भूपेन हज़ारिका की जीवनी | Bhupen Hazarika Biography in Hindi

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परिचय

डॉ. भूपेन हज़ारिका को दक्षिण एशिया के महान सांस्कृतिक दूतों में गिना जाता है। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया। वे पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने असमिया संस्कृति को विश्व मंच तक पहुंचाया। वे संगीतकार, संगीत–निर्देशक, वाद्य–यंत्र वादक, सिनेमा निर्देशक होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि, गद्यकार, निबंधकार, नाट्यकार थे।

जन्म

भूपेन हज़ारिका का जन्म सन 1926 के 8 सितम्बर को शदिया (असम) में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘नीलकांत हज़ारिका’ तथा माँ का नाम ‘शांतिप्रिया हज़ारिका’ था। ‘नीलकांत हज़ारिका’ स्कूल उप–परिदर्शक थे। बाद में वे एस.डी.सी. बने थे। भूपेन हज़ारिका के 7 भाई और तीन बहने थीं, वे भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।

प्रारंभिक और उच्च शिक्षा

भूपेन हजारिका ने करीब 13 साल की आयु में सन 1940 में तेजपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। आगे की पढ़ाई के लिए वे गुवाहाटी गए। 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट (कला शाखा) किया। 1946 में उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम. ए. किया। इसके बाद पढ़ाई के लिए वे अमेरिका चले गए। सन 1952 में न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से उन्होंने पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की।

वैवाहिक जीवन

भूपेन हज़ारिका की शादी 1 अगस्त सन 1950 को 23 वर्ष की आयु में न्यूयार्क शहर में ‘प्रियम पटेल’ के साथ हुई। प्रियम पटेल काम्पला, यूगांडार के प्रसिद्ध चिकित्सक ‘मूलजी भाई पटेल’ और उनकी पत्नी ‘मणिबेन पटेल’ की बेटी थी। भूपेन हज़ारिका और प्रियम पटेल को सन. 1952 में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम ‘तेज भूपेन हज़ारिका’ रखा गया।

सफर गीत संगीत का

भूपेन हज़ारिका बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार थे। बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और 10 वर्ष की आयु में उसे गाया था। असमिया भाषा की फ़िल्मों से भी उनका नाता बचपन में ही जुड़ गया। उन्होंने सन. 1939 में 12 वर्ष की आयु मॆं असमिया भाषा में निर्मित दूसरी फ़िल्म इंद्रमालती के लिए काम किया। उन्होंने लगभग 70 साल तक अपनी आवाज़ से पूर्वोत्तर के साथ बॉलीवुड में भी राज किया। सन. 1956 में उन्होंने अपनी फ़िल्म ‘एरा बतर सुर’ का निर्देशन किया। उन्होंने बंगाली, असमिया तथा हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए। प्रसिद्ध फ़िल्म ‘रूदाली’ के गीत ‘दिल हूं हूं करे’ के द्वारा वे हिंदी फ़िल्म जगत् में छा गए।

इसके अलावा भूपेन हज़ारिका ने दमन फ़िल्म में ‘गुम सुम’ गाना भी गाया। उन्होंने ‘मैं और मेरा साया, एक कली दो पत्तियां, हां आवारा हूं, उस दिन की बात है’ जैसे कई सारे हिंदी गीत गाए। बिहू के गीतों में भूपेन हज़ारिका ने अपनी आवाज़ दी। उन्होंने अपनी आवाज़ ‘गांधी टू हिटलर’ फ़िल्म में महात्मा गांधी के प्रसिद्ध भजन ‘वैष्णव जन’ में दी।

हिंदी फ़िल्म स्वीकृति, एक पल, सिराज, प्रतिमूर्ति, दो राहें, साज, गजगामिनी, दमन, क्यों और चिंगारी जैसी हिंदी फ़िल्मों में भूपेन हज़ारिका ने अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। उन्होंने स्वीकृति और सिराज जैसी हिंदी फ़िल्मों को निर्देशित कर फ़िल्म निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा का लौहा मनवाया। हिंदी फ़िल्म एक पल में उन्होंने अभिनेता के तौर पर भी काम किया।

पुरस्कार और सम्मान

  • भूपेन हजारिका को 1975 में सर्वोत्कृष्ट क्षेत्रीय फिल्म के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1977 में ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 2001 में ‘पद्म भूषण’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • इसके अलावा उन्हें 2008-09 में ‘असोम रत्न’ और ‘संगीत नाटक अकादमी’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
  • 2012 में ‘पद्म विभूषण’ पुरस्कार (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
  • 2019 में देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ (मरणोपरांत) देने की घोषणा की गई। 70 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्हें नवाजा गया।

निधन

मशहूर गायक और संगीतकार भूपेन हज़ारिका लम्बे समय से निमोनिया से पीड़ित थे। 5 नवंबर 2011 को 86 वर्ष की आयु में भूपेन हज़ारिका का मुम्बई के कोकिलाबेन धीरूबाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया।