चाणक्य की जीवनी | Chanakya Biography in Hindi

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परिचय

अर्थशास्त्र, राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति जैसे महान ग्रंथ मानव समाज को चाणक्य द्वारा प्राप्त हुए। चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के मित्र थे, चाणक्य ने नंद वंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को मौर्य साम्राज्य का राजा बनाया और स्वयं चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री बने। वह संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान थे। चाणक्य मन से सन्यासी थे, वह अति विद्वान और मौर्य जैसे साम्राज्य के महामंत्री होकर भी राजसी ठाट-बाट से दूर अपनी एक छोटी सी कुटिया में निवास करते थे। वह मानते थे कि राजा या मंत्री अपने साम्राज्य के लोगों को अपने चरित्र और उच्च कोटि के विचारों से प्रेरणा दे सकता है। उनका नाम हिन्दूओं के महान ग्रंथों में मिलता ही है, उसके अलावा बौद्ध ग्रंथो में भी मिलता है।

जन्म व बचपन

चाणक्य के जन्म व स्थान को लेकर भारत में बहुत तथ्य मिलते हैं। चाणक्य की जन्मभूमि को हर विद्वान अलग-अलग बताते हैं। चाणक्य भारत देश में ‘कौटिल्य’ के नाम से भी जाने जाते हैं और मुद्राराक्षस (विशाखदत्त द्वारा रचित संस्कृत ऐतिहासिक नाटक) के अनुसार उनका असली नाम विष्णुगुप्त बताया गया है। उनके पिता ‘चणक’ एक गरीब ब्राह्मण थे और भिक्षा माँगकर अपना जीवन-यापन करते थे। गरीब परिवार से होने के कारण उनका बचपन गरीबी में गुज़रा। चाणक्य को दीक्षा व ज्ञान की प्राप्ति कैसे हुई इसका उल्लेख कुछ विशेष रूप से नहीं मिलता, उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथों से उनके ज्ञान का परिचय मिलता है। चाणक्य बचपन से ही कठोर दृंढ संकल्प और लगनशील स्वाभाव वाले व्यक्ति थे।

जीवन कार्य

एक बार मगध के राजा महानंद ने चाणक्य को श्राद्ध के अवसर पर अपमानित किया था, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने अपनी चोटी खोलकर प्रतिज्ञा की थी कि वह नंद वंश का विनाश जब तक नहीं कर लेंगे वह अपनी चोटी को नहीं बांधेंगे, इसी कारण उन्हें राजनीति में प्रवेश करना पड़ा। नंद वंश का नाश करके चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बिठाया और उन्हें पराक्रमी बनाने और मौर्य साम्राज्य की वृद्धि के उद्देश्य से वह चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री बने।

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य को गुप्त रूप से भोजन में थोड़ी मात्रा में विष दिया करते थे, जिससे उनका शरीर दुश्मनों द्वारा विष से प्रतिरक्षित हो सके। एक दिन इस बात से अनजान चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपनी गर्भवती पत्नी को अपना भोजन कराया, जिसके कारण उनकी पत्नी का शरीर प्रतिरक्षित ना होने पर उनकी मृत्यु हो गई। मौर्य राजवंश के सम्राट की पत्नी का गर्भ बचाने के लिए चाणक्य ने तुरंत चाकू से उनका पेट चीरकर गर्भ को बाहर निकाल लिया। चन्द्रगुप्त की पत्नी के गर्भ से मौर्य साम्राज्य का राजवंश पैदा हुआ जिसका आगे चलकर नाम बिंदुसार पड़ा।

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिंदुसार के कई वर्षों तक महामंत्री भी रहे। चाणक्य मौर्य साम्राज्य के दूरदर्शी राजनीतिज्ञ के रूप में संस्थापक और संरक्षक माने जाते हैं।

मृत्यु

चाणक्य की शिक्षा-दीक्षा के साथ उनकी मृत्यु के विषय में भी विवाद बना हुआ है। उनकी मृत्यु के भी भारत में बहुत तथ्य मिलते हैं। किसी के मत अनुसार जब वह सेवानिवृत्त हुए तब वह जंगल चले गए, जहाँ उन्होंने भूखा रहकर अपने प्राण त्याग दिए। किसी और के मत अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य के बेटे बिंदुसार को जब मंत्री सुबंधु के द्वारा पता चला कि उनकी माता की मृत्यु का कारण चाणक्य हैं तो उन्होंने एक षड्यंत्र द्वारा चाणक्य की हत्या करवा दी। जब बिंदुसार को असलियत का पता चला कि उनकी माता की मृत्यु चाणक्य ने सही में नहीं की बल्कि दुर्घटना वश हो गई थी, तो उन्हें बहुत पछतावा हुआ परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

चाणक्य को अपने द्वारा रचे गए विषयों का एकमात्र विद्वान होने का गौरव प्राप्त है। चाणक्य की तरह विचारक और कूटनीतिज्ञ फिर कभी दूसरा नहीं हुआ। वह अब तक के पहले इंसान हैं, जिन्होंने अखंड भारत का स्वप्न देखा और उसे पूरा भी कर दिखाया। चाणक्य की नीति आज के मनुष्य के लिए प्रेरणा बन चुकी है।