बीजू पटनायक की जीवनी | Biju Patnaik Biography in Hindi

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परिचय

बीजू पटनायक भारतीय राजनेता के अलावा उद्योगपति, पायलट, एयरनोटिकल इंजीनियर, नेविगेटर, और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्हें ‘बिजयानंद पटनायक’ के नाम से भी जाना जाता था। वे 2 बार ओडिशा राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। इनके नाम पर भुवनेश्वर में बीजू पटनायक हवाई अड्डा है। बीजू पटनायक का जन्म उड़ीसा के कटक में 5 मार्च 1916 को हुआ। उनके पिता का नाम स्वर्गीय ‘लक्ष्मीनारायण पटनायक’ तथा माता का नाम ‘आशालता पटनायक’ था। उनके पिता उडि़या आंदोलन के अग्रणी सदस्य और जाने-माने राष्ट्रवादी थे।

बीजू पटनायक ने अपनी शुरूआती पढ़ाई मिशन प्राइमरी स्कूल और मिशन क्राइस्ट कॉलेजिएट कटक से प्राप्त की। सन 1927 में वे रेवेनशॉ विद्यालय चले गए, जहां एक समय पर ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस’ ने भी अध्ययन किया था। बीजू पटनायक अपने कॉलेज के दिनों में प्रभावशाली खिलाड़ी थे और यूनिवर्सिटी की फुटबॉल, हॉकी एवं एथलेटिक्स टीम का नेतृत्व करते थे।

बीजू पटनायक 3 वर्ष तक लगातार स्पोर्ट्स चैंपियन रहे। दिल्ली फ्लाइंग क्लब और एयरनोटिक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में पायलट का प्रशिक्षण लेने के लिए उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। बचपन से ही उनकी रुचि हवाई जहाज उड़ाने में थी। इस प्रकार वे एक प्रसिद्ध पायलट तथा नेविगेटर बन गए। बीजू पटनायक ने इंडियन नेशनल एयरवेज ज्वाइन कर ली और एक पायलट बन गए। सन 1940-42 के दौरान जब स्वतंत्रता का संघर्ष जारी था, वह एयर ट्रांसपोर्ट कमांड के प्रमुख थे।

बीजू पटनायक ‘महात्मा गांधी’ से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में हिस्सा लिया और सन 1943 में 2 वर्ष के लिए जेल भी जाना पड़ा। उन पर स्वतंत्रता सेनानियों को अपने प्लेन में गुप्त स्थान तक पहुंचाने का आरोप था। जब दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ, तब उन्होंने ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ ज्वाइन कर लिया। उन्होंने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘जवाहर लाल नेहरू’ के नेतृत्व में उन्होंने डच शासकों के चंगुल से इंडोनेशिया के व्यक्तियों को आजाद कराने में सहायता की।

23 मार्च 1947 को जवाहर लाल नेहरू ने 22 एशियाई देशों की पहली इंटर एशिया कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए बीजू पटनायक को भी आमंत्रित किया। इस कांफ्रेंस में इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री ‘सुल्तान सजाहिर्र’ भी आमंत्रित थे। जवाहर लाल नेहरू बीजू पटनायक पर भरोसा करते थे, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री सुल्तान सजाहिर्र का आगमन सुरक्षित सुनिश्चित करने के लिए उनसे कहा और बीजू पटनायक ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। इसके बाद इंडोनेशिया के लोगों में उनकी छवि एक नायक की बन गई।

सन 1946 में बीजू पटनायक उत्तर कटक विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने सन 1961 से 1963 तक उड़ीसा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल संभाला। वे लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। सन 1975 में जब देश में आपातकाल की स्थिति थी, तब अन्य विपक्षी नेताओं के साथ गिरफ्तार होने वाले बीजू पटनायक पहले व्यक्ति थे। सन 1977 में वे जेल से छूटे और केंद्रपारा से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए तथा सन 1979 तक मोरारजी देसाई और ‘चौधरी चरण सिंह’ की सरकार में केंद्रीय लोहा इस्पात व खनन मंत्री रहे। सन 1980 में बीजू पटनायक लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और सन 1986 में वे दोबारा से लोकसभा का चुनाव जीत गए। सन 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल की जीत हुई और दोबारा से उड़ीसा के मुख्यमंत्री बने और सन 1995 तक मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उड़ीसा की सेवा की।

पुरस्कार

  • उन्हें इंडोनेशिया की सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भूमि पुत्र’ से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार उनकी वीरता और साहसिक कार्यों के चलते दिया गया।
  • उन्हें सन 1996 में इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘बिनतांग जासू उतमा’ प्रदान किया गया।

मृत्यु

बीजू पटनायक की मृत्यु 17 अप्रैल 1997 को 81 साल की आयु में दिल और सांस की बीमारी के चलते हो गई।