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चालीसा

इष्टदेव की सरल भाषा में की जाने वाली उपासना को चालीसा कहते हैं। चालीसा में चालीस लाइनें होती हैं, इसलिए इसे चालीसा कहते हैं। श्रद्धा, स्वच्छता का ध्यान रखकर ही सरलता से चालीसा का पाठ किया जा सकता है। सरलता से इष्टदेव को प्रसन्न करने का यह तरीका हिन्दू धर्म में काफी लोकप्रिय है।

माता संतोषी की पूजा के लिए शुक्रवार का व्रत करने का विधान है। शुक्रवार के दिन माता संतोषी की पूजा में निम्न चालीसा का भी पाठ किया जाता है। ।।दोहा।। श्री गणपति पद नाय सिर, धरि हिय शारदा ध्यान। सन्तोषी माँ की करूँ, कीरति सकल बखान।। ।।चैपाई।। जय संतोषी माँ जग जननी, खल मति...
हिन्दू धर्म में पार्वती जी को आदिशक्ति कहा गया है। काली, दुर्गा, अन्नपूर्णा, गौरा सब देवी पार्वती का ही रूप है। पार्वती जी की उपासना करने से मनुष्य के दुःखों का अंत हो जाता है। ॥दोहा॥ जय गिरी तनये डग्यगे शम्भू प्रिये गुणखानी गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी ॥चालीसा ॥ ब्रह्मा...
श्री राधा जी को चतुर्भुज विष्णु की अर्धांगिनी श्री लक्ष्मी का अवतार माना गया है। श्री राधा जी की आराधना से सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ॥दोहा॥ श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार। वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ बारम्बार।। जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम। चरण शरण निज दीजिये सुन्दर सुखद ललाम।। ॥चौपाई॥ जय वृषभानु कुँवरी श्री...
भगवान विष्णु को दया-प्रेम का सागर माना जाता है। जगत का पालन श्री हरि विष्णु जी करते हैं। विष्णु जी त्रिदेवों में से एक बताए गए हैं। सच्चे मन से आराधना करने पर व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। ॥दोहा॥ विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूं...
माता काली को देवी दुर्गा का अवतार माना गया है। इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि या मां काली कहा जाता है। इनकी उत्पत्ति राक्षसों के संहार हेतु की गयी थी। ।।दोहा।। जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब। देहु दर्श जगदम्बा अब, करो न मातु विलम्ब।। जय तारा जय कालिका...
सूर्य देव की आराधना पुत्र की प्राप्ति के लिए शुभ फलदायी होती है। सूर्य देव इस जगत की आत्मा हैं। सूर्य देव की पूजा में गायत्री मंत्र के साथ उनकी चालीसा का भी विशेष महत्तव है। ॥दोहा॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥ ॥चौपाई॥ जय सविता...
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गंगा सबसे पवित्रतम नदी है। शास्त्रों में इसे पतित पावनी अर्थात मनुष्य के पापों को धोने वाली नदी कहकर प्रशंसा की गई है। ॥दोहा॥ जय जय जय जग पावनीए जयति देवसरि गंग। जय शिव जटा निवासिनीए अनुपम तुंग तरंग॥ ॥चौपाई॥ जय जग जननी हरण अघखानी। आनंद करनी गंगा महारानी॥ जय भगीरथी सुरसरि...
हिन्दू धर्म में तुलसी को देवी के रूप में सम्मानित किया गया है। तुलसी को भगवान विष्णु की पत्नी माना गया है। तुलसी को अक्सर भगवान विष्णु की प्रिय या विष्णुप्रिया के रूप में बुलाया जाता है। ।।दोहा।। श्री तुलसी महारानी, करूँ विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। ।।चैपाई।। नमो...
माता गायत्री भगवान शिव की तरह कल्याणकारी हैं। माता गायत्री की अनंत कृपा से पतितों को उच्चता मिलती है और पापियों के नाश होते हैं। पूरी भक्ति के साथ जो इस चालीसा का पाठ करता है, उस पर माँ गायत्री प्रसन्न होकर कृपा करती हैं। ॥दोहा॥ ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा...
हिन्दू धर्म के अनुसार श्री कृष्ण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। श्री कृष्ण वंदना के लिए लोग "हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे हरे" का जाप करते हैं। कृष्ण जी की पूजा में उनकी चालीसा का भी महत्तवपूर्ण स्थान है। ॥दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद...

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