चार मित्र और शिकारी | Char Mitra Aur Shikari in Hindi

1914

जंगल में हिरन, कौआ, कछुआ और चूहे की गहरी मित्रता थी। एक बार जंगल में शिकारी आया और उस शिकारी ने हिरन को अपने जाल में फंसा लिया। अब बेचारा हिरन असहाय सा जाल में फंसा था। उसे लगा कि आज मेरी मृत्यु निश्चित है, इस डर से वह घबराने लगा। तभी उसके मित्र कौए ने ये सब देख लिया और उसने कछुआ और चूहे को भी हिरन की सहायता के लिए बुला लिया।

कौए ने जाल में फंसे हिरन पर इस तरह चोंच मारना शुरू कर दिया जैसे कौए किसी मृत जानवर की लाश को नोंचकर खाते हैं। अब शिकारी को लगा कि कहीं यह हिरन मर तो नहीं गया। तभी कछुआ उसके आगे से गुजरा। शिकारी ने सोचा हिरन तो मर गया, इस कछुए को ही पकड़ लेता हूँ। यही सोचकर वह कछुए के पीछे-पीछे चल दिया।

इधर मौका पाते ही चूहे ने हिरन का सारा जाल काट डाला और उसे आजाद कर दिया। शिकारी कछुए के पीछे-पीछे जा ही रहा था कि तभी कौआ उड़ता हुआ आया और कछुए को अपनी चौंच में दबाकर उड़ाकर ले गया। इस तरह सभी मित्रों ने मिलकर एक दूसरे की जान बचायी।

कहानी से सीख

एक साथ मिलकर कार्य करने से कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं।