CAB क्या है ?

चंद दिनों पहले देश के कोने-कोने में CAA और CAB के नाम पर जंग छिड़ी थी। चाहे वो दिल्ली का शाहीन बाग हो या फिर उत्तर प्रदेश देश का हर कोना इस आग की चपेट में आकर जल रहा था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि CAA और CAB आखिर है क्या ? और क्यों इसके कारण पूरा देश दो हिस्से में बंट गया था। एक वो जो इसका समर्थन करते थे और एक वो जो इसका पुरजोर विरोध। तो चलिए शुरू करते हैं एकदम शुरू से और बताते हैं आपको CAA और CAB से जुड़ा एक-एक पहलू, निवेदन है कि CAA और CAB से जुड़ी पूरी जानकारी पाने के लिए इस आर्टिकल को शुरु से लेकर अंत तक पढ़े। 

सबसे पहले जानें CAB और CAA में अंतर

जैसे गंगाधर ही शक्तिमान है ठीक वैसे ही CAB का ही नया नाम CAA है। दरअसल CAB का फुल फॉर्म Citizenship Amendment Bill यानी की “नागरिकता (संशोधन) विधेयक” है लेकिन यही बिल जब लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से पास कर दिया गया तब से यह Citizenship Amendment Act (CAA) यानी की “नागरिकता संशोधन कानून” बन गया है।

क्यों लाया गया CAB 2019?

नागरिकता संशोधन बिल 2019 वो बिल था जिसके माध्यम से मोदी सरकार दूसरे देश से भारत आए शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के नियमों में ढील देना चाह रही थी। 

किसे मिलती CAB से नागरिकता ?

नागरिकता संशोधन बिल यानी की CAB  के जरिये पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए किसी भी हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। 

क्यों छिड़ा था इस कानून पर विवाद ?

दरअसल इस बिल में यह साफ साफ लिखा है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों जो कि वहाँ धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हैं जैसे हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को ही भारत की नागरिकता दी जाएगी। इनमें कहीं भी मुस्लिम समुदाय के लोगों का जिक्र नहीं है। इसी बात पर इस देश का एक तबका इस बिल के विरोध में लगा था। हालांकि मोदी सरकार का यह कहना था कि हम उन्हीं देशों से भारत आए लोगों को नागरिकता देने पर विचार कर रहे हैं जहाँ मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है मतलब वहां वो बहुसंख्यक के रूप में हैं और बाकी लोग अल्पसंख्यक। इस मुद्दे पर कई नेता से लेकर बुद्धिजीवियों ने अपनी बात रखी कई दिन तक इसी बात को लेकर दिल्ली का शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन भी हुआ लेकिन अतं में यह बिल कानून बन गया।

CAA और CAB से जुड़ी गलत खबर 

देश के कुछ लोग अपने सामाजिक और राजनीतिक फायदे के लिए इस बात की गलत जानकारी फैलाई की इस बिल के जरिये मुस्लिम लोगों की नागरिकता वापस ले ली जाएगी। इन सब के बीच NRC के मुद्दे को भी घोल कर ऐसी आग लगाई गई थी कि देश के कई कोने में उसकी चिंगारी देखने को मिली। हालांकि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने यह साफ साफ कहा है कि CAA और CAB लोगों को नागरिकता देने के लिए है न कि लेने के लिए है।

क्या है इस बिल में खास ?

भारत की नागरिकता लेने के लिए यूं तो कई प्रावधान हैं हालांकि इस बिल के जरिये उन लोगों को भारत की नागरिकता लेने में छूट मिलेगी जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर 2014 से पहले भारत आ चुके हैं। उन्हीं लोगों को इस बिल के जरिये भारत की नागरिकता लेने में आसानी होगी। भारत की नागरिकता लेने के लिए पहले जो कानून था उसके मुताबिक भारत में 11 साल तक रह लेने के पश्चात ही आप नागरिकता लेने के योग्य होते हैं।

कब कब हुआ है नागरिकता कानून में बदलाव ?

भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 (Indian Citizenship Act 1995) में लागू हुआ था, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर किसी विदेशी नागरिक को किन शर्तों के आधार पर भारत की नागरिकता दी जाएगी, इसके साथ ही भारतीय नागरिक बनने के लिए क्या क्या जरूरी शर्तें हैं। इस बिल के बनने के बाद से लेकर अब तक इसमें पांच बार (1986, 1992, 2003, 2005 और 2015) में संशोधन हो चुका है। 

अब आप समझ ही चुके होंगे कि आखिर CAA और CAB क्या था और क्यों इसे लेकर पूरे देश में घमासान मचा था। देश दुनिया से जुड़े अन्य मुद्दों की पूरी जानकारी जानने के लिए हमारी वेबसाइट के दूसरे आर्टिकल को भी जरूर पढ़े।