उनकी समस्या का अंत किया। भारत की भूमि हमेशा से कृषि प्रधान रही है। किसानों के प्रति प्रेम ने चरण सिंह को इतना सम्मान दिया कि इन्हें कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ा। इनका जीवन सादगी और सिद्धांत से हमेशा भरा रहा।

चौधरी चरण सिंह भी गाँधीवादी विचारधारा वाले नेता थे। गाँधीवादी नेताओं ने बाद में जब कांग्रेस छोड़ अलग पार्टी बनाई थी, तब नेताओं ने गाँधी टोपी का त्यागकर दिया था, पर चरण सिंह ने उसे जीवन भर धारण किया। गाँधी जी ने किसानों को भारत का सरताज कहा था। आजादी के बाद चरण सिंह ही एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने किसानों का जीवन पहले से बेहतर किया।

मृत्यु

चौधरी चरण सिंह का देहांत 29 मई 1987 में हुआ था। उनके देहांत के समय उनकी उम्र 84 वर्ष थी।